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कमर कस लो, बढ़ेंगे पेट्रोल डीजल के दाम, होर्मुज संकट से शिप का भाड़ा बढ़ा

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 21 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
कमर कस लो, बढ़ेंगे पेट्रोल डीजल के दाम, होर्मुज संकट से शिप का भाड़ा बढ़ा

दुनियाभर के समंदर में कच्चा तेल ढोने वाले बड़े जहाजों यानी ऑयल टैंकरों की भारी कमी हो गई है.

इसका सीधा असर भारत पर पड़ रहा है, क्योंकि देश तक तेल पहुंचाने का खर्च बहुत तेजी से बढ़ गया है. 19 सितंबर तक मिली रिपोर्ट के मुताबिक, अकेले अमेरिका से एशिया तक तेल लाने का भाड़ा करीब 26 डॉलर यानि लगभग 2,300 से 2,400 रुपये प्रति बैरल बढ़ चुका है.

इसका सीधा मतलब यह है कि सिर्फ एक बड़े जहाज का किराया ही करीब 52 मिलियन डॉलर, लगभग 430 करोड़ रुपये बढ़ गया है, जो उस जहाज में भरे कुल तेल की कीमत के करीब 25 फीसदी के बराबर है.

किन रास्तों पर कितना बढ़ा किराया?

यह परेशानी सिर्फ अमेरिका वाले लंबे रास्ते तक सीमित नहीं है, बल्कि जिन देशों से भारत आमतौर पर तेल खरीदता है वहां से भी जहाजों का किराया रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया है.

खाड़ी देशों से भारत तक तेल लाने का भाड़ा फरवरी 2026 में सिर्फ 10.6 डॉलर प्रति टन था. यही भाड़ा अगस्त में बढ़कर 34.6 डॉलर और सितंबर में 61.9 डॉलर प्रति टन हो गया.

वहीं रूस से भारत तेल लाने का खर्च भी अब तक के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच चुका है, जो अब 20 से 23 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बैठ रहा है.

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अचानक जहाजों की कमी क्यों हो गई?

युद्ध और समुद्री रास्तों पर बढ़ता खतरा जानकारों का कहना है कि यह संकट किसी एक वजह से नहीं बल्कि कई मुश्किलों के एक साथ आने से बना है.

फरवरी 2026 से अमेरिका और ईरान के बीच चल रही जंग के चलते होर्मुज के रास्ते जहाजों का निकलना बहुत खतरनाक हो चुका है.

दुनिया का 20 फीसदी और भारत की जरूरत का करीब 45 फीसदी तेल इसी संकरे समुद्री रास्ते से गुजरता है.

इसके अलावा यमन

📡 स्रोत: ABP Live Vyapar

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💡 पृष्ठभूमि (Background)

इस खबर का विषय है पेट्रोल और डीजल के दामों में बढ़ोतरी, जो कि होर्मुज संकट के कारण ऑयल टैंकरों की कमी से उत्पन्न हुई है। यह विषय इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि तेल की आपूर्ति में बाधा आने से ऊर्जा लागत पर सीधे असर पड़ता है, जिससे न सिर्फ व्यक्तिगत उपभोक्ताओं के लिए बल्कि उद्योगों और परिवहन क्षेत्र के लिए भी खर्च बढ़ता है। आम जनता पर इसका असर रोज़मर्रा के जीवन में स्पष्ट होगा: पेट्रोल पंपों पर बढ़ते दाम, सार्वजनिक परिवहन के किराए में वृद्धि और वस्तुओं की कीमतों में सामान्य रूप से बढ़ोतरी।

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