केंद्र सरकार ने कच्ची चीनी के आयात की समयसीमा में किया बदलाव

रायपुर, 25 अगस्त 2026 केंद्र सरकार ने शुल्क-मुक्त आयात की गई कच्ची चीनी के प्रसंस्करण और बिक्री की समयसीमा में बदलाव किया है। अब आयातकों को बिल ऑफ एंट्री दाखिल करने की तारीख से अधिकतम दो महीने का समय मिलेगा, जिसके भीतर उन्हें कच्ची चीनी को रिफाइंड चीनी में बदलकर घरेलू बाजार में बेचना होगा।
जब कोई व्यापारी या आयातक विदेश से माल मंगाता है, तो माल के पोर्ट पर पहुँचने से पहले या उस समय सीमा शुल्क विभाग को एक घोषणा पत्र देना होता है। इसे ही बिल ऑफ एंट्री कहते हैं। इसके माध्यम से सरकार को माल की मात्रा, मूल्य, और उस पर लगने वाले कर की जानकारी मिलती है।
विदेश व्यापार महानिदेशालय ने अगस्त की शुरुआत में अधिसूचित उन नियमों में संशोधन किया है, जिनके अंतर्गत टैरिफ रेट कोटा-टीआरक्यू योजना के अंतर्गत 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात की अनुमति दी गई थी। इससे पहले टीआरक्यू के तहत आयात की गई कच्ची चीनी को 31 अक्टूबर तक रिफाइंड चीनी में प्रसंस्कृत कर घरेलू बाजार में बेचना जरूरी था।
इसके अतिरिक्त सरकार ने 20 अगस्त को घरेलू बाजार में चीनी की कीमतों में तेज वृद्धि के बीच, आगामी त्योहारी सीजन से पहले टीआरक्यू योजना के तहत 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी थी।
हालांकि, ताजा संशोधन में 20 अगस्त की अधिसूचना में दिए गए अन्य नियमों और शर्तों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। सरकार का यह फैसला अगस्त से नवंबर के बीच आने वाले त्योहारी सीजन से पहले घरेलू बाजार में चीनी की उपलब्धता बढ़ाने और कीमतों पर दबाव कम करने के प्रयासों के तहत आया है।
इस अवधि में आमतौर पर चीनी की मांग बढ़ जाती है।