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कजरी तीज: बदला परदेस, नहीं बदली अपनों की याद, राजस्थान से हुब्बल्ली तक आज भी जिंदा है मायके और मिट्टी से जुड़ाव

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 31 अगस्त 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
कजरी तीज: बदला परदेस, नहीं बदली अपनों की याद, राजस्थान से हुब्बल्ली तक आज भी जिंदा है मायके और मिट्टी से जुड़ाव

कजरी तीज का नाम आते ही राजस्थान के गांव-ढाणियों की वे शामें याद आती हैं, जब महिलाएं झूले पर बैठकर कजरी के गीत गाती थीं। इन गीतों में अक्सर उस पति की याद और बिछोह का दर्द होता था, जो रोजी-रोटी के लिए परदेस चला गया था। समय बदला, शहर बदले और रोजगार के मायने बदले, लेकिन अपनों से दूर रहने का एहसास आज भी कहीं न कहीं वही है।

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