कर्ज के दलदल में दुनिया! जानें भारत से लेकर फ्रांस तक किस पर कितना बोझ
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दुनिया के कई देश इस समय बढ़ते सरकारी कर्ज और उस पर लगने वाले ब्याज के बोझ से जूझ रहे हैं.
अमेरिका, चीन और जापान जैसे बड़े देशों पर खरबों डॉलर का कर्ज है, वहीं फ्रांस में भी उधारी महंगी होने से आर्थिक दबाव बढ़ रहा है.
जब सरकारों को कर्ज चुकाने के लिए ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ता है, तो इसका असर आम लोगों से जुड़ी योजनाओं और जरूरी सेवाओं पर भी पड़ सकता है.
दरअसल, सरकारें सड़क, रेलवे, अस्पताल, शिक्षा और रक्षा जैसे कामों के लिए कई बार उधार लेती हैं.
इसके लिए सरकारी बॉन्ड जारी किए जाते हैं, जिन्हें बैंक, बीमा कंपनियां और दूसरे निवेशक खरीदते हैं.
लेकिन जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो सरकारों के लिए कर्ज चुकाना और नया कर्ज लेना महंगा हो जाता है.
सरकारें आखिर कर्ज क्यों लेती हैं?
सरकारों को टैक्स और दूसरे स्रोतों से कमाई होती है, लेकिन कई बार खर्च आमदनी से ज्यादा हो जाता है.
इस अंतर को पूरा करने के लिए सरकारें सरकारी बॉन्ड जारी करके निवेशकों से पैसा जुटाती हैं. हालांकि, कई बार सरकारें पुराने कर्ज की अदायगी के लिए भी नया कर्ज लेती हैं.
उदाहरण के तौर पर, अगर सरकार 100 रुपए का बॉन्ड जारी करती है और कोई निवेशक इसे खरीदता है, तो वह सरकार को 100 रुपए उधार देता है.
वहीं अगर बॉन्ड पर सालाना ब्याज दर 2.5% है, तो सरकार को हर साल 2.50 रुपए ब्याज देना होगा. 10 साल के बॉन्ड पर इस दर से कुल 25 रुपये ब्याज देने के बाद सरकार तय शर्तों के अनुसार निवेशक को 100 रुपये की मूल रकम भी लौटाती है.
दुनिया के किस देश पर कितना सरकारी कर्ज है?
आंकड़ों के मुताबिक, सरकारी कर्ज के मामले में अमेरिका सबसे आगे है.
इसके बाद चीन और जापान का नंबर आता है. प्रमुख देशों पर कर्ज की स्थिति इस प्रकार है.
अमेरिका: 3,933 लाख करोड़ रुपए
चीन: 2,137.5 लाख करोड़ रुपए
जापान: 826.5 लाख करोड़ रुपए
ब्रिटेन: 418 लाख करोड़ रुपए
फ्रांस: 399 लाख करोड़ रुपए
इटली: 35
📡 स्रोत: ABP Live Vyapar