कांग्रेस के झटके के बाद स्टालिन का नया प्लान? पवार-उद्धव के बाद ममता तक पहुंची बात
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →
द्रविड़ मुनेत्र कषगम (डीएमके) की नेता कनिमोझी करुणानिधी ने पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात की. ममता और कनिमोझी के बीच कोलकाता में कई मुद्दों पर चर्चा हुई.
कनिमोझी ममजा के कालीघाट वाले आवास पर पहुंची थीं.
ममता और कनिमोझी के बीच हुई मुलाकात पर तृणमूल कांग्रेस के एक नेता ने प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि कई मुद्दों पर बात हुई है. कयास लगाया जा रहा है कि कहीं वे तीसरे मोर्चे की प्लानिंग तो नहीं कर रहे.
पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक एक टीएमसी नेता ने कहा, 'कनिमोझी ने ममता के आवास पर बंद कमरे में उनके साथ बैठक की.
दोनों नेताओं के बीच कई मुद्दों पर चर्चा हुई.' हालांकि, उन्होंने इन मुद्दों का ब्योरा नहीं दिया.
यह मुलाकात कनिमोझी की मुंबई में शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे और दिल्ली में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के प्रमुख शरद पवार के साथ हुई चर्चाओं के कुछ दिनों बाद हुई है.
क्या तीसरे मोर्चे की चल रही तैयारी
ममता और कनिमोझी की मुलाकात ने तीसरे मोर्चे की अटकलों को तेज कर दिया है.
यह मुलाकात ऐसे समय में हुई जब डीएमके और कांग्रेस के बीच दूरी बढ़ चुकी है और अब इंडिया गठबंधन के बीच हलचल तेज है. अहम बात यह भी है कि कनिमोझी ने इससे पहले भी कई नेताओं से मुलाकात की थी.
हालांकि तीसरे मोर्चे को लेकर किसी तरह की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.
कांग्रेस ने चुनाव के बाद छोड़ा था डीएमके का साथ
डीएमके और कांग्रेस के बीच तनाव और विपक्षी गठबंधन इंडिया के कई क्षेत्रीय घटकों के बीच मतभेदों के बीच कनिमोझी की इन नेताओं से हुई मुलाकातों ने ध्यान खींचा है.
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के बाद डीएमके और कांग्रेस के बीच संबंधों में तनाव आ गया.
कांग्रेस अब ए
📡 स्रोत: ABP Live
💡 पृष्ठभूमि (Background)
कांग्रेस के झटके के बाद, द्रविड़ मुनेत्र कषगम की नेता कनिमोझी करुणानिधी ने पूर्व बंगाल मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से मुलाकात की। यह विषय है कि कैसे दो प्रमुख राजनेता कोलकाता में मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह राजनीतिक गठबंधनों और शक्ति संतुलन में बदलाव का संकेत देती है, खासकर तृणमूल कांग्रेस के भीतर। आम जनता पर इसका असर हो सकता है कि राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर नीतिगत निर्णयों में बदलाव आए, जिससे विकास योजनाओं, रोजगार और सामाजिक कल्याण पर असर पड़ सकता है।