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केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ग्वालियर में सूफी संत मंसूर शाह औलिया की दरगाह पर टेका माथा, 300 वर्ष पुरानी पारिवारिक परंपरा के तहत की पूजा-अर्चना।

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 30 सितंबर 2026 👁️ 1 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ग्वालियर में सूफी संत मंसूर शाह औलिया की दरगाह पर टेका माथा, 300 वर्ष पुरानी पारिवारिक परंपरा के तहत की पूजा-अर्चना।

सोमवार को ग्वालियर प्रवास पर पहुंचे केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने महाराज बाड़ा स्थित सूफी संत मंसूर शाह औलिया की दरगाह पर पहुंचकर सिर झुकाया और आशीर्वाद लिया। इसके साथ ही उन्होंने गोरखी परिसर स्थित ऐतिहासिक देवघर में 300 साल पुरानी पारिवारिक परंपरा के तहत संत मंसूर शाह की विधिवत पूजा-अर्चना की।

महादजी सिंधिया के दौर से चली आ रही यह परंपरा सूफी संत के आशीर्वाद और 'आधी रोटी' के ऐतिहासिक प्रसंग से जुड़ी है, जो आज भी हिंदू-मुस्लिम सौहार्द और सिंधिया राजवंश की गहरी आस्था का प्रतीक है। मान्यता है कि पानीपत के युद्ध में महादजी सिंधिया के गंभीर रूप से घायल होने पर सूफी संत मंसूर शाह ने उनके सकुशल लौटने का भरोसा दिया था।

सुरक्षित वापसी के बाद संत ने उन्हें आशीर्वाद स्वरूप 'आधी रोटी' दी थी, जिसके अवशेष आज भी देवघर में सुरक्षित हैं और पूजे जाते हैं। परंपरा के अनुसार शिवलिंग के प्रतीकात्मक स्वरूप पर शाही पगड़ी रखकर चादर बिछाई जाती है और फूल गिरने के बाद ही यह विशेष अनुष्ठान संपन्न माना जाता है। पूजा-अर्चना के बाद केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि सदियों पुरानी परंपरा को आज भी ग्वालियर में उसी तरह से उनके द्वारा निभाया जा रहा है।

और इसी परंपरा के तहत उनके द्वारा मंसूर शाह की पूजा-अर्चना की गई और क्षेत्र की खुशहाली और तरक्की की कामना की गई।

बाइट - ज्योतिरादित्य सिंधिया, केंद्रीय मंत्री, भारत सरकार

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।