करियर से लंबी चली कानूनी जंग... 22 साल बाद कोर्ट से बरी हुआ पूर्व दिग्गज, धोखाधड़ी, फर्जीवाड़े का लगा था आरोप

Jacob Martin Released: पूर्व भारतीय बल्लेबाज जैकब मार्टिन के लिए राहत की खबर सामने आई है. क्रिकेट से संन्यास के बाद करीब 22 साल तक चले आपराधिक मामले में दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया है.
यह मामला 2004 में दर्ज FIR से जुड़ा था, जिसमें जालसाजी, धोखाधड़ी, साजिश और पासपोर्ट से जुड़े अपराधों के आरोप लगाए गए थे. अदालत ने कहा कि जैकब मार्टिन के खिलाफ लगाए गए आरोपों का ठोस सबूत नहीं मिला.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, मामले में फर्जी इमिग्रेशन दस्तावेजों, पैसों के लेन-देन और एक स्पोर्ट्स क्लब से कथित संबंधों को लेकर मार्टिन पर सवाल उठाए गए थे. हालांकि, गवाह महत्वपूर्ण आरोपों की पुष्टि नहीं कर सके. अदालत को भी ऐसा कोई सबूत नहीं मिला, जो जैकब मार्टिन को इन कथित अपराधों से सीधे जोड़ सके.
इसके बाद अदालत ने उन्हें सभी आरोपों से राहत दे दी और 22 साल से चली आ रही कानूनी लड़ाई भी खत्म हो गई. कौन हैं जैकब मार्टिन?कानूनी विवाद से काफी पहले जैकब मार्टिन भारतीय घरेलू क्रिकेट के भरोसेमंद बल्लेबाजों में गिने जाते थे.
बड़ौदा में जन्मे मार्टिन ने 1998-99 रणजी ट्रॉफी सीजन में 1000 से ज्यादा रन बनाए थे. उस समय वह एक सीजन में यह उपलब्धि हासिल करने वाले केवल छठे बल्लेबाज बने थे. शानदार प्रदर्शन के बाद उन्हें भारतीय टीम में जगह मिली.
उन्होंने 1999 में वेस्टइंडीज के खिलाफ अपना वनडे डेब्यू किया और 1999 से 2001 के बीच भारत के लिए 10 वनडे मैच खेले. क्रिकेट के बाद शुरू हुई लंबी लड़ाईजैकब मार्टिन का घरेलू रिकॉर्ड बेहद शानदार रहा. उन्होंने फर्स्ट क्लास क्रिकेट में 9,000 से ज्यादा रन बनाए, जिसमें 23 शतक शामिल थे और उनका औसत 46 से अधिक रहा.
उन्होंने 2000-01 में बड़ौदा को रणजी ट्रॉफी खिताब भी दिलाया और बाद में टीम के कोच की जिम्मेदारी संभाली. 2004 का मामला उस समय शुरू हुआ, जब इंग्लैंड दौरे से लौटे एक क्रिकेट टीम सदस्य पर वीजा अवधि से ज्यादा रुकने और फर्जी इमिग्रेशन स्टांप के इस्तेमाल का आरोप लगा.
📡 स्रोत: NewsData.io