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कर्नाटक विधायक की भतीजी को बिना काम ₹70 हजार सैलरी:6 महीने से सरकारी क्लीनिक नहीं गईं; नौकरी के साथ PG करने का आरोप

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 16 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
कर्नाटक विधायक की भतीजी को बिना काम ₹70 हजार सैलरी:6 महीने से सरकारी क्लीनिक नहीं गईं; नौकरी के साथ PG करने का आरोप

कर्नाटक के बागलकोट में नम्मा क्लीनिक की मेडिकल ऑफिसर डॉ.

अंकिता यरगल पर नौकरी के साथ निजी मेडिकल कॉलेज से फुल टाइम पोस्टग्रेजुएशन (PG) करने का आरोप है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्हें हर महीने 70 हजार रुपए से ज्यादा सैलरी मिलती थी। डॉ.

अंकिता बागलकोट से कांग्रेस विधायक उमेश मेटी की भतीजी हैं। उनके पिता राजकुमार यरगल बागलकोट के जिला स्वास्थ्य अधिकारी (DHO) हैं। मामले में जिला स्तर पर विभागीय जांच चल रही है। मार्च से सितंबर तक क्लीनिक से गैरहाजिर रहने का आरोप अधिकारियों के मुताबिक, डॉ.

अंकिता बागलकोट शहर की वाम्बे कॉलोनी स्थित नम्मा क्लीनिक में मेडिकल ऑफिसर के पद पर तैनात थीं। वह अप्रैल 2025 से कॉन्ट्रैक्ट/आउटसोर्स आधार पर यहां काम कर रही थीं। आरोप है कि 3 मार्च से सितंबर तक वह क्लीनिक में ड्यूटी पर नहीं पहुंचीं। इस दौरान क्लीनिक में मेडिकल ऑफिसर नहीं होने से मरीजों और स्थानीय लोगों को परेशानी हुई। जिला पंचायत CEO गजानन बाले की ओर से जारी नोटिस में इसी गैरहाजिरी को गंभीरता से लिया गया है। नौकरी के साथ निजी कॉलेज में PG में दाखिला मामले का मुख्य विवाद डॉ.

अंकिता के निजी मेडिकल कॉलेज में PG कोर्स में दाखिले को लेकर है। अधिकारियों का आरोप है कि उन्होंने मार्च में निजी मेडिकल कॉलेज में फुल टाइम मेडिकल PG कोर्स शुरू किया, लेकिन नम्मा क्लीनिक की नौकरी से इस्तीफा नहीं दिया। यानी एक तरफ वह निजी कॉलेज में PG की पढ़ाई कर रही थीं और दूसरी तरफ सरकारी स्वास्थ्य सेवा से जुड़े क्लीनिक में मेडिकल ऑफिसर के पद पर बनी रहीं।

अधिकारियों के अनुसार, एक ही समय में दोनों जिम्मेदारियां निभाना नियमों के खिलाफ हो सकता है। इसी आधार पर उनके खिलाफ अनधिकृत दोहरी व्यस्तता और ड्यूटी में लापरवाही के आरोपों की जांच की जा रही है। कॉलेज प्रिंसिपल ने दी थी PG की अनुमति जिला पंचायत CEO के नोटिस में कहा गया है कि SN मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल ने डॉ.

अंकिता को PG की पढ़ाई के लिए अनुमति दी थी। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि कॉलेज की ओर से पढ़ाई की अनुमति मिलने से नम्मा क्लीनिक की ड्यूटी से गैरहाजिर रहने का मामला खत्म नहीं हो जाता। सरकारी स्वास्थ्य संस्थान से जुड़े नियमों के तहत उनकी अनुपस्थिति और दोहरी व्यस्तता की अलग से जांच की जा रही है। 15 सितंबर की जांच में नहीं पहुंचीं मामले की जांच के लिए जिला

📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

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💡 पृष्ठभूमि (Background)

कर्नाटक के बागलकोट में एक मेडिकल ऑफिसर डॉ. अंकिता यरगल पर सरकार की क्लीनिक में काम न करते हुए भी 70 हजार रुपये से अधिक की सैलरी मिलने और निजी मेडिकल कॉलेज से फुल‑टाइम PG करने के आरोप लगे हैं। यह मामला कांग्रेस विधायक उमेश मेटी की भतीजी पर आधारित है, जबकि उनके पिता राजकुमार यरगल जिला स्वास्थ्य अधिकारी हैं। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सरकारी पदों में पारदर्शिता और जवाबदेही के सवाल उठाती है। यदि सत्य साबित होता है तो इससे सार्वजनिक धन का दुरुपयोग और स्वास्थ्य सेवा में विश्वास घटने की संभावना है

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