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खड़गे बोले- चीनी की मिठास में सरकारी नीतियों की कड़वाहट:विदेश से आयात हो रहा, ये कैसा आत्मनिर्भर भारत; बढ़ती कीमतों पर केंद्र से 3 सवाल किए

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 22 अगस्त 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
खड़गे बोले- चीनी की मिठास में सरकारी नीतियों की कड़वाहट:विदेश से आयात हो रहा, ये कैसा आत्मनिर्भर भारत; बढ़ती कीमतों पर केंद्र से 3 सवाल किए

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने शनिवार को चीनी की बढ़ती कीमतों और कम होते स्टॉक को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने X पर पोस्ट कर कहा कि त्योहारों से पहले मोदी सरकार की नीतियों की कड़वाहट चीनी की मिठास में घुल गई है। खड़गे ने सरकार से तीन सवाल पूछे।

उन्होंने कहा कि दुनिया के बड़े चीनी उत्पादक और निर्यातक भारत में चीनी का स्टॉक 9 साल के निचले स्तर पर क्यों पहुंच गया है और 10 लाख टन चीनी ड्यूटी-फ्री आयात करने की नौबत क्यों आई। उन्होंने कहा कि ये कैसा आत्मनिर्भर भारत है. जहां विदेश से चीनी आयात किया जा रहा है।

दूसरी तरफ गन्ने को पेट्रोल में मिलाने के लिए एथेनॉल में झोंक रहे हैं। सरकार बोली- एथेनॉल की वजह से नहीं बढ़ी चीनी की कीमत इससे पहले उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि चीनी की कीमतों में हालिया बढ़ोतरी गन्ने से एथेनॉल बनाने की वजह से नहीं हुई है।

मंत्रालय ने बताया कि एथेनॉल के लिए डायवर्ट की जाने वाली चीनी की हिस्सेदारी 2022-23 में करीब 12% से घटकर 2025-26 में करीब 9% रह गई है। वहीं, देश में बनने वाले एथेनॉल का करीब तीन-चौथाई हिस्सा अब अनाज, खासकर मक्का से आता है।

सरकार ने चीनी महंगी होने के पीछे घरेलू उत्पादन में कमी, त्योहारों से पहले बढ़ी मांग, मौसम से गन्ने की फसल को नुकसान, अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई कम होना और जमाखोरी-सट्टेबाजी को प्रमुख वजह बताया है।

अक्टूबर तक पर्याप्त स्टॉक का दावा इस सीजन में देश में चीनी का उत्पादन 306 लाख मीट्रिक टन (LMT) रहने का अनुमान है, जबकि शुरुआती अनुमान 343 LMT था। रेड रॉट और टॉप बोरर जैसी बीमारियों के साथ ज्यादा बारिश से खेतों में पानी भरने के कारण उत्पादन घटा है।

हालांकि, मंत्रालय का कहना है कि अक्टूबर में नया पेराई सीजन शुरू होने तक घरेलू जरूरत पूरी करने के लिए पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। चीनी की कीमतों पर अंतरराष्ट्रीय बाजार का भी असर पड़ा है। 2026-27 में दुनिया में चीनी की कमी करीब 33 LMT रहने का अनुमान है।

इसके चलते अंतरराष्ट्रीय कीमत 30 जून को 474 डॉलर प्रति टन से बढ़कर 20 अगस्त को 552 डॉलर प्रति टन हो गई। यानी दो महीने से भी कम समय में 16% से ज्यादा बढ़ोतरी हुई। घरेलू बाजार में जमाखोरी और सट्टेबाजी रोकने के लिए सरकार ने डीलर्स पर 400 टन की स्टॉक लिमिट 30 नवंबर तक ला

📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

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