किसान भाइयों ने आधुनिक नर्सरी से बनाई पहचान, दूसरे राज्यों तक पहुंच रही फूलों और सब्जियों की पौध
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वर्ष 2017-18 में कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों के संपर्क में आने से दोनों भाइयों को खेती को नई दिशा देने का अवसर मिला। विभागीय प्रशिक्षण कार्यक्रमों में उन्होंने उन्नत कृषि तकनीक, नर्सरी प्रबंधन और पौध उत्पादन की बारीकियां सीखीं। वर्ष 2018 में अपने खेत पर दो हजार वर्गफीट क्षेत्र में पॉलीहाउस नर्सरी स्थापित की और लगभग 10 हजार पौधों से काम शुरू किया।
शुरुआत आसान नहीं थी। पौधों को तैयार करने के लिए पानी की उपलब्धता सबसे बड़ी चुनौती बनी। दोनों भाइयों ने हिम्मत बनाए रखी और कुएं की खुदाई कर जल स्रोत विकसित किया। इसके बाद सिंचाई सुविधाओं का क्रमिक विस्तार किया। आज उनकी आठ एकड़ भूमि पूरी तरह सिंचित है।
प्रशिक्षण से मिली जानकारी को दोनों भाइयों ने अपने काम में उतारा और उत्पादन बढ़ाते गए। वर्ष 2024 में लगभग 45 लाख रुपये के ऋण से नर्सरी के विस्तार को गति मिली। वर्तमान में लगभग दो एकड़ क्षेत्र में संचालित नर्सरी में कुल चार हजार वर्गमीटर क्षेत्र में दो पॉलीहाउस स्थापित हैं। यहां गुलाब, जरबेरा और गेंदा सहित विभिन्न फूलों की पौध के साथ बैंगन, टमाटर, मिर्च, गिलकी, लौकी और खीरे जैसी सब्जियों के हाइब्रिड पौधे तैयार किए जाते हैं।
लगभग 10 हजार पौधों से शुरू हुआ यह उद्यम अब प्रतिमाह करीब 15 लाख पौधों के उत्पादन तक पहुंच गया है। नर्सरी के विस्तार का लाभ आसपास के ग्रामीण परिवारों को भी मिला है। यहां 15 से 20 लोगों को रोजगार मिल रहा है। दोनों भाइयों की मेहनत से विकसित यह उद्यम अब मध्यप्रदेश के साथ महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और राजस्थान के किसानों तक पौध पहुंचा रहा है।
कारोबार बढ़ाने में डिजिटल माध्यमों की भी भूमिका रही है। सोशल मीडिया और मोबाइल के जरिए किसान उनसे संपर्क कर पौध मंगाते हैं। इस तरह गांव में स्थापित नर्सरी को व्यापक बाजार से जुड़ने का अवसर मिला है।
हेमंत कुशवाह बताते हैं कि कृषि एवं उद्यानिकी विभाग के प्रशिक्षण, शासकीय योजनाओं के सहयोग और आधुनिक तकनीकों को अपनाने से उनके व्यवसाय को आगे बढ़ाने में मदद मिली। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में संचालित किसान हितैषी योजनाओं के प्रति आभार व्यक्त किया।
रतुआ रतनपुर के इन किसान भाइयों ने छोटे स्तर पर शुरुआत की, कठिनाइयों का समाधान खोजा और सीखने का सिलसिला जारी रखा। आज उनकी नर्सरी में तैयार होता हर पौधा खेती से उद्यम और उद्यम से रोजगार तक बढ़ते इसी सफर की पहचान है।
💡 पृष्ठभूमि (Background)
किसान भाइयों ने आधुनिक नर्सरी के जरिए अपने खेत को नया रूप दिया, जिससे फूलों और सब्जियों की पौधों की बिक्री दूसरे राज्यों तक पहुंच रही है। यह विषय कृषि में तकनीकी उन्नति और ग्रामीण उद्यमिता का संगम है। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह दिखाती है कि सरकारी प्रशिक्षण कार्यक्रमों और नर्सरी प्रबंधन से किसानों की आय में वृद्धि संभव है। इससे आम जनता पर सकारात्मक असर पड़ेगा, जैसे कि ताजे और सस्ते पौधे उपलब्ध होंगे, रोजगार के नए अवसर बनेंगे और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में सुधार होगा।
🎙️ वॉयस ऑफ क्रांति का मत
किसान भाइयों की कहानी हमें सिखाती है कि ज्ञान और धैर्य से किसी भी कठिनाई को पार किया जा सकता है। आधुनिक नर्सरी और प्रशिक्षण ने उन्हें नई दिशा दी, जिससे उनकी मेहनत फलदायी हुई। समाज में भी अगर कोई विवाद हो तो संवाद, कानूनी मार्ग और संयम से समाधान ढूंढना चाहिए। यह संदेश हमें याद दिलाता है कि संघर्ष के बावजूद आशा और परिश्रम से सफलता संभव है।