Kedarnath और Pashupatinath ज्योतिर्लिंग का क्या है महाभारतकालीन संबंध ? जानें पंचकेदार और शिव महिमा

'प्रार्थना और स्वीकार' के इस विशेष अंक में जानिए महाभारत काल से जुड़े केदारनाथ और पशुपतिनाथ मंदिर के अलौकिक संबंध की कथा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महाभारत युद्ध के बाद पांडवों को भ्रातृ हत्या के पाप से मुक्त करने के लिए भगवान शिव केदारनाथ में बैल के रूप में प्रकट हुए थे.
जब भीम ने भगवान शिव के बैल रूप को पकड़ा, तो उनकी पीठ का कूबड़ केदारनाथ में ही रह गया, जबकि उनका मुख नेपाल के काठमांडू में प्रकट हुआ, जिसे आज पशुपतिनाथ मंदिर के नाम से जाना जाता है. पशुपतिनाथ में भगवान शिव पंचमुखी स्वरूप में विराजमान हैं, जबकि केदारनाथ में भगवान के कूबड़ रूपी स्वयंभू शिवलिंग की पूजा होती है.
इसके अतिरिक्त तुंगनाथ, रुद्रनाथ, मदमहेश्वर और कल्पेश्वर को मिलाकर इन्हें पंचकेदार कहा जाता है. उत्तराखंड के गढ़वाल में मंदाकिनी नदी के तट पर स्थित केदारनाथ धाम छह महीने के लिए खुलता है और कपाट बंद होने पर छह महीने तक अखंड दीपक जलता रहता है.
📡 स्रोत: NewsData.io