कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ भेदभाव को रोकने के लिए गिरिडीह में सेमिनार आयोजित
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महिला अपराध को रोकने के लिए बने कानूनों का व्यापक प्रचार प्रसार जरुरी
Short Headline: कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ भेदभाव को रोकने के लिए गिरिडीह में सेमिनार आयोजित
एंकर
कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ होने वाले भेदभाव, असमानता और शोषण को रोकने के लिए गिरिडीह में एक सेमिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उदघाटन प्रधान जिला जज एम पी मिश्रा, बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रकाश सहाय और महासचिव चुन्नूकांत ने संयुक्त रूप से किया। सुप्रीम कोर्ट की वरिष्ठ वकील विभा दत्ता मखीजा ने वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से अपनी बात रखी।
वीओ 1-- कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ भेदभाव को रोकने के लिए गिरिडीह में सेमिनार आयोजित हुआ। इस दौरान
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश मार्तंड प्रताप मिश्रा ने कहा कि घर में महिलाओं के प्रति समानता लाकर कानून को और प्रभावी बनाया जा सकता है ।
बाइट: प्रधान जिला जज एम पी मिश्रा वीओ 2--
मौके पर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रकाश सहाय ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम से महिलाओं के प्रति समाज में भेदभाव को कम किया जा सकता है।
बाइट: प्रकाश सहाय अध्यक्ष वीओ 3 -- बार एसोसिएशन के महासचिव चुन्नूकांत ने कहा कि भारत सरकार ने अनेक कानून महिलाओं के साथ होने वाले शोषण को रोकने के लिए बनाए हैं। आज जरूरत है कि मीडिया उसका व्यापक प्रचार प्रसार करें।
बाइट : चुन्नूकांत महासचिव वीओ 4- जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव सफदर अली नैयर ने कहा कि इस सेमिनार से सभी को कानून की बारीकियों से रूबरू होने का मौका मिला।
बाइट: सफदर अली नैयर सचिव वीओ 5-- सेमिनार में प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय संतोष कुमार, जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम कमलजीत चोपड़ा, और जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश प्रीति कुमारी भी उपस्थित थी। कार्यक्रम का संचालन न्यायिक दंडाधिकारी स्मृति त्रिपाठी ने किया। गिरिडीह से रमेश प्रभाकर की रिपोर्ट
🎙️ वॉयस ऑफ क्रांति का मत
गिरिडीह में आयोजित सेमिनार ने कार्यस्थल पर महिलाओं के प्रति भेदभाव, असमानता और शोषण के खिलाफ जागरूकता बढ़ाई। यह संदेश देता है कि हर महिला को समान अवसर, सम्मान और सुरक्षा का अधिकार है। हमें न केवल कानूनी उपायों पर निर्भर रहना चाहिए, बल्कि सहानुभूति, शिक्षा और सहयोग से एक समावेशी समाज का निर्माण करना चाहिए। जब हम एक-दूसरे की आवाज़ें सुनें और सहारा दें, तभी वास्तविक परिवर्तन संभव है।