कौन हैं IPS बुशरा बानो? जिनके इंशाअल्लाह, जजाकल्लाह बोलने पर हुआ बवाल
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पश्चिम बंगाल की आईपीएस अधिकारी बुशरा बानो इन दिनों सुर्खियों का हिस्सा बनी हुई हैं.
बुशरा अपने एक वीडियो की वजह से चर्चा में हैं जिसकी शुरुआत में उन्होंने अस्सलामु अलैकुम की है. इस वीडियो पर सियासत शुरू हो गई है. उनके खिलाफ पश्चिम बंगाल के गृह सचिव के पास शिकायत दर्ज कराई गई है.
आइए आपको आईपीएस बुशरा बानो के बारे में बताते हैं.
कौन हैं बुशरा बानो बुशरा बानो की कहानी बहुत लोगों के लिए प्रेरणादायक है.
उनका जन्म उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले में हुआ.
उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से मैनेजमेंट स्टडीज में PhD की और इसके साथ ही UGC NET-JRF भी पास किया. शादी के बाद भी बुशरा ने अपने सपने नहीं छोड़े.
सऊदी अरब में रहने के दौरान वो असिस्टेंट प्रोफेसर की नौकरी कर रही थीं. इसके बाद जब वो भारत आईं तो उन्होंने यूपीएससी देने का फैसला दिया.
दो बार दिया यूपीएससी पास
बुशरा ने पहली बार साल 2018 में यूपीएससी की परीक्षा पास की थी.
उनकी ऑल इंडिया रैंक 277 थी और इंडियन रेलवे ट्रैफिक सर्विस के लिए उनका सिलेक्शन हो गया था. मगर उस समय दूसरे बच्चे से प्रेग्नेंट थी. इस वजह से वो सेवा में शामिल नहीं हो सकीं.
बाद में उन्होंने 2019 में फिर से परीक्षा दी और ऑल इंडिया 234 रैंक हासिल की. इस बार उनका सिलेक्शन भारतीय पुलिस सेवा में हुआ.
कहां है पोस्टिंग बुशरा बानो 2021 बैच की पश्चिम बंगाल की कैडर की आईपीएल अधिकारी हैं.
उनकी पहली पोस्टिंग हुगली ग्रामीण जिले में असिस्टेंट सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (ASP) के रूप में हुई थी.
जून 2026 में उन्हें प्रमोशन देकर एडिशनल सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (Additional SP) बनाया गया. वर्तमान में वह पश्चिम बंगाल के खड़गपुर में एडिशनल एसपी के पद पर तैनात हैं.
क्यों हुआ विवाद बुशरा ने अपनी जर्नी के बारे में बताते हुए एक वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर किया था.
इस वीडियो की शुरुआत में उन्होंने अस्सलामु अलैकुम कहा था और बीच में इंशाअल्लाह शब्द का इस्तेमाल किया था. वीडियो के आखिर में उन्होंने जजाकल्लाह कहा था. हिंदू
📡 स्रोत: ABP Live
💡 पृष्ठभूमि (Background)
बुशरा बानो, पश्चिम बंगाल की एक IPS अधिकारी, अपने द्वारा बनाए गए एक वीडियो के कारण राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गई हैं। इस वीडियो में उन्होंने "अस्सलामु अलैकुम" कहा, जिसके बाद सियासी बहस छिड़ गई और उन्हें गृह सचिव के पास शिकायत दर्ज कराई गई। यह विषय महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सरकारी अधिकारियों के सोशल मीडिया उपयोग और उसकी संवेदनशीलता को उजागर करता है। जनता के लिए इसका असर यह हो सकता है कि वे सरकारी अधिकारियों के निजी संवादों पर अधिक निगरानी रखें, और साथ ही ऑनलाइन अभिव्यक्ति के नियमों तथा शिष्टाचार क