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कीचड़ में घुटनों तक धंसा रास्ता, किसानों-ग्रामीणों की मुश्किलें बरकरार; शिकायतों के बाद भी नगर परिषद के दावे सिर्फ आश्वासन तक!

लेखक: Shahrukh Khan अंतिम अपडेट: 1 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
कीचड़ में घुटनों तक धंसा रास्ता, किसानों-ग्रामीणों की मुश्किलें बरकरार; शिकायतों के बाद भी नगर परिषद के दावे सिर्फ आश्वासन तक!

खरगोन। जिले के बिस्टान नगर परिषद क्षेत्र के बन्हैर गांव में सिस्टम की लापरवाही अब ग्रामीणों और किसानों के लिए मुसीबत बनती नजर आ रही है। रोजमर्रा के आवागमन और सरकारी कुएं तक पहुंचने वाले रास्ते पर घुटनों तक कीचड़ जमा है।

हालात ऐसे हैं कि पैदल निकलना तो मुश्किल है ही, किसानों को बैलगाड़ी निकालने में भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार बैलगाड़ियां इसी कीचड़ में फंस चुकी हैं। बारिश के दिनों में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है।

इसके बावजूद नगर परिषद के जिम्मेदारों पर ग्रामीणों की परेशानी का कोई खास असर दिखाई नहीं दे रहा। किसानों और ग्रामीणों के मुताबिक, इस समस्या को लेकर नगर परिषद के जिम्मेदार अधिकारियों, अध्यक्ष और कर्मचारियों को कई बार अवगत कराया गया। लेकिन कार्रवाई के नाम पर अब तक सिर्फ आश्वासन ही मिले हैं।

अब सवाल सीधा है—अगर बारिश के दौरान इस रास्ते पर कोई बड़ा हादसा होता है, तो इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी? मामले की पड़ताल के लिए एक मीडियाकर्मी ने नगर परिषद अध्यक्ष डेमसिंह नार्वे से फोन पर चर्चा करने का प्रयास किया, लेकिन उनका फोन रिसीव नहीं हुआ। इसके बाद नगर परिषद के सीएमओ से चर्चा की गई।

उन्होंने कार्यालय में संबंधित व्यक्ति को कहने की बात कही। वहीं इंजीनियर सोनिका मंडलोई से चर्चा करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने स्थानीय लोगों से बात करने का हवाला दिया। हद तो तब नजर आई जब नगर परिषद कर्मचारी संतोष से सरकारी कुएं तक जाने वाले रास्ते को लेकर जानकारी ली गई।

बातचीत में उन्हें सरकारी कुएं की ही जानकारी नहीं होने की बात सामने आई। ऐसे में सवाल उठना लाजमी है कि जब जिम्मेदारों को समस्या और स्थान की ही जानकारी नहीं होगी, तो समाधान आखिर कैसे होगा? एक तरफ ग्रामीण कीचड़ से जूझ रहे हैं, दूसरी तरफ जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है।

शिकायतें हो चुकी हैं, अधिकारियों को जानकारी दी जा चुकी है, लेकिन जमीन पर हालात जस के तस दिखाई दे रहे हैं। अब बड़ा सवाल यही है कि आखिर नगर परिषद के जिम्मेदार कब जागेंगे? क्या ग्रामीणों को इसी तरह कीचड़ के बीच अपने रोजमर्रा के काम करने को मजबूर रहना पड़ेगा?

या फिर खबर सामने आने के बाद जिम्मेदार मौके पर पहुंचकर कोई ठोस समाधान करेंगे? क्योंकि फिलहाल हालात यही कह रहे हैं— सरदर्द बने सिस्टम को अब दीमक लगती नजर आ रही है।

अब देखना दिलचस्प होगा कि खबर प्रसारित होने के बाद नगर परिषद इस समस्या के समाधान के लिए ठोस कदम उठाती है या फिर निरीक्षण, मौका-मुआयना और कागजी कार्रवाई का वही पुराना खेल दोहराया जाता है।

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Shahrukh Khan

शाहरुख खान — खरगोन संवाददाता शाहरुख खान वॉइस ऑफ क्रांति के लिए खरगोन जिले से स्थानीय और महत्वपूर्ण खबरें उपलब्ध कराते हैं। वे क्षेत्र की जनसमस्याओं, स्थानीय घटनाओं और जनसरोकार से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से कवर करते है