राजनीति

किसान की फसल सूख रही, सरकार किसानों को रोकने के लिए ‘दिल्ली मॉडल’ की किलेबंदी सीख रही: जीतू पटवारी

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 5 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
किसान की फसल सूख रही, सरकार किसानों को रोकने के लिए ‘दिल्ली मॉडल’ की किलेबंदी सीख रही: जीतू पटवारी

कम बारिश, सिंचाई और बिजली संकट से खरीफ फसल पर असर; रबी की बोवनी को लेकर भी कांग्रेस ने उठाए सवाल

भोपाल, 5 अक्टूबर। मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रदेश में किसानों की स्थिति को लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश का किसान कम बारिश, फसल संकट, सिंचाई और बिजली की समस्या तथा फसलों का उचित मूल्य नहीं मिलने जैसी चुनौतियों का सामना कर रहा है, जबकि सरकार किसानों की समस्याओं के समाधान के बजाय संभावित आंदोलन को रोकने की तैयारी कर रही है।

पटवारी ने कहा कि जुलाई में हुए मूंग आंदोलन के बाद सरकार किसानों के लोकतांत्रिक विरोध को लेकर चिंतित है और राजधानी भोपाल में किसानों को रोकने की रणनीति तैयार की जा रही है। उन्होंने दावा किया कि दिल्ली किसान आंदोलन के दौरान अपनाई गई व्यवस्थाओं का अध्ययन कर इंटेलिजेंस स्तर पर रिपोर्ट तैयार की गई है और भोपाल के 16 प्रमुख प्रवेश एवं निकास बिंदुओं पर कंक्रीट ब्लॉक, कंटेनर, कंटीले तार, अस्थायी बैरिकेडिंग और कंटेनमेंट जोन बनाए जाने की तैयारी है।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि सरकार को किसानों के लिए 16 एंट्री प्वाइंट पर बैरिकेडिंग करने के बजाय 16 संभाग स्तरीय किसान समाधान केंद्र बनाने चाहिए। उन्होंने कहा कि किसान अपनी समस्याएं लेकर राजधानी आए तो सरकार को उनकी बात सुननी चाहिए, उन्हें रोकने की रणनीति नहीं बनानी चाहिए।

पटवारी ने कहा कि 1 जून से 30 सितंबर 2026 के बीच प्रदेश में 908.4 मिलीमीटर वर्षा दर्ज हुई, जबकि सामान्य वर्षा 949.5 मिलीमीटर है। उनके अनुसार पश्चिमी मध्यप्रदेश में सामान्य से करीब 11 प्रतिशत कम बारिश हुई है। उन्होंने इंदौर संभाग में सामान्य औसत 952.20 मिलीमीटर के मुकाबले 639.70 मिलीमीटर बारिश होने का दावा करते हुए कहा कि यहां लगभग 33 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज हुई है।

उन्होंने कहा कि कम बारिश के कारण कृषि विभाग को आकस्मिक कार्ययोजना तैयार करनी पड़ रही है। दूसरी ओर, जिन किसानों के पास सिंचाई के साधन हैं, उन्हें पर्याप्त बिजली नहीं मिलने की शिकायतें हैं। पटवारी ने नहरों की स्थिति पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि विधानसभा रिकॉर्ड के अनुसार संजय सरोवर परियोजना की करीब 40 वर्ष पुरानी कच्ची नहरें क्षतिग्रस्त हैं। उन्होंने पेंच व्यपवर्तन परियोजना के टेल एंड तक पानी पहुंचाने की समय-सीमा नवंबर 2027 बताए जाने पर भी सवाल उठाए।

पटवारी ने कहा कि किसानों को वर्तमान फसल के लिए पानी की जरूरत है, जबकि सरकार की योजनाओं की समय-सीमा भविष्य की तारीखों तक जा रही है। उन्होंने इसे किसानों की समस्याओं के प्रति संवेदनहीनता बताया।

भावांतर योजना को लेकर पटवारी ने कहा कि सरकार ने 3 से 17 अक्टूबर 2026 तक पंजीयन की व्यवस्था की है। उन्होंने मांग की कि यह प्रक्रिया केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित न रहे और किसानों को उनकी उपज का वास्तविक लाभ मिले। उन्होंने MSP और बाजार भाव के अंतर की भरपाई प्रभावी तरीके से सुनिश्चित करने की मांग की।

कांग्रेस ने सरकार के सामने पांच प्रमुख मांगें रखीं। इनमें कम बारिश और फसल नुकसान वाले 30 जिलों में तत्काल विशेष गिरदावरी कराकर उचित मुआवजा देना, सोयाबीन सहित प्रमुख फसलों के लिए घोषित MSP सुनिश्चित करना, रबी सिंचाई के लिए बांधों और नहरों से पानी छोड़ने का स्पष्ट रोस्टर सार्वजनिक करना, खराब ट्रांसफार्मरों को 48 घंटे में बदलना तथा कृषि फीडरों पर 10 से 12 घंटे थ्री-फेज बिजली उपलब्ध कराना शामिल है।

कांग्रेस ने किसानों के शांतिपूर्ण आंदोलन और राजधानी में प्रवेश को रोकने के लिए प्रस्तावित बैरिकेडिंग एवं कंटेनमेंट जोन की योजना को भी रद्द करने की मांग की।

पटवारी ने कहा कि मध्यप्रदेश के किसानों को बैरिकेड नहीं, बाजार चाहिए; कंटेनर नहीं, सिंचाई का पानी चाहिए और पुलिस का पहरा नहीं, बल्कि फसल का पूरा दाम चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार किसानों की आवाज दबाने और उनके लोकतांत्रिक आंदोलन को रोकने का प्रयास करती है, तो कांग्रेस किसानों के साथ खड़ी रहेगी और सड़क से सदन तक उनकी आवाज उठाएगी।

💡 पृष्ठभूमि (Background)

किसानों की फसल सूखने की समस्या और सरकार द्वारा ‘दिल्ली मॉडल’ की किलेबंदी सीखने की बात पर चर्चा हो रही है। यह विषय कृषि संकट और सरकारी नीतियों की प्रभावशीलता पर प्रकाश डालता है। खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह किसानों की आर्थिक कठिनाई और सरकार की नीतिगत जवाबदेही को उजागर करती है। यदि सरकार की योजनाएँ असफल रहती हैं तो किसानों की आय घटेगी, ग्रामीण बेरोजगारी बढ़ेगी और खाद्य कीमतों पर भी असर पड़ेगा, जिससे आम जनता को जीवनयापन में चुनौतियाँ होंगी।

M
Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।