विदेश

करवा चौथ 2026: क्या पति भी रख सकते हैं पत्नी के लिए व्रत? जानिए सही विधान

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 28 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
करवा चौथ 2026: क्या पति भी रख सकते हैं पत्नी के लिए व्रत? जानिए सही विधान

करवा चौथ का पावन पर्व हर साल सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास होता है, जिसमें वे अपने पति की लंबी उम्र, अच्छी सेहत और अखंड सौभाग्य के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। लेकिन बदलते वक्त के साथ आधुनिकता और आपसी प्रेम की एक नई मिसाल देखने को मिल रही है, जहां अब कई पति भी अपनी पत्नी के प्रति समर्पण दिखाने के लिए यह व्रत रखने लगे हैं।

अगर आपके मन में भी यह सवाल है कि क्या पुरुष या पति अपनी पत्नी के लिए करवा चौथ का उपवास रख सकते हैं, तो शास्त्रों और आधुनिक परंपराओं के लिहाज से इसका जवाब बेहद सकारात्मक है। आज के समय में आपसी समझ और समानता के इस दौर में पति-पत्नी दोनों मिलकर इस रिश्ते को और मजबूत बना रहे हैं, बशर्ते इसे पूरे विधि-विधान और सही नियमों के साथ निभाया जाए।

करवा चौथ पर पति द्वारा व्रत रखने की परंपरा और धार्मिक मान्यता धार्मिक और पौराणिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो करवा चौथ का मुख्य व्रत मुख्य रूप से पत्नियों द्वारा पतियों की दीर्घायु के लिए ही समर्पित किया गया है, जिसका वर्णन कई कथाओं में मिलता है। हालांकि, प्राचीन ग्रंथों में पुरुषों द्वारा इस व्रत को रखने का कोई कड़ा और सीधा नियम नहीं लिखा गया है, लेकिन आधुनिक समाज और सनातन संस्कृति में इसे भावनाओं और आपसी प्रेम से जोड़कर देखा जाता है।

जब कोई पति अपनी पत्नी के स्वास्थ्य, लंबी उम्र और खुशहाली के लिए उपवास रखता है, तो यह उनके बीच के अटूट रिश्ते और एक-दूसरे के प्रति सम्मान को दर्शाता है। कई ज्योतिषाचार्यों और विद्वानों का मानना है कि यदि पति अपनी इच्छा और पूरी श्रद्धा से यह व्रत करना चाहें, तो वे इसे रख सकते हैं, क्योंकि हर पूजा और व्रत का आधार मन की सच्ची भावना और एक-दूसरे के प्रति समर्पण ही होता है।

यदि पति रख रहे हैं व्रत, तो किन नियमों का करना चाहिए पालन यदि किसी दंपत्ति में पति भी अपनी पत्नी के साथ करवा चौथ का व्रत रखने का फैसला करते हैं, तो उन्हें कुछ विशेष बातों और नियमों का खास ध्यान रखना चाहिए ताकि व्रत की पवित्रता बनी रहे। सबसे पहले पति को भी सुबह सूर्योदय से पहले सरगी या अपनी पसंद का हल्का आहार लेकर इस निर्जला व्रत की शुरुआत करनी चाहिए, हालांकि वे अपनी सेहत और शारीरिक क्षमता के अनुसार पानी या फलाहार का विकल्प भी चुन सकते हैं।

पूरे दिन बिना कुछ खाए-पिए रहने के बाद, रात को चांद निकलने का इंतजार किया जाता है और अपनी पत्नी के साथ मिलकर ही चांद को अर्घ्य दिया जाता है। चांद के दीदार के बाद और पत्नी का चेहरा देखने के बाद ही पति अपना व्रत खोल सकते हैं, जिससे यह पर्व दोनों के लिए और अधिक यादगार और भावनात्मक रूप से जुड़ जाता है।

आधुनिक जीवनशैली में बदलती सोच और आपसी रिश्ते की मजबूती आज की भागदौड़ भरी जिंदगी और आधुनिक जीवनशैली में रिश्तों की परिभाषा तेजी से बदल रही है, जहां पति-पत्नी दोनों मिलकर घर और बाहर की जिम्मेदारियां संभालते हैं। ऐसे में जब पति करवा चौथ जैसे पारंपरिक त्योहार में अपनी पत्नी का साथ देते हैं और खुद भी व्रत रखते हैं, तो इससे आपसी तालमेल और प्यार में और अधिक गहराई आती है।

यह सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि एक-दूसरे के सुख-दुख में साझीदार बनने का खूबसूरत संदेश देता है, जिसे युवा पीढ़ी बहुत तेजी से अपना रही है। इस तरह के प्रयास समाज में एक सकारात्मक संदेश देते हैं कि पर्व केवल औपचारिकता नहीं बल्कि दो दिलों के बीच के जुड़ाव और समर्पण का उत्सव हैं, जिन्हें अपनी सुविधा और आपसी सहमति से और भी ज्यादा सुंदर बनाया जा सकता है।

📡 स्रोत: NewsData.io

📰 पूरी खबर पढ़ें (NewsData.io पर जाएं)
J
JKS News Desk

वॉयस ऑफ क्रांति की संपादकीय टीम आपके लिए भोपाल, मध्यप्रदेश और देश की सटीक और विश्वसनीय समाचार प्रस्तुत करती है।