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किरण रिजिजू बोले- नहीं पता था ये इतने खतरनाक हैं:नसीरुद्दीन शाह के बयान पर कसा तंज, कहा- उनके असली चरित्र का देर से पता चला

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 29 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
किरण रिजिजू बोले- नहीं पता था ये इतने खतरनाक हैं:नसीरुद्दीन शाह के बयान पर कसा तंज, कहा- उनके असली चरित्र का देर से पता चला

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने एक्टर नसीरुद्दीन शाह के ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान की आलोचना की है। उन्होंने कहा कि वह अब तक नसीरुद्दीन शाह को केवल एक कलाकार के रूप में जानते थे, लेकिन उन्हें नहीं पता था कि उनकी सोच ऐसी है। गुरुवार को दिल्ली में मीडिया से बातचीत में रिजिजू ने कहा- मुझे नहीं पता था कि नसीरुद्दीन शाह की सोच इस तरह की है।

मैं उन्हें सिर्फ एक कलाकार समझता था। मुझे लगता था कि वह एक अच्छे और सभ्य कलाकार हैं। लेकिन अब पता चला कि वह खुद भी मानसिक रूप से नक्सल हैं।” इससे पहले बुधवार को रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी नसीरुद्दीन शाह की आलोचना की थी। उन्होंने लिखा था कि वह शाह को एक साधारण अभिनेता समझते थे और उनका सम्मान करते थे, लेकिन उन्हें नहीं पता था कि वह एक खतरनाक शहरी ‘दिमागी नक्सल’ हैं।

अशोक पंडित ने कहा- शाह का यह व्यवहार उनकी छवि को नुकसान पहुंचा रहा है फिल्म निर्माता अशोक पंडित ने भी नसीरुद्दीन शाह के बयान की आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि शाह अपनी हताशा और असुरक्षा की भावना के कारण इस तरह की भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं। उनका सार्वजनिक व्यवहार उनकी छवि को नुकसान पहुंचा रहा है।

पंडित ने कहा कि कैमरे पर शाह के व्यवहार से उनकी हताशा दिखाई देती है। उन्होंने यह भी कहा कि अभिनेता को मनोचिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए। ये अशोक पंडित के आरोप और निजी टिप्पणियां हैं। नसीरुद्दीन शाह ने क्या कहा था?

नसीरुद्दीन शाह ने मंगलवार को अपने फेसबुक अकाउंट पर एक वीडियो शेयर किया, जिसमें वे कहते हैं- "मैं फख्र के साथ कहता हूं, मैं दिमागी नक्सल हूं। दिमागी नक्सल के अलावा मालूम नहीं क्या-क्या लकब (उपनाम) दिए हैं चौकीदार ने मुझ जैसे लोगों को, एंटी-नेशनल, टुकड़े-टुकड़े गैंग और मालूम नहीं क्या-क्या।" उन्होंने आगे कहा, "टुकड़े-टुकड़े गैंग अगर इस मुल्क में कोई है, तो वो ये नाजायज हुकूमत है और मैं इस हुकूमत से एक सवाल पूछना चाहता हूं। और क्या-क्या करोगे तुम?

हमारे मुल्क के नौजवानों की हिम्मत को तोड़ने के लिए, शिक्षा संस्थानों को बर्बाद करने के लिए और हमारे लोकतंत्र को खतरे में डालने के लिए, कितना करोगे?

तुम और तुमने अपने इर्द-गिर्द जो बेवकूफ, बेईमानों की पलटन इकट्ठी की है, कहां तक जाओगे?" उन्होंने यह भी कहा कि पहले जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU), फिर सत्यजीत रे फिल्

📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

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