व्यापार

कप्तानगंज डिस्टलरी के 40 कर्मचारियों को नहीं मिला बकाया:वेतन, ग्रेच्युटी, LIC फंड का इंतजार; कुशीनगर डीएम बोले समाधान का होगा प्रयास

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 12 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
कप्तानगंज डिस्टलरी के 40 कर्मचारियों को नहीं मिला बकाया:वेतन, ग्रेच्युटी, LIC फंड का इंतजार; कुशीनगर डीएम बोले समाधान का होगा प्रयास

कुशीनगर के कप्तानगंज में करीब 18 साल पहले बंद हुई सोमैया ऑर्गेनिक लिमिटेड, बाद में जेआर ऑर्गेनिक लिमिटेड डिस्टलरी के कर्मचारियों का बकाया भुगतान अब तक नहीं हो सका है। डिस्टलरी में काम कर चुके करीब 40 कर्मचारियों और उनके परिवारों को वेतन, ग्रेच्युटी, वेतन से काटी गई एलआईसी की रकम समेत अन्य देयकों का इंतजार है।

कई कर्मचारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जबकि कुछ की मौत भी हो चुकी है। ऐसे में उनके परिजन बकाया भुगतान की उम्मीद लगाए बैठे हैं। कप्तानगंज की यह डिस्टलरी कभी क्षेत्र की प्रमुख औद्योगिक इकाइयों में शामिल थी। करीब वर्ष 2002 में सोमैया ऑर्गेनिक लिमिटेड ने इसका संचालन शुरू किया था। उस समय यहां करीब 110 कर्मचारी काम करते थे।

कंपनी की आर्थिक स्थिति खराब होने के बाद जुलाई 2008 में डिस्टलरी पूरी तरह बंद हो गई। डिस्टलरी बंद होने के बाद कर्मचारियों को उनका पूरा भुगतान नहीं मिल सका। करीब 40 कर्मचारियों का वेतन, ग्रेच्युटी, एलआईसी समेत अन्य देयक आज भी लंबित बताए जा रहे हैं। वर्षों बीतने के बाद भी भुगतान नहीं होने से कर्मचारियों और उनके परिवारों की आर्थिक परेशानी बढ़ती गई।

लिखित भरोसा मिला, फिर कोर्ट के स्टे से रुक गई भुगतान की प्रक्रिया कर्मचारी राधाकृष्ण यादव ने बताया कि बकाया भुगतान का मामला उप श्रमायुक्त, गोरखपुर के सामने उठाया गया था। जिला प्रशासन के निर्देश पर कर्मचारियों और प्रबंधन के बीच भुगतान को लेकर बातचीत भी हुई। प्रबंधन की ओर से भुगतान का लिखित भरोसा दिया गया, लेकिन बाद में कोर्ट से स्थगन आदेश ले लिया गया।

इसके बाद भुगतान की प्रक्रिया दोबारा रुक गई। कर्मचारी गणेश गिरि ने बताया कि ज्यादातर कर्मचारियों का पूरा बकाया अभी बाकी है। इसमें वेतन, ग्रेच्युटी और वेतन से काटी गई एलआईसी की रकम शामिल है। उनका कहना है कि करीब दो दशक से भुगतान का इंतजार कर रहे कर्मचारियों के परिवार अब आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।

कई कर्मचारियों की मौत, परिजनों को अब भी भुगतान का इंतजार सबसे ज्यादा परेशानी उन कर्मचारियों के परिवारों को है, जिनकी मृत्यु हो चुकी है। परिजनों का कहना है कि परिवार के सदस्य ने वर्षों तक कंपनी में सेवा दी, लेकिन उन्हें उसका पूरा बकाया नहीं मिल सका। लंबे समय से मामला लंबित होने के कारण अब परिजन प्रशासन से हस्तक्षेप की उम्मीद कर रहे हैं।

कभी रोजगार का केंद्र था परिसर, अब झाड़ियों में तब्दील डिस्टलरी बंद होने के बाद उसका परिसर भी बदहाल हो चुका है। मशीनरी और भवन जर्जर हालत में हैं। कई जगह झाड़ियां और बड़े पेड़ उग आए हैं। कभी रोजगार और कारोबार का बड़ा केंद्र रहा यह परिसर अब वीरान नजर आता है। स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि डिस्टलरी बंद होने का असर केवल कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहा।

इससे आसपास की आर्थिक गतिविधियां भी प्रभावित हुईं। प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार देने वाली औद्योगिक इकाई के बंद होने से स्थानीय बाजार और कारोबार पर भी असर पड़ा। कर्मचारियों की मांग- प्रशासन हस्तक्षेप कर दिलाए बकाया कर्मचारियों ने जिला प्रशासन और शासन से मामले में हस्तक्षेप करने की मांग की है।

उनका कहना है कि वेतन, ग्रेच्युटी, एलआईसी फंड और अन्य सभी देयकों का भुगतान सुनिश्चित कराया जाए। कर्मचारियों का कहना है कि करीब दो दशक का इंतजार काफी लंबा हो चुका है। अब लंबित कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया को जल्द पूरा कर उन्हें उनका हक दिलाया जाए। दैनिक भास्कर ने कर्मचारियों की समस्या से डीएम महेंद्र सिंह तंवर को अवगत कराया।

डीएम ने कहा कि विवाद का मामला उनके संज्ञान में है। कर्मचारियों के प्रतिनिधि लिखित में अपनी समस्या दें, उसका समाधान निकालने का पूरा प्रयास किया जाएगा।

📡 स्रोत: NewsData.io

📰 पूरी खबर पढ़ें (NewsData.io पर जाएं)
J
JKS News Desk

वॉयस ऑफ क्रांति की संपादकीय टीम आपके लिए भोपाल, मध्यप्रदेश और देश की सटीक और विश्वसनीय समाचार प्रस्तुत करती है।