केरलम सरकार का ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जांच का आदेश:2006 में PWD इंजीनियर की आत्महत्या का मामला; मुख्य चुनाव आयुक्त तब राज्य में सचिव थे
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केरलम के गृह मंत्री रमेश चेन्निथला ने रविवार को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं। मामला मलेशियाई सिविल इंजीनियर ली सी बीन की आत्महत्या से जुड़ा है। वह केरल स्टेट ट्रांसपोर्ट प्रोजेक्ट (KSTP) के तहत MC रोड के अपग्रेडेशन का काम कर रहे PATI-BEL कंसोर्टियम से जुड़े थे।
आरोप है कि इंजीनियर के सुसाइड नोट में उस समय राज्य के PWD सचिव रहे ज्ञानेश कुमार का भी नाम था। केरलम गृह विभाग ने 2006 की जांच से जुड़ी सभी फाइलें मांगी हैं। दीपके बोले- 10 अक्टूबर को कॉकरोच दिल्ली आएंगे CJP फाउंडर अभिजीत दीपके ने 2 अक्टूबर को कहा कि ज्ञानेश कुमार ने इस्तीफा नहीं दिया तो 10 अक्टूबर को पूरे देश से कॉकरोच दिल्ली पहुंचेंगे।
दीपके ने लिखा- अगर दिल्ली पुलिस हमें रोकने की कोशिश करती है, तो जहां वे हमें रोकेंगे, वही हमारा जंतर-मंतर होगा। हमारा आंदोलन शांतिपूर्ण होगा। हम महात्मा गांधी के दिखाए रास्ते पर चलेंगे। दोनों आयुक्तों ने भी 4 बड़े सवाल उठाए 1.
फॉर्म-6 में बदलाव: नए वोटरों से पिछली SIR लिस्ट में खुद या परिवार के नाम की जानकारी मांगने पर दोनों ने सवाल उठाया। संधू ने इसे गैरकानूनी बताते हुए हटाने की मांग की। 2.
वोटर डेटा का कंट्रोल: दोनों ने सवाल किया कि वोटर डेटाबेस का कंट्रोल दिल्ली में क्यों बढ़ रहा है और राज्यों की पहुंच क्यों सीमित हो रही है। 3.
बंगाल में 16 लाख अपीलें: संधू ने पूछा कि हटाए गए नामों को लेकर करीब 16 लाख अपीलें किसने और किसकी अनुमति से दायर कीं। 4.
गोवा के 97 वोटर: जांच में योग्य पाए गए 97 वोटरों को सॉफ्टवेयर की समस्या के कारण अंतिम लिस्ट में नहीं जोड़ा जा सका। SIR को लेकर चुनाव आयोग पर सवाल यह प्रदर्शन इंडियन एक्सप्रेदस की रिपोर्ट के कुछ दिन बाद हो रहा है, जिसमें बताया गया था कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में SIR से जुड़े फैसलों और आदेशों पर रिकॉर्ड में कम से कम 14 बार आपत्ति जताई थी।
रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों अधिकारियों ने कहा था कि ये फैसले और आदेश उनकी जानकारी या सिफारिश के बिना जारी किए गए। SIR प्रक्रिया को लेकर दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों के बाद चुनाव आयोग पर सवाल उठ रहे हैं। आयोग ने कहा है कि किसी भी संस्था में चर्चा के दौरान अलग-अलग राय और टिप्पणियां सामान्य बात हैं।
EC ने कहा कि उसके सभी
📡 स्रोत: Dainik Bhaskar