करैरा में ढोल-नगाड़ों और जयकारों के बीच निकली कलश यात्रा, श्री गणेश सरकार सेवा समिति के द्वारा किया गया बप्पा को विराजित
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करैरा: गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर सोमवार को कृष्णा गंज करैरा स्थित बड़ा जैन मंदिर में गणपति बप्पा की मूर्ति स्थापना को लेकर कलश यात्रा का आयोजन किया गया धरणी फाउंडेशन एवं श्री गणेश सरकार सेवा समिति द्वारा आयोजित इस कलश यात्रा में बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष और बच्चे शामिल हुए श्रद्धालु के उत्साह और भक्तिमय वातावरण में यात्रा का नजारा देखने लायक रहा
महिलाएं सिर पर कलश लेकर यात्रा में शामिल हुईं वहीं पुरुषों और बच्चों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया धार्मिक वातावरण के बीच गणपति बप्पा के जयकारे लगाए गए यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं में भगवान गणेश के प्रति आस्था और भक्ति दिखाई दी
समिति द्वारा गणपति बप्पा की मूर्ति स्थापना के साथ कई धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जा रहा है कार्यक्रम की शुरुआत 14 सितंबर को भव्य आगमन एवं कलश यात्रा के साथ हुई इसके बाद सुबह 11:45 बजे गणपति बप्पा की मूर्ति स्थापना की गई
कार्यक्रम के अनुसार 16 सितंबर को मटकी फोड़ कार्यक्रम रखा गया है 17 सितंबर को भजन संध्या का आयोजन होगा 18 सितंबर को झांकी एवं पेंटिंग कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा 19 सितंबर को राधा अष्टमी के अवसर पर बरसाने की होली का आयोजन शाम 8 बजे से होगा। 20 सितंबर को शाम 8 बजे सांस्कृतिक नृत्य कार्यक्रम रखा गया है 21 सितंबर को बाबा बर्फानी दरबार लगाया जाएगा 22 सितंबर को सुंदरकांड का आयोजन शाम 8 बजे से किया जाएगा। 23 सितंबर को 56 भोग एवं महाआरती का कार्यक्रम होगा
24 सितंबर को हवन एवं भंडारे का आयोजन किया जाएगा इसके बाद 25 सितंबर को दोपहर 2 बजे गणपति बप्पा की विसर्जन यात्रा निकाली जाएगी
समिति की ओर से सभी श्रद्धालुओं से कार्यक्रमों में शामिल होने की अपील की गई है गणेश उत्सव को लेकर क्षेत्र में श्रद्धा और उत्साह का माहौल बना हुआ है.!!
💡 पृष्ठभूमि (Background)
करैरा के कृष्णा गंज जैन मंदिर में गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर बप्पा की मूर्ति स्थापना हेतु कलश यात्रा का आयोजन हुआ। यह कार्यक्रम धरणी फाउंडेशन और श्री गणेश सरकार सेवा समिति द्वारा किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं, पुरुष और बच्चे भाग लेकर श्रद्धा प्रकट की। यह विषय धार्मिक परंपरा और सामुदायिक सहभागिता का प्रतीक है। खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह स्थानीय सांस्कृतिक पहचान और धार्मिक एकजुटता को दर्शाती है, साथ ही क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा देती है। आम जनता पर इसका असर सामाजिक एकता को