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'कहां हैं, कोई अपडेट नहीं...', दीपके की हिरासत पर बोली CJP, पुलिस पर किडनैपिंग का आरोप

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 17 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
'कहां हैं, कोई अपडेट नहीं...', दीपके की हिरासत पर बोली CJP, पुलिस पर किडनैपिंग का आरोप

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने शनिवार तड़के दावा किया कि दिल्ली पुलिस ने उसके संस्थापक अभिजीत दीपके को हिरासत में लेने के बाद अज्ञात स्थान पर रखा है और उनके बारे में परिवार, वकीलों या पार्टी के सदस्यों को कोई जानकारी नहीं दी जा रही है.

पार्टी ने इस कार्रवाई को अपहरण बताते हुए सोशल मीडिया पर सवाल उठाया, अभिजीत कहां है?

सीजेपी के नेता अजिंक्य शिंदे के मुताबिक, दीपके को हिरासत में लिए जाने के 10 घंटे से अधिक समय बाद भी उनकी स्थिति का पता नहीं चल पाया था.

दीपके को झंडेवालान से लिया गया था हिरासत में

दीपके को दिल्ली में लहरा दो तिरंगा विरोध प्रदर्शन में शामिल होने के लिए कनॉट प्लेस जाते समय झंडेवालान इलाके से हिरासत में लिया गया था.

समाचार एजेंसी पीटीआई ने पुलिस सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी.

सीजेपी का आरोप है कि हिरासत में लेने के बाद दीपके को किसी अज्ञात स्थान पर ले जाया गया और उन्हें अपने वकीलों से बात करने की अनुमति भी नहीं दी गई.

सीजेपी ने पूछा- अभिजीत दीपके कहां हैं?

सीजेपी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर दावा किया कि दिल्ली पुलिस ने अभिजीत दीपके को अगवा कर लिया है.

पार्टी ने लिखा कि दीपके को हिरासत में लिए हुए 10 घंटे से अधिक समय बीत चुका है, लेकिन उनके ठिकाने के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है.

.@abhijeet_dipke has been kidnapped by @DelhiPolice It has been more than 10 hours since he was picked up but until now, neither his parents, nor his lawyers not the CJP team have been given any updates about his location We re all asking only one question: #AbhijeetKahanHai

Cockroach Janta Party - CJP (@Cockroachisback) October 16, 2026

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📡 स्रोत: ABP Live

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🎙️ वॉयस ऑफ क्रांति का मत

दीपके की गिरफ्तारी के बाद उठे सवाल हमें याद दिलाते हैं कि किसी भी विवाद का समाधान कानूनी मार्ग से ही होना चाहिए। अपहरण या गुप्त हिरासत से समाज में अविश्वास बढ़ता है। हमें साक्ष्य आधारित प्रक्रिया, पारदर्शिता और मानवीय सहानुभूति को प्राथमिकता देनी चाहिए। यदि कोई असहमति हो, तो शांति से संवाद और न्यायिक सहायता से समाधान ढूंढें, ताकि सभी के अधिकार सुरक्षित रहें।

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