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कांकेर पीएम विश्वकर्मा योजना,यह अप्रूवल स्टोरी है

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 18 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
कांकेर पीएम विश्वकर्मा योजना,यह अप्रूवल स्टोरी है

(नोट यह स्टोरी रायपुर डेस्क द्वारा दी गई मासिक एप्रूव्ड स्टोरी है)

पीएम विश्वकर्मा योजना बनी वरदान: कांकेर के बाँसला गाँव में इलेक्ट्रिक चाक से बदली कुम्हारों की तकदीर

​कांकेर (छत्तीसगढ़)। उत्तर बस्तर कांकेर जिले के दूरस्थ क्षेत्र में स्थित ग्राम बाँसला के कुम्हारों के लिए 'पीएम विश्वकर्मा योजना' नई उम्मीद और समृद्धि की किरण बनकर आई है। वर्षों से पारंपरिक तरीकों से मिट्टी के बर्तन बनाने वाले यहाँ के प्रजापति परिवार अब आधुनिकता की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। योजना के तहत मिले आधुनिक इलेक्ट्रिक चाक (Electronic Potter’s Wheel) ने न केवल उनके श्रम और समय की बचत की है, बल्कि उनकी आय में भी जबरदस्त इजाफा किया है।

​1 माह के प्रशिक्षण ने बदली सोच और तकदीर

​बाँसला गाँव के कारीगर पहले पुराने लकड़ी के चाक को हाथों से घुमाकर बर्तन बनाते थे। इस पारंपरिक तरीके से चाक को घुमाने में अत्यधिक शारीरिक मेहनत लगती थी, समय ज्यादा खपत होता था और उत्पादन भी काफी सीमित रह जाता था।

​बदलाव की शुरुआत तब हुई जब एक साल पहले गाँव के कुम्हारों ने कांकेर जिला मुख्यालय जाकर 1 माह का विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया। इस प्रशिक्षण के दौरान उन्हें आधुनिक तकनीकों, मिट्टी की सही ढलाई और इलेक्ट्रिक चाक का कुशलतापूर्वक उपयोग करने के गुर सिखाए गए।

​कम समय में अधिक उत्पादन, आय में भारी बढ़ोतरी

​प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद योजना के अंतर्गत कारीगरों को आधुनिक इलेक्ट्रिक चाक प्रदान किए गए। अब स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है:

​समय और मेहनत की बचत: हाथों से चाक घुमाने की झंझट खत्म होने से कुम्हारों का काम बेहद आसान और तीव्र हो गया है।

​बर्तनों में बेहतर फिनिशिंग: इलेक्ट्रिक चाक की समान गति के कारण मिट्टी के बर्तनों, मटकियों और दीयों की गुणवत्ता तथा सुंदरता में काफी सुधार आया है।

​बढ़ा उत्पादन और मुनाफा: कम समय में अधिक संख्या में बर्तन और दीये तैयार हो रहे हैं, जिससे स्थानीय बाजारों में इनकी बिक्री बढ़ी है और कुम्हारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है।

​ग्रामीणों ने प्रधानमंत्री का जताया आभार

​आधुनिक चाक मिलने से बाँसला के कुम्हारों के जीवन में आत्मनिर्भरता और खुशहाली आई है। अपनी आजीविका में आए इस अभूतपूर्व सुधार से उत्साहित होकर स्थानीय कारीगरों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार का सहृदय धन्यवाद ज्ञापित किया है। ग्रामीणों का कहना है कि इस योजना ने उनकी पारंपरिक कला को न केवल नया जीवन दिया है, बल्कि उनके परिवारों को आर्थिक रूप से सशक्त भी बनाया है।

​"पहले दिन भर मेहनत करने के बाद भी गिने-चुने बर्तन ही बन पाते थे। अब इलेक्ट्रिक चाक की मदद से कम समय में ढेरों दीये और बर्तन बन जाते हैं। हमारी कमाई बढ़ी है और मेहनत भी आधी हो गई है।"

बाइट सचिन चक्रधारी ,कुम्हार बाइट मीना चक्रधारी, कुम्हार

बाइट गीतेश्वरी चक्रधारी कुम्हार बाइट बाज़ारू चक्रधारी कुम्हार

बाइट ईश्वर लाल चक्रधारी कुम्हार बाइट हारून चक्रधारी, कुम्हार

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।