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खाद-बीज की गुणवत्ता जांच होगी डिजिटल, नमूनों से छेड़छाड़ रोकने की पहल

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 27 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
खाद-बीज की गुणवत्ता जांच होगी डिजिटल, नमूनों से छेड़छाड़ रोकने की पहल

सरकार ने खाद, बीज और कीटनाशकों की गुणवत्ता जांच में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए कृषि विभाग और भारतीय डाक विभाग के राजस्थान परिमंडल के बीच तीन साल का एमओयू किया है। कृषि आदानों की गुणवत्ता जांच प्रक्रिया को डिजिटल निगरानी से अधिक पारदर्शी बनाया जाएगा।

27 अक्टूबर,डीडवाना-कुचामन। किसानों को गुणवत्तापूर्ण बीज, उर्वरक और कीटनाशक उपलब्ध कराने तथा अमानक कृषि आदानों की बिक्री पर अंकुश लगाने के लिए राजस्थान सरकार ने नई पहल की है। अब कृषि आदानों की गुणवत्ता जांच प्रक्रिया को डिजिटल निगरानी से अधिक पारदर्शी बनाया जाएगा। नमूना संग्रहण से लेकर प्रयोगशाला में जांच और रिपोर्ट जारी होने तक पूरी प्रक्रिया का डिजिटल रिकॉर्ड रखा जाएगा। इससे नमूनों में छेड़छाड़, अदला-बदली और जांच प्रक्रिया में अनियमितताओं की आशंका कम करने में मदद मिलेगी।

कृषि और डाक विभाग के बीच तीन साल का समझौता

डीडवाना-कुचामन जिले के कृषि अधिकारी रमेश बेनीवाल ने बताया कि राज्य सरकार ने कृषि आदानों की गुणवत्ता जांच में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए कृषि विभाग और भारतीय डाक विभाग के राजस्थान परिमंडल के बीच तीन वर्ष का समझौता ज्ञापन (एमओयू)किया है। इस समझौते के तहत कृषि विभाग की ओर से लिए गए नमूनों को सुरक्षित तरीके से अधिकृत प्रयोगशालाओं तक पहुंचाया जाएगा। नमूनों के परिवहन और उनकी स्थिति की जानकारी डिजिटल माध्यम से ट्रैक की जा सकेगी, जिससे पूरी प्रक्रिया में जवाबदेही बढ़ेगी।

जिले में 242 नमूनों की जांच का लक्ष्य डीडवाना-कुचामन जिले में कृषि आदानों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नमूना जांच के लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। इसके तहत बीज के 88, उर्वरक के 94 और कीटनाशक के 60 नमूनों की जांच की जाएगी। इस तरह जिले में कुल 242 नमूनों की जांच का लक्ष्य रखा गया है। निर्धारित लक्ष्य पूरा करने के लिए कृषि विभाग के निरीक्षकों की ओर से नियमित और आकस्मिक निरीक्षण किए जा रहे हैं। जांच के दौरान गुणवत्ता मानकों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

एग्री QMS ऐप से होगी डिजिटल निगरानी नई व्यवस्था में कृषि आदान निरीक्षक मौके पर ही एग्री QMS मोबाइल ऐप के माध्यम से नमूने से जुड़ी आवश्यक जानकारी दर्ज करेंगे। इसमें नमूना संग्रहण स्थल की GPS आधारित जियो-टैगिंग, उत्पाद की तस्वीरें और जरूरी दस्तावेज शामिल होंगे। प्रत्येक नमूने के लिए QR कोड तैयार किया जाएगा। इसके बाद नमूने को सुरक्षित पैकिंग में सीलबंद कर निर्धारित प्रक्रिया के तहत जांच के लिए भेजा जाएगा। इस डिजिटल रिकॉर्ड से नमूने की पहचान और उसके परिवहन की जानकारी को व्यवस्थित तरीके से सुरक्षित रखा जा सकेगा।

रैंडम आधार पर होगा प्रयोगशालाओं का आवंटन

नई डिजिटल व्यवस्था की खास बात यह है कि नमूना लेने वाले निरीक्षक को पहले से यह जानकारी नहीं होगी कि नमूने की जांच किस प्रयोगशाला में की जाएगी। प्रयोगशाला को भी संबंधित विक्रेता या निर्माता की पहचान गोपनीय रखते हुए नमूने की जांच करनी होगी। ऐप के माध्यम से प्रयोगशाला का आवंटन रैंडम आधार पर किया जाएगा। इससे निरीक्षक अपनी पसंद की प्रयोगशाला का चयन नहीं कर सकेंगे और जांच प्रक्रिया में अनुचित प्रभाव की आशंका कम होगी। जांच रिपोर्ट भी ऑनलाइन दर्ज की जाएगी।

डाक विभाग की सेवाओं से सुरक्षित पहुंचेंगे नमूने

एमओयू के तहत कृषि विभाग के नमूनों को जयपुर स्थित डाक विभाग के मुख्यालय भेजा जाएगा। आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद भारतीय डाक विभाग की स्पीड पोस्ट और बिजनेस पोस्ट सेंटर सेवाओं के माध्यम से नमूनों को अधिकृत प्रयोगशालाओं तक पहुंचाया जाएगा।

डिजिटल ट्रैकिंग से नमूनों के भेजे जाने और प्राप्त होने की जानकारी दर्ज रहेगी। इसके अतिरिक्त डाक विभाग की ओर से कृषि विभाग को 'बुक नाउ पे लेटर' सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी।

ईमानदार विक्रेताओं को भी मिलेगा लाभ डीडवाना के खाद-बीज एवं कीटनाशक विक्रेता सद्दाम हुसैन ने डिजिटल व्यवस्था को अच्छी पहल बताया। उन्होंने कहा कि प्रयोगशालाओं का रैंडम आवंटन और विक्रेता व निर्माता की पहचान गोपनीय रखने से जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी।

उनके अनुसार, निर्धारित मानकों के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण उत्पाद बेचने वाले ईमानदार व्यापारियों को भी इस व्यवस्था का लाभ मिलेगा। वहीं, अमानक उत्पादों की बिक्री करने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होने से व्यापार में निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा मिलेगा।

किसानों की लागत और मेहनत की सुरक्षा पर जोर

किसान महावीर सिंह ने कहा कि खेती में किसानों की काफी पूंजी लगती है। बीज, खाद और कीटनाशकों की खरीद पर खर्च करने के बाद यदि उत्पाद अमानक निकलते हैं, तो किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

उन्होंने कहा कि नमूनों की डिजिटल ट्रैकिंग और डाक विभाग के माध्यम से सुरक्षित परिवहन से जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी। इससे खराब गुणवत्ता वाले उत्पादों की पहचान करने और संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने में मदद मिल सकती है।

गुणवत्ता जांच में पारदर्शिता बढ़ाने की पहल

राजस्थान सरकार की इस पहल का उद्देश्य किसानों को गुणवत्तापूर्ण कृषि आदान उपलब्ध कराना, निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित करना और जांच प्रक्रिया में जवाबदेही बढ़ाना है। डीडवाना-कुचामन जिले में 242 नमूनों की जांच के लक्ष्य के साथ डिजिटल निगरानी की यह व्यवस्था कृषि क्षेत्र में गुणवत्ता नियंत्रण को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। नई व्यवस्था से किसानों को बेहतर गुणवत्ता वाले कृषि उत्पाद उपलब्ध कराने, ईमानदार विक्रेताओं का भरोसा बढ़ाने और अमानक उत्पादों की बिक्री पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

बाइट — रमेश बेनीवाल, कृषि अधिकारी, डीडवाना

बाइट — सद्दाम हुसैन, खाद-बीज एवं कीटनाशक विक्रेता

बाइट — महावीर सिंह, किसान

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।