खाते में जमा थे 2.47 करोड़ कैश, Income Tax ने पकड़ा, फिर कैसे कोर्ट में जीता दवा कारोबारी
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अक्सर किसी बैंक खाते में जब बड़ी रकम नकद के तौर पर जमा होती है, तो आयकर विभाग उस पैसे के स्रोत को लेकर सवाल पूछता है.
ऐसा ही एक मामला दिल्ली के एक दवा कारोबारी के साथ सामने आया, जिनके बैंक खातों में काफी बड़ी मात्रा में नकदी जमा हुई थी.
जिसके बाद आयकर विभाग ने इस रकम को लेकर उनसे जवाब मांगा, लेकिन अधिकारी ने कारोबारी के जवाब को स्वीकार नहीं किया गया.
इसके बाद यह मामला आगे बढ़कर आयकर अपीलीय न्यायाधिकरण (ITAT) तक पहुंचा, जहां कारोबारी को राहत मिल गई.
क्या था पूरा मामला?
यह मामला एक दवा की दुकान चलाने वाले कारोबारी से जुड़ा है, जिन्होंने अपने तीन सेविंग बैंक खातों में करीब 2.47 करोड़ रुपये की नकदी जमा की थी. आयकर विभाग ने इस रकम के स्रोत को लेकर सवाल पूछा.
कारोबारी ने बताया कि यह पैसा उनकी फार्मेसी में हुई बिक्री से हासिल हुआ था और बिक्री की रकम उनके बिजनेस रिकॉर्ड में दर्ज थी.
हालांकि, उन्होंने अपने दावे को सही साबित करने के लिए कई जरूरी डॉक्युमेंट भी अधिकारियों के सामने पेश किए.
इनमें ऑडिटेड बैलेंस शीट, प्रॉफिट एंड लॉस अकाउंट, बैंक स्टेटमेंट, VAT रिटर्न और बिक्री के बिल शामिल थे.
Income Tax विभाग ने क्यों नहीं माना जवाब?
Income Tax विभागने कारोबारी के जवाब को स्वीकार नहीं किया.
अधिकारी का कहना था कि बिजनेस के खर्चों को लेकर बैंक खातों में उसी तरह की डेबिट एंट्री दिखाई नहीं दे रही थी, जैसा कि खातों में दर्ज खर्चों से उम्मीद की जाती है.
इसके अलावा वेतन और बोनस के पेमेंट को लेकर भी सवाल उठाए गए. इसके बाद CIT(A) ने भी आयकर विभाग के आकलन को बरकरार रखा. आखिकार कारोबारी ने दिल्ली ITAT में अपील की.
ITAT ने कारोबारी के पक्ष में क्यों दिया फैसला?
दिल्ली ITAT ने पाया कि कारोबारी ने अपनी बिक्री से जुड़ी रकम का रिकॉर्ड पेश किया था.
बैंक स्टेटमेंट के जरिए नकद जमा और निकासी की जानकारी दी गई थी.
इसके अलावा ब
📡 स्रोत: ABP Live Vyapar