कदम्ब के पेड़ से डायबिटीज फॉर्मूला
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →
जयपुर के वैज्ञानिक सुरेश शर्मा ने कदम्ब के पेड़ से तैयार फॉर्मूले पर शोध किया था, जिसका पेटेंट भी उन्हें मिला था। उनके निधन के बाद बेटे आलेख शर्मा ने नौकरी छोड़कर शोध को आगे बढ़ाने और प्री-क्लिनिकल व क्लिनिकल ट्रायल पूरा कराने का बीड़ा उठाया।
जयपुर, 5 अक्टूबर। टाइप-2 डायबिटीज के इलाज को लेकर जयपुर में कदम्ब के पेड़ से तैयार किए गए एक विशेष फॉर्मूले पर लंबे समय तक शोध किए जाने का मामला सामने आया है। इस स्वदेशी फॉर्मूले को विकसित करने वाले वैज्ञानिक सुरेश शर्मा को इसका पेटेंट भी मिल चुका था। हालांकि वैज्ञानिक परीक्षण पूरा होने से पहले ही उनका निधन हो गया।
पिता के अधूरे शोध को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी उनके बेटे आलेख शर्मा ने संभाली। इसके लिए उन्होंने मर्चेंट नेवी की नौकरी छोड़ दी और अपने पिता के वर्षों के शोध को आगे ले जाने में जुट गए।
आलेख शर्मा के अनुसार, इस स्वदेशी फॉर्मूले को आगे बढ़ाने के लिए उन्हें विदेश से भी कई प्रस्ताव मिले, लेकिन उनका उद्देश्य शोध को भारत में आगे बढ़ाकर इसे वैज्ञानिक परीक्षणों की प्रक्रिया से गुजारना है। वर्तमान में फॉर्मूले के प्री-क्लिनिकल और क्लिनिकल ट्रायल को पूरा करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।
उनका कहना है कि इस शोध का उद्देश्य टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों के लिए लंबे समय तक प्रभावी उपचार विकसित करना है। हालांकि किसी भी नई दवा या उपचार की प्रभावशीलता और सुरक्षा को स्थापित करने के लिए निर्धारित वैज्ञानिक परीक्षणों का सफलतापूर्वक पूरा होना जरूरी है।
पिता के शोध को आगे बढ़ाने में जुटे आलेख शर्मा का लक्ष्य इस फॉर्मूले को वैज्ञानिक कसौटियों पर परखकर आगे ले जाना है, ताकि यदि परीक्षणों में इसकी प्रभावशीलता और सुरक्षा प्रमाणित होती है तो भविष्य में डायबिटीज मरीजों के लिए एक स्वदेशी उपचार विकल्प विकसित किया जा सके।
बाइट - आलेख शर्मा, शोधकर्ता