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कानौता-बांदीकुई रेलखंड पर 67 किलोमीटर में कवच प्रणाली कमीशन

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 31 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
कानौता-बांदीकुई रेलखंड पर 67 किलोमीटर में कवच प्रणाली कमीशन

उत्तर पश्चिम रेलवे के जयपुर मंडल में रेल संरक्षा को मजबूत करने की दिशा में बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। कानौता-बांदीकुई के 67 किलोमीटर लंबे रेलखंड पर स्टैंडर्ड कवच प्रणाली का सफलतापूर्वक कमीशनिंग किया गया है। यह उत्तर पश्चिम रेलवे का पहला रेलखंड है, जहां इस आधुनिक ट्रेन सुरक्षा प्रणाली को शुरू किया गया है। सात ब्लॉक सेक्शनों में लागू कवच प्रणाली संभावित ट्रेन टक्करों, ओवरस्पीडिंग और अन्य आपात स्थितियों में सुरक्षा प्रदान करने में मदद करेगी।

जयपुर, 31 अक्टूबर। रेल यात्रियों की सुरक्षा को लेकर भारतीय रेलवे लगातार आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर रहा है। इसी कड़ी में उत्तर पश्चिम रेलवे ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। जयपुर मंडल के कानौता-बांदीकुई रेलखंड पर 67 किलोमीटर के दायरे में अत्याधुनिक स्टैंडर्ड कवच प्रणाली का सफलतापूर्वक कमीशनिंग किया गया है।

यह उत्तर पश्चिम रेलवे का पहला रेलखंड है, जहां कवच प्रणाली को शुरू किया गया है। इस तकनीक से संभावित रेल दुर्घटनाओं को रोकने और ट्रेन संचालन को अधिक सुरक्षित बनाने में मदद मिलेगी। उत्तर पश्चिम रेलवे के महाप्रबंधक पंकज शर्मा के नेतृत्व और मार्गदर्शन में यह उपलब्धि हासिल की गई है। कानौता से बांदीकुई तक 67 किलोमीटर लंबे रेलखंड में कुल सात ब्लॉक सेक्शनों पर कवच प्रणाली स्थापित की गई है।

इनमें कानौता-बस्सी, बस्सी-झर, झर-जटवाड़ा, जटवाड़ा-दौसा, दौसा-भांकरी, भांकरी-अरनिया और अरनिया-बांदीकुई रेलखंड शामिल हैं। फील्ड इंस्टॉलेशन के सत्यापन के बाद सिस्टम के फील्ड ट्रायल और परीक्षण भी सफलतापूर्वक पूरे किए गए। कवच प्रणाली की खासियत यह है कि यह संभावित आमने-सामने या पीछे से होने वाली ट्रेन टक्कर के जोखिम को रोकने में मदद करती है।

निर्धारित परिस्थितियों में ट्रेन की गति तय सीमा से अधिक होने पर यह सिस्टम स्वचालित ब्रेकिंग की सुविधा भी देता है। इसके अलावा ब्लॉक सेक्शन में ट्रेन के अनचाहे रूप से रुकने, रोलबैक और रोल फॉरवर्ड जैसी स्थितियों में भी सुरक्षा के विशेष प्रावधान किए गए हैं। आपात स्थिति में लोको पायलट मैनुअल SOS अलर्ट भी भेज सकता है।

कमीशनिंग से पहले अलग-अलग परिस्थितियों में प्रणाली की कार्यक्षमता और संरक्षा मानकों का परीक्षण किया गया। झर-जटवाड़ा रेलखंड पर 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से स्पीड टेस्टिंग की गई, जबकि कानौता-बस्सी रेलखंड पर निर्धारित पूर्ण सेक्शनल गति के अनुसार परीक्षण किया गया। सभी संबंधित मापदंडों की जांच के बाद प्रणाली का सफल कमीशनिंग किया गया।

रेलवे की यह पहल आधुनिक तकनीक के जरिए सुरक्षित और विश्वसनीय रेल परिचालन को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम मानी जा रही है।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।