खंडवा स्टेशन के गेट पर दिखा 7 फीट लंबा सांप:युवक ने सुरक्षित रेस्क्यू कर प्लास्टिक की थैली में रखा
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →खंडवा रेलवे स्टेशन के प्रवेश द्वार पर शुक्रवार को जीआरपी सहायता केंद्र के पास करीब 7 फीट लंबा घोड़ा पछाड़ प्रजाति का सांप दिखाई देने से यात्रियों में खलबली मच गई। सांप कभी टेबल के पीछे तो कभी खुले स्थान पर घूमता नजर आया। भीड़भाड़ वाले स्थान पर अचानक सांप दिखाई देने के बाद यात्री उससे दूरी बनाकर खड़े हो गए।
काफी देर तक लोग उसके सुरक्षित रेस्क्यू का इंतजार करते रहे। सांप देखकर मौके पर जमा हुई भीड़ प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जीआरपी सहायता केंद्र के पास मौजूद कुछ यात्रियों की नजर अचानक सांप पर पड़ी। उन्होंने आसपास के लोगों को इसकी जानकारी दी, जिसके बाद वहां यात्रियों और अन्य लोगों की भीड़ जमा हो गई।
सांप के कभी इधर तो कभी उधर जाने से लोग उससे दूर खड़े रहे। कुछ लोग सांप पकड़ने वाले को बुलाने की बात करते नजर आए। युवक ने सावधानी से किया रेस्क्यू सांप के स्टेशन परिसर में घूमने की जानकारी मिलने के बाद काफी देर तक लोगों में डर बना रहा। प्रवेश द्वार पर लगातार यात्रियों की आवाजाही के कारण लोग सांप से बचने के लिए दूर हटते रहे।
इसी दौरान वहां मौजूद एक युवक ने भीड़ को सांप के पास जाने से रोकते हुए सावधानी से उसे काबू किया। काफी मशक्कत के बाद उसने सांप का सुरक्षित रेस्क्यू कर उसे प्लास्टिक की थैली में रख लिया। सांप के काबू में आने के बाद यात्रियों ने राहत की सांस ली। यात्रियों ने साफ-सफाई और निगरानी की जरूरत बताई रेस्क्यू के दौरान बड़ी संख्या में लोग मौके पर मौजूद रहे।
सांप को सुरक्षित पकड़ने के बाद लोगों ने युवक के साहस और सूझबूझ की सराहना की। यात्रियों का कहना था कि रेलवे स्टेशन पर रोजाना बड़ी संख्या में लोगों की आवाजाही रहती है। ऐसे में सांप किसी यात्री के पास पहुंच जाता या भगदड़ की स्थिति बनती तो परेशानी बढ़ सकती थी। यात्रियों ने स्टेशन परिसर में नियमित साफ-सफाई और निगरानी की जरूरत बताई, ताकि ऐसे जीव-जंतुओं के परिसर में पहुंचने की आशंका को कम किया जा सके।
📡 स्रोत: NewsData.io
🎙️ वॉयस ऑफ क्रांति का मत
सांप जैसी अनपेक्षित चुनौतियाँ जीवन में कभी-कभी सामने आती हैं। जब भीड़ घबराहट में फँसती है, तभी शांत मन से स्थिति का आकलन करके विशेषज्ञों की मदद लेना ज़रूरी है। यह घटना हमें सिखाती है कि प्रकृति के साथ सह-अस्तित्व में धैर्य और जिम्मेदारी की आवश्यकता है। समाज में जागरूकता फैलाकर हम आपात स्थितियों में एक-दूसरे की सहायता कर, सहानुभूति और सहयोग का नया मानदंड स्थापित कर सकते हैं।