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खरगोन में किसानों का हल्ला बोल, 500 ट्रैक्टरों के साथ निकली 4 किमी लंबी रैली

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 16 सितंबर 2026 👁️ 1 बार पढ़ा गया
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
खरगोन में किसानों का हल्ला बोल, 500 ट्रैक्टरों के साथ निकली 4 किमी लंबी रैली

खरगोन में किसानों का हल्ला बोल, 500 ट्रैक्टरों के साथ निकली 4 किमी लंबी रैली

खरगोन - राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के बैनर तले बुधवार को खरगोन में अपनी 10 सूत्रीय मांगों को लेकर हजारों किसानों ने प्रदर्शन किया। महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष शिवकुमार कक्काजी की अगुवाई में किसानों ने करीब 500 ट्रैक्टरों और बड़ी संख्या में चार पहिया वाहनों के साथ लगभग चार किलोमीटर लंबी रैली निकाली।

रैली शहर की अनाज मंडी से शुरू होकर कलेक्ट्रेट पहुंची। यहां किसानों ने कलेक्ट्रेट गेट पर करीब एक घंटे तक धरना दिया। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नाम अपर कलेक्टर रेखा राठौर को ज्ञापन सौंपा।

प्रदर्शन के दौरान कक्काजी ने कहा कि किसानों को उनकी फसलों का उचित दाम मिलना चाहिए। उन्होंने फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) घोषित करने तथा सी2 लागत पर 50 प्रतिशत लाभ के फार्मूले के आधार पर समर्थन मूल्य तय करने की मांग की।

कक्काजी ने मध्यप्रदेश सरकार की भावांतर योजना का विरोध करते हुए कपास की समर्थन मूल्य पर खरीदी शुरू करने की मांग की। उन्होंने देशगांव-जुलवानिया फोरलेन के लिए जमीन अधिग्रहण के मामले में किसानों को बाजार मूल्य का चार गुना मुआवजा देने की मांग भी उठाई।

महासंघ ने अमेरिका के साथ प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (फ्री ट्रेड एग्रीमेंट) का भी विरोध किया। कक्काजी ने कहा कि सरकार को ऐसे फैसले लेते समय किसानों के हितों को प्राथमिकता देनी चाहिए।

प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में किसानों और ट्रैक्टरों के पहुंचने से शहर में यातायात भी प्रभावित हुआ।

💡 पृष्ठभूमि (Background)

किसान अपने कृषि नीतियों से असंतुष्ट होकर खरगोन में 500 ट्रैक्टरों के साथ 4 किमी लंबी रैली कर रहे हैं। यह रैली राष्ट्रीय किसान मजदूर महासंघ के तहत हजारों किसानों के 10 सूत्रीय मांगों को दर्शाती है। यह घटना महत्वपूर्ण है क्योंकि यह कृषि सुधार और किसानों के अधिकारों पर सरकार की नीतियों के प्रति सार्वजनिक असंतोष को उजागर करती है। आम जनता पर इसका असर बढ़ती कृषि लागत, खाद्य कीमतों में उतार-चढ़ाव और ग्रामीण-शहरी तनाव के रूप में महसूस हो सकता है।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।