खाली रैक भेज रहे दुर्ग, यात्रियों को सुविधा नहीं
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भास्कर न्यूज| कोरबा ऊर्जाधानी कोरबा को इस्पात नगरी दुर्ग-भिलाई से जोड़ने का सबसे सुलभ और सीधा विकल्प हसदेव एक्सप्रेस है। कोरबा-रायपुर के बीच नियमित रूप से चलने वाली इस ट्रेन का प्राथमिक रखरखाव रेल प्रशासन पिछले छह साल से दुर्ग के कोचिंग यार्ड में करा रहा है। इसके लिए रायपुर से खाली रैक दुर्ग भेजा जाता है और रख-रखाव के बाद वापस रायपुर लाया जाता है।
इस प्रक्रिया से रेलवे पर न केवल अनावश्यक वित्तीय भार पड़ रहा है, बल्कि समय की भी बर्बादी हो रही है। यदि इस ट्रेन का विस्तार दुर्ग तक कर दिया जाए तो परिचालन में होने वाला यह अतिरिक्त खर्च स्वतः खत्म हो जाएगा। यह विस्तार यात्रियों की सुविधा के लिहाज से भी बेहद जरूरी है। कोरबा से बड़ी संख्या में छात्र उच्च शिक्षा, तकनीकी और मेडिकल की पढ़ाई के लिए भिलाई-दुर्ग जाते हैं।
वहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या साल-दर-साल बढ़ रही है। इसके अलावा व्यावसायिक और चिकित्सकीय जरूरतों के कारण भी स्थानीय निवासियों का भिलाई-दुर्ग से निरंतर आना-जाना लगा रहता है। तत्कालीन रेल मंत्री पीयूष गोयल की पहल पर 6 अक्टूबर 2018 को हसदेव एक्सप्रेस की शुरुआत हुई थी। यह ट्रेन सुबह चलकर शाम को वापसी का विकल्प देती है, जिससे लोग एक ही दिन में अपना काम पूरा कर घर लौट आते हैं।
हालांकि दुर्ग तक सीधा विस्तार न होने के कारण दोनों दिशाओं के यात्रियों को रायपुर में ट्रेन बदलनी पड़ती है या अन्य महंगे साधनों का सहारा लेना पड़ता है। 4 हजार से अधिक छात्र भिलाई और दुर्ग में पढ़ रहे भिलाई औद्योगिक केंद्र के साथ एजुकेशन हब भी है। तकनीकी, मेडिकल और उच्च शिक्षा के लिए हर साल बड़ी संख्या में जिले के छात्र वहां पढ़ाई करते हैं।
अनुमान के अनुसार 4 हजार से अधिक छात्र भिलाई और दुर्ग में रहकर किसी न किसी क्षेत्र में अपना भविष्य बनाने में जुटे हुए हैं। बड़ी संख्या में लोग वहां रोजगार भी करते हैं। अवकाश के दिनों में घर आने के लिए उन्हें रायपुर से हसदेव एक्सप्रेस पकड़ने को मजबूर हैं।
📡 स्रोत: NewsData.io