कीर्ति सिंह द्वारा रचित पुस्तक 'अप्सराएँ: सम्मोहन से परे' का भव्य विमोचन
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बीएचईएल में कार्यरत लेखिका कीर्ति सिंह द्वारा रचित नवीन पुस्तक 'अप्सराएँ: सम्मोहन से परे' का गरिमामयी समारोह में भव्य विमोचन संपन्न हुआ।
इस साहित्यिक उत्सव में ऑल इंडिया बीएचईएल एम्प्लॉईज यूनियन के महासचिव रामनारायण गिरी एवं यूनियन के सदस्य सी के शर्मा विशाल वाणी आशीष सोनी धर्मेंद्र गुप्ता दीपक चौरसिया संजीब नंदा उपस्थित रहे।
पुस्तक पर चर्चा करते हुए ऐबु यूनियन के महासचिव रामनारायण गिरी ने कहा कि कीर्ति सिंह की यह कृति पौराणिक और सांस्कृतिक संदर्भों को एक नए और आधुनिक दृष्टिकोण से प्रस्तुत करती है।
यह पुस्तक केवल सम्मोहन या सौंदर्य की पारंपरिक धारणाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि उससे परे जाकर अप्सराओं के अस्तित्व, उनके मानसिक द्वंद्व और उनके बहुआयामी व्यक्तित्व की गहराई को उजागर करती है।यूनियन के सभी साथियो ने पुस्तक का अध्ययन किया एवं समीक्षा की पुस्तक की विषय वस्तु लेखन शैली एवं समाज पर होने वाले सकारात्मक प्रभाव जैसे उच्च श्रेणी के लेखन की सराहना की
विमोचन के अवसर पर लेखिका कीर्ति सिंह ने अपनी रचना प्रक्रिया के अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि इस पुस्तक को लिखने का मुख्य उद्देश्य अप्सराओं से जुड़े सदियों पुराने मिथकों और रूढ़िवादिता को तोड़ना है। उन्होंने कहा, "अप्सराएँ केवल आकर्षण का केंद्र नहीं थीं, बल्कि वे कला, बुद्धि और स्वतंत्रता का प्रतीक थीं।
यह पुस्तक उनके इसी अनदेखे और सशक्त पहलू को पाठकों के सामने लाती है।" समारोह में उपस्थित सभी साथियो ने पुस्तक की भाषा शैली, गहन शोध और प्रवाहपूर्ण लेखन की भूरि-भूरि प्रशंसा की। वक्ताओं के अनुसार, यह पुस्तक समकालीन साहित्य में एक महत्वपूर्ण योगदान सिद्ध होगी और पाठकों को एक नया दृष्टिकोण प्रदान करेगी।
कार्यक्रम के अंत में सभी अतिथियों और आगंतुकों का आभार व्यक्त किया। इस किताब को अमेज़न की वेबसाइट या ऐप के माध्यम से आसानी से प्राप्त किया जा सकता है।
💡 पृष्ठभूमि (Background)
किरति सिंह, बीएचईएल की लेखिका, ने अपनी नवीनतम पुस्तक ‘अप्सराएँ: सम्मोहन से परे’ का भव्य विमोचन कराया। यह पुस्तक भारतीय लोककथाओं और मनोविज्ञान के संगम पर आधारित है, जिसमें परियों की कथाओं को वैज्ञानिक दृष्टिकोण से समझाया गया है। यह कार्यक्रम बीएचईएल के कर्मचारियों और यूनियन के प्रमुखों के लिए एक सांस्कृतिक प्रेरणा का स्रोत बना, जिससे कार्यस्थल पर रचनात्मकता और समर्पण को बढ़ावा मिला। इस तरह की साहित्यिक पहल आम जनता को पारंपरिक कथाओं के साथ आधुनिक विज्ञान के मेल को समझने का अवसर देती है, जिससे सांस