बच्चों को मोबाइल देने से पहले हो जाएं सावधान, गोरखपुर की घटना ने उड़ाए परिवार के होश
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कक्षा 4 के बच्चे के व्यवहार में अचानक बदलाव, मोबाइल में मिला पोर्न कंटेंट; स्कूल में शिक्षिका की गन्दी ड्राइंग बनाई और छोटी बहन के साथ मिला आपत्तिजनक अवस्था में
गोरखपुर। बच्चों को पढ़ाई या मनोरंजन के लिए मोबाइल देना आज आम बात हो गई है, लेकिन बिना निगरानी इंटरनेट और मोबाइल का इस्तेमाल बच्चों के व्यवहार पर कितना गंभीर असर डाल सकता है, गोरखपुर की एक घटना इसका चिंताजनक उदाहरण सामने आया है।
गोरखपुर में कक्षा 4 में पढ़ने वाले एक बच्चे के व्यवहार में करीब छह महीने पहले अचानक बदलाव आने लगा। बच्चा मोबाइल के लिए जिद करने लगा और मोबाइल लेने की कोशिश करने पर रोने या गुस्सा करने लगा। धीरे-धीरे वह मोबाइल को हमेशा अपने पास रखने लगा और यहां तक कि बाथरूम में भी मोबाइल ले जाने लगा।
परिवार के अनुसार, एक दिन बच्चे की मां ने उसे उसकी सात साल की बहन के साथ आपत्तिजनक अवस्था में देखा। इसके बाद परिवार ने बच्चे का मोबाइल चेक किया तो उसमें पोर्न कंटेंट मिला। यह देखकर परिवार के लोग हैरान रह गए।
परिवार का कहना है कि बच्चे को शुरुआत में ऑनलाइन पढ़ाई के लिए मोबाइल दिया गया था। पढ़ाई के बाद वह मोबाइल पर गेम भी खेलता था। शुरुआत में परिवार को उसके मोबाइल इस्तेमाल में कोई बड़ी परेशानी नजर नहीं आई, लेकिन धीरे-धीरे उसका व्यवहार बदलता गया।
मामला केवल घर तक सीमित नहीं रहा।
स्कूल में भी बच्चे के व्यवहार को लेकर चिंताजनक संकेत सामने आए। स्कूल प्रबंधन ने परिवार को बुलाकर बताया कि बच्चे के पास एक शिक्षिका से जुड़ी आपत्तिजनक तस्वीरें और अनुचित ड्रॉइंग मिली थीं। स्कूल में दूसरे बच्चों से भी उसके व्यवहार के बारे में जानकारी ली गई, जिसके बाद अनुचित बातचीत की शिकायतें सामने आने की बात कही गई।
इसके बाद स्कूल प्रबंधन ने परिवार को बच्चे की काउंसलिंग और इलाज कराने की सलाह दी। बाद में बच्चे का स्कूल से नाम भी काट दिया गया।
परिवार ने बच्चे को डांटने या सजा देने के बजाय उसके व्यवहार के पीछे की वजह समझने और उसका इलाज कराने पर ध्यान दिया। फिलहाल बच्चे का इलाज चल रहा है।
रिपोर्ट में बच्चे में बॉर्डरलाइन पर्सनालिटी डिसऑर्डर का उल्लेख किया गया है, हालांकि किसी बच्चे के व्यवहार के आधार पर खुद से मानसिक बीमारी का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है। ऐसे मामलों में सही कारण केवल मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चे के व्यवहार में अचानक बड़ा बदलाव, लगातार चिड़चिड़ापन, मोबाइल को लेकर जरूरत से ज्यादा जिद, मोबाइल छिपाकर इस्तेमाल करना, उम्र के हिसाब से अनुचित बातें करना या परिवार से दूरी बनाना ऐसे संकेत हैं जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
इस घटना ने अभिभावकों के सामने बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि बच्चों को मोबाइल देने के बाद उनकी ऑनलाइन गतिविधियों पर कितनी निगरानी रखी जा रही है। बच्चों को मोबाइल देना अपने आप में समस्या नहीं है, लेकिन उनकी उम्र के अनुसार स्क्रीन टाइम तय करना, पैरेंटल कंट्रोल का इस्तेमाल करना और वे इंटरनेट पर क्या देख रहे हैं, इस पर नजर रखना बेहद जरूरी है।
बच्चे के व्यवहार में असामान्य बदलाव दिखाई देने पर उसे केवल जिद या शरारत समझकर डांटने के बजाय उससे शांत तरीके से बात करना और जरूरत पड़ने पर बाल मनोचिकित्सक या काउंसलर की मदद लेना ज्यादा उचित है। समय रहते बच्चे के व्यवहार को समझना और सही मदद देना उसके भविष्य के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।