कैंपियरगंज में नवीन यादव की एंट्री से बदले सियासी समीकरण:सपा के पहले अधिकृत प्रत्याशी का स्वागत से बढ़ा हौसला, सपा जिलाध्यक्ष भी पूरे दौरे में रहे साथ
गोरखपुर-बस्ती मंडल की 41 विधानसभा सीटों में से कैंपियरगंज वह पहली सीट बन गई है, जहां समाजवादी पार्टी ने अपने अधिकृत प्रत्याशी के तौर पर नवीन यादव के नाम पर लगभग मुहर लगा दी है। नाम सामने आते ही सोशल मीडिया पर विरोध के स्वर उठे, लेकिन क्षेत्र के पहले दौरे में नवीन यादव को कार्यकर्ताओं और समर्थकों का भरपूर समर्थन मिला।
सोशल मीडिया पर विरोध का ही नतीजा था कि पहले मान-मनौव्वल शुरू हुई और तय समय से लगभग एक सप्ताह बाद अधिकृत प्रत्याशी नवीन यादव ग्राउंड पर उतरे। उनका यह दौरा क्षेत्र में पार्टी के भीतर विरोध की थाह लगाने के उद्देश्य से था लेकिन पूरी यात्रा में उन्हें कहीं असहज स्थिति नहीं दिखी। हर जगह सपा कार्यकर्ता स्वागत करते नजर आए।
विरोध की आशंका से सशंकित इस नेता को जब समर्थन मिला तो उनका हौसला बढ़ गया। सपा के पुराने नेता नवीन यादव को सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कैंपियरगंज से चुनाव लड़ने को कहा है। इस बात की भनक जैसे ही क्षेत्र के लोगों को हुई तो सोशल मीडिया पर उनका विरोध शुरू हो गया।
विरोध करने वाले उनकी तुलना में पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष चिंता यादव को बेहतर प्रत्याशी बता रहे थे। नवीन यादव को बाहरी बताया जाने लगा। चिंता यादव और उनके पति साधु यादव ने स्वयं न तो नवीन का विरोध किया है और न ही समर्थन। उनका कहना है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष से बात करने के बाद यह इस बारे में फैसला लेंगे।
उन्होंने निर्णय में बदलाव की उम्मीद जताई है। पहले जानिए कहां से शुरू हुई यात्रा नवीन यादव की इस विधानसभा क्षेत्र में पहली औपचारिक यात्रा जमुआर से शुरू हुई और जगतबेला, डोहरिया, मजनू, जंगल कौड़िया, पीपीगंज, कैंपियरगंज, जसवल बाजार चौराहा होते हुए डोमिनगढ़ में समाप्त हुई। लगभग पूरी विधानसभा का भ्रमण किया गया।
शुरूआत और समापन जहां हुआ है, उस क्षेत्र में यादव आबादी अच्छी-खासी है। ऐसे में नवीन यादव ने सपा के खांटी मतदाताओं में विश्वास जगान की कोशिश की है। पूरी यात्रा में साथ रहे जिलाध्यक्ष सपा के जिलाध्यक्ष ब्रजेश कुमार गौतम पूरी यात्रा में नवीन यादव के साथ रहे।
उनकी उपस्थिति नवीन यादव को प्रत्याशी बनाए जाने की चर्चा पर मुहर लगा रही थी। जिला संगठन के सबसे बड़े नेता साथ थे तो किसी और को भी कोई संशय नहीं था। जगह-जगह नवीन यादव का स्वागत किया गया। पहले यह संभावना जताई जा रही थी कि सोशल मीडिया पर शुरू हुआ विरोध धरातल पर भी नजर आ सकता है लेकिन ऐसा कुछ नजर नहीं आया।
अब जानिए कौन हैं नवीन यादव नवीन यादव सपा के खांटी समाजवादी नेता दीप नारायण के भतीजे हैं। नवीन यादव शिक्षा जगत से जुड़े हैं। उनका एक इंजीनियरिंग कॉलेज है। वह उद्यमी भी हैं। पार्टी से लंबे समय से जुड़े हैं। समय-समय पर पार्टी के विभिन्न आयोजनों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहे हैं।
इस बार सपा प्रमुख ने कैंपियरगंज से उनपर भरोसा जताया है। कैंपियरगंज में सपा को एक मजबूत प्रत्याशी पर विजय प्राप्त करनी है और इसके लिए लगातार प्रयोग किया जा रहा है। जानिए सपा से कब कौन प्रत्याशी बना 2007 विधानसभा चुनाव के बाद हुए परिसीमन में कैंपियरगंज सीट अस्तित्व में आयी।
इसमें पनियरा और मानीराम विधानसभा क्षेत्र के हिस्से शामिल हैं।
सात बार के विधायक फतेहबहादुर सिंह कैंपियरगंज से पहले पनियरा से चुनाव लड़ते थे। 2012 में पहली बार कैंपियरगंज सीट पर चुनाव हुआ और सपा ने पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष चिंता यादव को प्रत्याशी बनाया। 10 हजार से कम मार्जिन से उनकी हार हुई। 2017 में वह सपा व कांग्रेस गठबंधन में कांग्रेस के टिकट पर प्रत्याशी बनीं।
उस बार उनकी हार का अंतर दोगुने से अधिक हो गया। 2022 में सपा ने यहां से अभिनेत्री काजल निषाद को प्रत्याशी बनाया। काजल और बड़े अंतर से चुनाव हार गईं। चिंता यादव पर क्यों भरोसा नहीं कर रही सपा वरिष्ठ पत्रकार डीबीबी मिश्र बताते हैं कि चिंता यादव चर्चित नेता हैं।
पार्टी ने उन्हें लगातार दो बार वहां से प्रत्याशी भी बनाया लेकिन स्थानीय होने के बाद भी खास असर नहीं पड़ा। जब काजल निषाद को वहां से प्रत्याशी बनाया गया तो भी चिंता का परिवार उनके साथ था लेकिन फतेह बहादुर सिंह की जीत का मार्जिन और बढ़ गया।
यह माना जा रहा है कि चिंता यादव की ताकत और कमजोरी के बारे में प्रतिद्वंद्वी को अच्छे से पता है। ऐसे में एक ऐसे प्रत्याशी का चयन किया गया है जो कैंपियरगंज के लिए नया है लेकिन उनके परिवार का जुड़ाव पहले से रहा है। इसके साथ ही उनका आर्थिक पक्ष भीी मजबूत है, जिससे सपा यहां कड़ी टक्कर दे सकती है।
📡 स्रोत: NewsData.io