कांग्रेस का दावा- अरुणाचल में 40-50km अंदर घुसे चीनी सैनिक:सेना ने कहा- घुसपैठ के दावे वाला वीडियो फर्जी, 2023 के प्रेस कॉन्फ्रेंस से छेड़छाड़
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अरुणाचल प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष बोसिराम सिरम ने दावा किया है कि अपर सुबनसिरी जिले में चीनी सैनिक भारतीय सीमा के 40-50 किलोमीटर अंदर तक घुस आए हैं। उन्होंने कहा कि सीमा पर कई जगह भारतीय और चीनी सैनिक आमने-सामने हैं, जिससे सैनिकों की गश्त और स्थानीय लोगों की आवाजाही प्रभावित हो रही है।
स्थानीय लोगों से मिली जानकारी का हवाला देते हुए सिरम ने जुलाई के आखिरी सप्ताह में सैनिकों के बीच हाथापाई और लाठी चलने की घटनाएं होने का दावा किया। दूसरी ओर, भारतीय सेना ने अरुणाचल प्रदेश में चीनी कब्जे के दावे को लेकर वायरल एक वीडियो को फर्जी बताया है। सेना ने कहा कि वीडियो अक्टूबर 2023 में जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा में हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस से छेड़छाड़ करके बनाया गया है।
सीमावर्ती इलाकों का दौरा करने के बाद कांग्रेस ने लगाए आरोप बोसिराम सिरम के नेतृत्व में कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल ने 26 से 29 अगस्त तक अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती इलाकों का दौरा किया था। इसमें कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष और पूर्व गृह मंत्री तांगा बयालिंग और अपर सुबनसिरी के सांसद जारोडुम क्री भी शामिल थे।
प्रतिनिधिमंडल ईटानगर से नाचो होते हुए लाइमकिंग और तक्षिंग तक पहुंचा। यहां सदस्यों ने स्थानीय लोगों से बातचीत की। सिरम ने दौरे के बाद कहा कि सीमा पर चीनी सैनिकों की गतिविधियों की जांच होनी चाहिए। सिरम के मुताबिक, स्थानीय लोग अब उन इलाकों में पहले की तरह नहीं जा पा रहे हैं, जहां वे याक चराने, जंगलों से जरूरी चीजें जुटाने और शिकार के लिए जाते थे।
कांग्रेस ने केंद्र से निष्पक्ष जांच की मांग की सिरम ने घुसपैठ के दावों को खारिज करने वाले राज्य के मुख्यमंत्री, गृह मंत्री और केंद्रीय रक्षा मंत्री के बयानों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों की शिकायतों को अफवाह बताकर खारिज करने के बजाय उनकी जांच होनी चाहिए। सिरम के मुताबिक, कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन से मुलाकात का समय मांगा था, ताकि उन्हें सीमा की स्थिति के बारे में बताया जा सके, लेकिन अनुमति नहीं मिली।
उन्होंने केंद्र सरकार और रक्षा मंत्रालय से सीमा की वास्तविक स्थिति की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। सिरम ने कहा कि सीमावर्ती इलाकों में मोबाइल और इंटरनेट की कमी से तैनात सैनिकों को अपने परिवारों से संपर्क करने में परेशानी होती है। उन्हों
📡 स्रोत: Dainik Bhaskar