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कल्पना मिश्रा मौत मामले में बड़ी कार्रवाई, डॉक्टर सोनल अग्रवाल की सेवा समाप्त, औषधि निरीक्षक निलंबित और ब्लड सेंटर पर FIR के निर्देश, भूख हड़ताल पर बैठे पिता को पुलिस ने 15वे दिन उठाया

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 16 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
कल्पना मिश्रा मौत मामले में बड़ी कार्रवाई, डॉक्टर सोनल अग्रवाल की सेवा समाप्त, औषधि निरीक्षक निलंबित और ब्लड सेंटर पर FIR के निर्देश, भूख हड़ताल पर बैठे पिता को पुलिस ने 15वे दिन उठाया

रीवा के संजय गांधी अस्पताल में कल्पना मिश्रा और उनके नवजात बच्चे की मौत के मामले में 16 सितंबर को बड़ी कार्रवाई सामने आई है। शासन स्तर पर अलग-अलग आदेश जारी करते हुए स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की डॉ. सोनल अग्रवाल की सेवाएं समाप्त कर दी गई हैं। वहीं, मामले से जुड़े औषधि निरीक्षक डॉ. राधेश्याम बट्टी को निलंबित किया गया है और संबंधित ब्लड सेंटर के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज कराने के निर्देश दिए गए हैं।

डॉ. सोनल अग्रवाल की सेवा समाप्ति का आदेश श्याम शाह चिकित्सा महाविद्यालय, रीवा की ओर से जारी किया गया है। आदेश में वर्ष 2023 में गठित चार सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति की जांच का उल्लेख है। समिति का गठन अस्पताल में मरीजों को कथित तौर पर नर्सिंग होम भेजने के लिए बाध्य किए जाने की शिकायतों की जांच के लिए किया गया था। जांच रिपोर्ट में डॉ. सोनल अग्रवाल के खिलाफ बड़ी विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा की गई थी।

इसके बाद उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया और उनका स्पष्टीकरण भी लिया गया। विभागीय प्रक्रिया पूरी होने के बाद 16 सितंबर 2026 को कार्यकारिणी समिति के निर्णय के आधार पर उनकी सेवाएं समाप्त कर दी गईं। आदेश के अनुसार अब वह भविष्य में किसी शासकीय या स्वशासी सेवा के लिए भी पात्र नहीं होंगी।

वहीं, कल्पना मिश्रा की मौत के मामले में खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग ने रीवा के औषधि निरीक्षक डॉ. राधेश्याम बट्टी को निलंबित कर दिया है। विभागीय आदेश में कर्तव्यों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही, गैर-जिम्मेदारी और अनुशासनहीनता का उल्लेख किया गया है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय शाहडोल स्थित खाद्य एवं औषधि प्रशासन के उप संचालक कार्यालय में निर्धारित किया गया है।

इसी घटनाक्रम में संबंधित ब्लड सेंटर में पाई गई कथित अनियमितताओं को लेकर आपराधिक प्रकरण दर्ज कराने के निर्देश भी जारी किए गए हैं। संबंधित औषधि निरीक्षक के माध्यम से FIR दर्ज कराने और की गई कार्रवाई की जानकारी प्रशासन को उपलब्ध कराने को कहा गया है।

गौरतलब है कि कल्पना मिश्रा और उनके नवजात बच्चे की मौत के बाद अस्पताल के डॉक्टरों और कर्मचारियों पर भी कार्रवाई की जा चुकी है। मेडिकल कॉलेज के डीन को रीवा से स्थानांतरित किया गया, अस्पताल अधीक्षक को पद से हटाया गया और कुछ डॉक्टरों तथा नर्सिंग स्टाफ को निलंबित किया गया था। मामले की मजिस्ट्रियल जांच भी चल रही है।

इधर, कल्पना के पिता रामशरण मिश्रा पिछले कई दिनों से जिम्मेदार लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कराने की मांग को लेकर आमरण अनशन पर बैठे थे। 16 सितंबर को पुलिस ने उन्हें और अन्य अनशनकारियों को धरना स्थल से हटा दिया। प्रशासन की ओर से इसके पीछे पिता की बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को वजह बताया गया है।

परिवार की मुख्य मांग है कि कल्पना और उसके नवजात बच्चे की मौत के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कर निष्पक्ष जांच की जाए। मामले में लगाए गए चिकित्सा लापरवाही के आरोपों का अंतिम निष्कर्ष जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

💡 पृष्ठभूमि (Background)

इस खबर में रीवा के संजय गांधी अस्पताल में कल्पना मिश्रा और उनके नवजात बच्चे की मृत्यु के मामले में सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है। डॉक्टर सोनल अग्रवाल की सेवा समाप्ति, औषधि निरीक्षक डॉ. राधेश्याम बट्टी का निलंबन और ब्लड सेंटर पर FIR के निर्देश इस मामले की गंभीरता को दर्शाते हैं। यह घटना अस्पतालों में चिकित्सा मानकों और निगरानी की कमी को उजागर करती है, जिससे सार्वजनिक विश्वास पर असर पड़ सकता है। जनता के लिए यह एक चेतावनी है कि चिकित्सा सुविधाओं में जवाबदेही और पारदर्शिता अनिवार्य है, अन्यथा रोगियों

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।