व्यापार

खर्च करने में मुंबई-दिल्ली छूटे पीछे, ये है देश की सबसे ज्यादा खर्चीली City

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 13 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
खर्च करने में मुंबई-दिल्ली छूटे पीछे, ये है देश की सबसे ज्यादा खर्चीली City

भारत में जब ज्यादा खर्च करने वाले शहरों की बात होती है, तो आमतौरपर मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु जैसे बड़े महानगरों का नाम सामने आता है. लेकिन एक नई रिपोर्ट ने इस तस्वीर को थोड़ा बदल दिया है.

प्रति परिवार औसत खर्च के मामले में छोटे और मझोले शहर कई बड़े महानगरों से आगे निकल गए हैं. 'द मेनी अर्बन इंडियाज' रिपोर्ट के मुताबिक, चंडीगढ़ सबसे ऊपर है, जबकि तिरुवनंतपुरम दूसरे नंबर पर है.

हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार, अमृतसर, अहमदाबाद और जबलपुर में भी परिवारों का औसत खर्च मुंबई के परिवारों से काफी ज्यादा है.

लेकिन कुल उपभोग बाजार के मामले में बड़े महानगर अभी भी आगे हैं, क्योंकि वहां परिवारों की संख्या ज्यादा है.

सबसे ज्यादा खर्च करने वाले शहर कौन से हैं?

चंडीगढ़ प्रति परिवार औसत उपभोग के मामले में सबसे आगे है. वहीं, तिरुवनंतपुरम अभी दूसरे स्थान पर है. अमृतसर, अहमदाबाद और जबलपुर में भी औसत घरेलू खर्च मुंबई से ज्यादा बताया गया है.

हालांकि, चंडीगढ़ की औसत सालाना घरेलू आय करीब 28.3 लाख रुपये बताई गई है. यहां परिवारों का खर्च भी देश के दूसरे शहरों के मुकाबले में काफी ज्यादा है.

घाटा Air India का, लेकिन बवाल विदेश में क्यों?

TATA से क्या है सिंगापुर एयरलाइंस का कनेक्शन?

मुंबई-दिल्ली क्यों नहीं हैं टॉप पर?

इस रिपोर्ट का मतलब यह नहीं है कि मुंबई या दिल्ली की खर्च करने की क्षमता कम हो गई है.

आबादी और ज्यादा कमाई वाले परिवारों की संख्या बहुत ज्यादा होने की वजह से यह देश के सबसे बड़े उपभोक्ता बाजारों में शामिल हैं.

बताया जा रहा है कि मुंबई में एक औसत परिवार की सालाना आय करीब 24.2 लाख रुपये है और वह करीब 14 लाख रुपये खर्च करता है.

दिल्ली-NCR में करीब 75 लाख परिवार हैं, जबकि मुंबई में करीब 46-47 लाख परिवार हैं. इसी बड़े परि

📡 स्रोत: ABP Live Vyapar

📰 पूरी खबर पढ़ें (ABP Live Vyapar पर जाएं)

💡 पृष्ठभूमि (Background)

भारत में बड़े शहरों के खर्च पर नई रिपोर्ट ने चौंकाने वाले आँकड़े पेश किये हैं, जिसमें चंडीगढ़ और तिरुवनंतपुरम ने मुंबई, दिल्ली और बेंगलुरु को पीछे छोड़ दिया है। यह विषय बताता है कि छोटे और मझोले शहरों की परिवारिक खर्च शक्ति बढ़ रही है, जिससे आर्थिक परिदृश्य में बदलाव आ रहा है। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह पारंपरिक मान्यताओं को चुनौती देती है और नीति निर्माताओं को क्षेत्रीय विकास योजनाओं पर पुनर्विचार करने के लिए प्रेरित करती है। आम जनता पर इसका असर यह हो सकता है कि निवेश, आवास और सेवाओं की मा

J
JKS News Desk

वॉयस ऑफ क्रांति की संपादकीय टीम आपके लिए भोपाल, मध्यप्रदेश और देश की सटीक और विश्वसनीय समाचार प्रस्तुत करती है।