कैलाश मानसरोवर यात्रियों का अंतिम दल लौटा भारत:10 दलों में 477 यात्रियों ने किए दर्शन, पिथौरागढ़ में बुरांश के जूस से हुआ स्वागत
छह साल के लंबे अंतराल के बाद शुरू हुई हिंदुओं की पवित्र कैलाश मानसरोवर यात्रा रविवार को अंतिम दल के भारत लौटने के साथ पूरी हो गई। इस साल उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे के रास्ते 477 यात्रियों ने कैलाश मानसरोवर के दर्शन किए।
चीन के तिब्बत क्षेत्र में स्थित कैलाश पर्वत और मानसरोवर के दर्शन के बाद अंतिम दल के यात्री तकलाकोट से लिपुलेख पहुंचे और फिर भारतीय सीमा में दाखिल हुए। अंतिम दल रविवार शाम धारचूला पहुंचा। यहां यात्रा अधिकारी धन सिंह बिष्ट की अगुवाई में यात्रियों का स्वागत किया गया और उन्हें बुरांश का जूस पिलाया गया।
यात्रा के दौरान यात्रियों ने आदि कैलाश और ओम पर्वत के भी दर्शन किए। इस बार की यात्रा में दो लोगों की मौत भी हुई, इनमें केएमवीएन का एक कुक और एक कैलाश मानसरोवर यात्री शामिल था। कोरोना के कारण 2020 में बंद हुई यह यात्रा छह साल बाद भारत और चीन के बीच सहमति बनने के बाद दोबारा शुरू हुई थी।
अंतिम दल के भारत लौटने के साथ ही इस साल की यात्रा पूरी हो गई। अब यात्रियों के कुछ अनुभव पढ़िए… जागेश्वर के दर्शन कर लौटेंगे दिल्ली यात्रियों के साथ केएमवीएन का 27 सदस्यीय सर्विस स्टाफ भी रहा। यात्रा के दौरान यात्रियों ने कैलाश मानसरोवर के साथ आदि कैलाश और ओम पर्वत के भी दर्शन किए।
अंतिम यानी 10वां दल रविवार को भारत लौट आया। चीन के तकलाकोट से लिपुलेख पहुंचने के बाद यात्री गुंजी होते हुए शाम को धारचूला पहुंचे। अब अंतिम दल के यात्री सोमवार सुबह चौकोड़ी के लिए रवाना होंगे। इसके बाद अल्मोड़ा के जागेश्वर धाम में दर्शन करके दिल्ली जाएंगे।
मानसरोवर में यात्रियों ने पूजा की, झील में नहाने पर रोक यात्रा के दौरान यात्रियों ने मानसरोवर झील के पास पूजा-अर्चना की। चीन सरकार ने मानसरोवर झील में सीधे नहाने पर रोक लगा रखी है। इसलिए यात्री बाल्टी से पानी निकालकर स्नान करते हैं और इसके बाद पूजा करते हैं।
अंतिम दल के साथ गए केएमवीएन के कर्मचारियों ने भी मानसरोवर में पूजा की। केएमवीएन के कुक सुंदर गिरी ने मानसरोवर झील के पास अपने पितरों के नाम से पूजा की। उन्होंने बताया कि भोलेनाथ की कृपा से उन्हें दूसरी बार कैलाश मानसरोवर जाने का मौका मिला।
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📡 स्रोत: Dainik Bhaskar