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कलेक्ट्रेट के दरवाज़े पर कचरे का साम्राज्य, ‘स्वच्छ सतना’ के दावों को दिखा आईना

लेखक: Aazam Lala अंतिम अपडेट: 10 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
कलेक्ट्रेट के दरवाज़े पर कचरे का साम्राज्य, ‘स्वच्छ सतना’ के दावों को दिखा आईना

जिस कलेक्ट्रेट से पूरे जिले की व्यवस्था चलती है, उसी के गेट पर पसरी गंदगी ने इंतज़ामिया की सफाई व्यवस्था पर उठाए सवाल

सतना। जिस कलेक्ट्रेट भवन में बैठकर पूरे जिले की सफाई, व्यवस्था और विकास को लेकर रोज़ाना फैसले लिए जाते हैं, उसी के प्रवेश द्वार पर पसरा कचरे का ढेर इंतज़ामिया के दावों की कलई खोलता नज़र आ रहा है। कलेक्ट्रेट के गेट नंबर-3 के पास जमा कचरा और आसपास फैली गंदगी से उठती दुर्गंध यहां आने वाले आमजन के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है।

विडंबना देखिए—एक तरफ ‘स्वच्छ सतना, स्वस्थ सतना’ का पैगाम दिया जा रहा है, स्वच्छता अभियान चलाए जा रहे हैं और लोगों को सफाई का सबक सिखाया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ जिले के सबसे अहम सरकारी दफ्तर के दरवाज़े पर ही गंदगी का यह मंजर दिखाई दे रहा है।

कलेक्ट्रेट में जिलेभर से फरियादी अपनी गुहार और अर्ज़ियां लेकर पहुंचते हैं। मगर गेट पर कदम रखते ही उन्हें साफ-सफाई के बजाय कचरे का ढेर और बदबू का सामना करना पड़ रहा है। सवाल यह है कि जब हुकूमत के दफ्तर की चौखट ही गंदगी से महरूम नहीं, तो शहर और जिले की गलियों में स्वच्छता के दावे किस हद तक कारगर हैं?

‘स्वच्छता’ का नारा बुलंद, कूड़े का ढेर उससे भी बुलंद!

कलेक्ट्रेट के गेट नंबर-3 पर जमा यह कचरा महज़ गंदगी नहीं, बल्कि जिम्मेदार महकमों की निगरानी और इंतज़ाम पर एक तल्ख़ सवाल है। आखिर इस रास्ते से रोज़ाना अफसर, कर्मचारी और आम लोग गुजरते हैं—फिर भी इस गंदगी पर किसी की निगाह क्यों नहीं पड़ रही?

अब देखना यह है कि जिम्मेदारों की आंख कब खुलेगी और कलेक्ट्रेट की चौखट को इस गंदगी से निजात कब मिलेगी?

💡 पृष्ठभूमि (Background)

कलेक्ट्रेट के दरवाज़े पर जमा कचरे का ढेर, जो जिले की सफाई और व्यवस्था के लिए जिम्मेदार है, साफ़-सफाई के दावों को परखा रहा है। यह विषय दर्शाता है कि सार्वजनिक संस्थानों की छवि और वास्तविकता में अंतर हो सकता है। खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिखाती है कि सरकारी योजनाएँ और प्रचार-प्रसार में क्या-क्या अंतर हैं, और नागरिकों को जागरूक करती है कि कचरा प्रबंधन में क्या कमी है। आम जनता पर इसका असर यह हो सकता है कि लोग अपने क्षेत्र की सफाई के प्रति अधिक सजग हों और स्थानीय अधिकारियों से बेहतर कार्यवाही की म

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Aazam Lala

आज़म लाला भोपाल के वरिष्ठ पत्रकार हैं, जो लंबे समय से जनसमस्याओं और सामाजिक मुद्दों को अपनी पत्रकारिता के माध्यम से सामने लाते हैं। वे जमीनी स्तर की खबरों और जनसरोकार से जुड़े विषयों को प्रमुखता से उठाते हैं।