किसान कल्याण के लिए गौपालन एवं जैविक खेती को बढ़ावा देना आवश्यक : उद्यानिकी मंत्री कुशवाह
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गौमाता का गोबर खेती के लिए अत्यंत उपयोगी प्राकृतिक खाद है। इसका उपयोग करने से मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने और खेती को अधिक टिकाऊ बनाने में मदद मिलती है। हम सभी को जैविक खेती की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने यह बात भोपाल स्थित आईसीएआर, नवीबाग, बैरसिया रोड पर दिल्ली प्रेस द्वारा आयोजित ‘फार्म फूड कृषि सम्मान अवार्ड 2026 – मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़’ कार्यक्रम में कही। कार्यक्रम में कृषि एवं किसान कल्याण के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले किसानों को सम्मानित किया गया।
मंत्री श्री कुशवाह ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा प्रारंभ किए गए नदी जोड़ो अभियान को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आगे बढ़ाने का कार्य कर रहे हैं। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी निरंतर कृषि क्षेत्र के विकास एवं किसान कल्याण के लिए प्रयासरत हैं। प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2026 को कृषक कल्याण वर्ष घोषित करना कृषि क्षेत्र को नई दिशा देने और किसानों की समृद्धि के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
किसान आर्थिक रूप से सशक्त बनें, उनकी आय में वृद्धि हो तथा कृषि क्षेत्र नई ऊंचाइयों को प्राप्त करे। अन्नदाता किसानों का सम्मान उनके अथक परिश्रम, समर्पण और राष्ट्र निर्माण में उनके अमूल्य योगदान के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का महत्वपूर्ण अवसर है।
💡 पृष्ठभूमि (Background)
कृषि में गौपालन और जैविक खेती को बढ़ावा देने की बात उद्यानिकी मंत्री कुशवाह ने की है। यह विषय किसानों के लिए प्राकृतिक खाद के रूप में गोबर के उपयोग और सतत खेती पर केंद्रित है। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि यह किसानों को पर्यावरण अनुकूल और लागत-प्रभावी कृषि तरीकों की ओर प्रेरित करती है, जिससे मिट्टी की उर्वरता और फसल उत्पादन में सुधार संभव है। आम जनता पर इसका असर यह हो सकता है कि खाद्य उत्पादन स्वच्छ और स्वास्थ्यवर्धक बनेगा, साथ ही किसानों की आय में स्थिरता और ग्रामीण रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
🎙️ वॉयस ऑफ क्रांति का मत
गौमाता के गोबर से मिट्टी को पोषित करके जैविक खेती को अपनाना न केवल पर्यावरण की रक्षा करता है, बल्कि किसानों की आजीविका को भी सुदृढ़ करता है। जब प्राकृतिक संसाधनों का सही उपयोग होता है, तो हमें किसी भी विवाद या असहमति में हिंसा की आवश्यकता नहीं पड़ती; संवाद और वैज्ञानिक तरीकों से समाधान खोजें। यह कदम हमें स्वच्छ, स्वस्थ और आत्मनिर्भर समाज की ओर ले जाता है, जहाँ हर किसान अपनी भूमि से प्रेम और सम्मान के साथ जुड़ता है।