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काष्ठ कलाकार श्रवण चोपकर

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 18 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
काष्ठ कलाकार श्रवण चोपकर

अनिल पंडा, दुर्ग दिनांक = 18 अक्टूबर 2026

स्क्रिप्ट = काष्ठ कलाकार श्रवण चोपकर न्यूज अनुमति = डॉक्टर मनोज सर

इस्पात नगरी भिलाई के प्रख्यात काष्ठ शिल्पी श्रवण चोपकर ने सूखी लकड़ियों को जीवंत कला में बदलकर काष्ठ शिल्प के क्षेत्र में तकनीक दक्षता और अद्वितीय कला कौशल की एक नई व अनूठी मिसाल कायम की है.

उन्होंने एकल लकड़ी के टुकड़ों से बिना किसी जोड़ के छत्तीसगढ़ के गतिशील ग्रामीण परिवेश की पूरी तस्वीर को हुबहू जीवंत कर दिया है. इस विस्मयकारी कलाकृति की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसे आपस में जोड़ने या हिलाने-डुलाने के लिए न तो किसी बाहरी कील का इस्तेमाल किया गया है और न ही फेविकोल का, इसके बावजूद इसके सभी हिस्से किसी सजीव गांव की तरह सुचारू रूप से गतिमान नजर आते हैं.

इस विशेष कलाकृति में छत्तीसगढ़ की ग्रामीण संस्कृति और कृषि जीवन की आत्मा बसती है. श्रवण चोपकर ने अपनी विशेष 'मूवमेंट तकनीक' (गतिशील कला) का उपयोग करते हुए एक ही लकड़ी के ब्लॉक से पारंपरिक ग्रामीण घर, आंगन में खड़े गाय-बैल, पानी उलीचता हुआ कुआं और अनाज से लदी बैलगाड़ी तैयार की है. इसके साथ ही, पारंपरिक तरीके से धान कूटती ग्रामीण महिलाएं और खेती-किसानी से जुड़े सभी प्रमुख औजारों—जैसे हल, जुआठ, कुदाल, हंसिया, खुरपी और फावड़ा—को भी बेहद बारीकी से उकेरा गया है.

एक ही लकड़ी के खंड से इन सभी अवयवों को बिना अलग किए एक साथ गतिशील बनाना उनकी उच्च तकनीकी महारत को सिद्ध करता है. छत्तीसगढ़ की इस अनमोल कला धरोहर को सहेजने और चोपकर के इस कठिन हुनर को युवा पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता पर विशेष बल दिया गया है.

गौरतलब है. कि आज के इस आधुनिक और डिजिटल दौर में, भिलाई के इस शिल्पी के हाथों का यह जादू यह साबित करता है कि भारत के पारंपरिक कलाकारों का कौशल आज भी दुनिया में सबसे अनूठा और बेमिसाल है.

बाइट = श्रवण चोपकर, काष्ठ कलाकार, भिलाई, छत्तीसगढ़

💡 पृष्ठभूमि (Background)

काष्ठ शिल्प की दुनिया में इस्पात नगरी भिलाई के कलाकार श्रवण चोपकर ने सूखी लकड़ियों को बिना जोड़ के जीवंत कला में बदलने की नई तकनीक पेश की है। यह विषय लकड़ी के पुनः उपयोग और शिल्प कौशल के नवाचार पर केंद्रित है। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह पारंपरिक काष्ठ शिल्प को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर पर्यावरणीय स्थिरता और स्थानीय रोजगार के नए अवसर पैदा कर रही है। आम जनता पर इसका असर सकारात्मक है: लकड़ी के कचरे को कम करके पर्यावरण स्वच्छ रहेगा, और शिल्प की कला को बढ़ावा देकर स्थानीय कलाकारों को पहचान और आ

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।