किशनगंज एयरपोर्ट एक्सटेंशन–27 एकड़ जमीन का अधिग्रहण, परिवारों का दर्द:सलमा बोलीं- 20 लाख खर्च घर बनाया...उजाड़ देंगे; हम भी भारत के नागरिक, कहां जाएंगे
‘हमारे पास जमीन नहीं बचेगी तो रहेंगे कहां, खेती करेंगे कहां और बच्चों को खिलाएंगे क्या? सरकार पैसा देगी, वह दो-चार साल में खत्म हो जाएगा, जमीन रहेगी तो पीढ़ियां चलेंगी। एक-एक कर सरकार हमारी सारी जमीन ले रही है।
इससे बेहतर तो सरकार हम ग्रामीणों की गोली मारकर हत्या कर दे और सारी जमीन हड़प ले...’ ये उन परिवारों का दर्द है, जिनका घर और जमीन दोनों ही सरकार सेना के एयरपोर्ट को बड़ा करने के लिए ले रही है। किसी ने विदेश में रहकर सालों तक मेहनत कर जमीन खरीद कर घर बनाया तो किसी की पीढ़ियों से चली आ रही पुश्तैनी जमीन है।
सभी परिवार का एक ही सवाल है- अगर जमीन चली गई तो हम जाएंगे कहां? सबसे पहले जानिए...27 एकड़ जमीन क्यों ली जा रही है दरअसल, 2026 में केंद्र सरकार ने किशनगंज के खगड़ा में पहले से मौजूद सेना के एयरपोर्ट को विस्तार का ऐलान किया था। इसके लिए 27 एकड़ जमीन अधिग्रहित होनी है।
इसके प्रोसेस के लिए सिविल एविएशन डिपार्टमेंट ने 5 करोड़ 45 लाख 97 हजार 100 रुपए की प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति दी है। इस मामले में करीब 2 महीने पहले 20 से ज्यादा प्रभावित परिवारों को DM की तरफ से नोटिस भेजा गया था। इसमें परिवारों से कहा गया था- आपको अपना घर खाली करना होगा। आपकी जमीन अब सरकार के हवाले होगा।
इसको लेकर आपलोगों को मुआवजा दिया जाएगा। दैनिक भास्कर की टीम उस जगह पर पहुंची, जहां ये परिवार वर्षों से रह रहे हैं। किस परिवार की कितनी जमीन जा रही है, कितना पैसा मिल रहा है?
घर के बदले क्या मिलेगा...पढ़िए ग्राउंड रिपोर्ट... ‘खेती-घर मिलाकर एक इंच भी नहीं बचेगा, हम इसी देश के नागरिक हैं’ किशनगंज के खगड़ा के वार्ड-33 में रहने वाले मोहम्मद मंजर ने बताया, ‘मेरी खेती और घर की जमीन मिलाकर अधिग्रहण के बाद एक इंच जमीन भी नहीं बचेगी। जिस जमीन पर परिवार पीढ़ियों से रहता आ रहा है और खेती करता आया है।
वह अब सरकार के कब्जे में चली जाएगी।’ मंजर कहते हैं, 'परिवार की जमीन कोई हाल में खरीदी हुई संपत्ति नहीं है। यह पुश्तैनी जमीन है। हमारे पूर्वज 200 साल से इस जमीन पर घर बनाकर रह रहे हैं। मेरा एक ही सवाल है, अगर सरकार एयरपोर्ट और BSF जैसे प्रोजेक्ट के लिए आम लोगों से जमीन लेती है तो हमारे लिए भी सरकार अपनी जमीन दे।
जमीन के बदले जमीन का सौदा करे। सरकार हमें ऐसी जगह जमीन दे, जहां परिवार के पास रोजगार और खेती दोनों का साधन हों।' मंजर ने आगे बताया, 'हमलोगों से पहले भी जमीन ली गई थी। उस समय कागज-पत्र और अन्य प्रक्रिया के जरिए जमीन ले ली गई, लेकिन उसका उचित मुआवजा नहीं मिला। अब फिर जमीन लेने की बात हो रही है।
अगर सरकार जमीन लेती है तो इस बार पुराने मामलों का भी उचित मुआवजा मिलना चाहिए। हमलोग अपनी जमीन आसानी से नहीं देंगे। इसके लिए सरकार के सामने अपनी मांग रखेंगे। जरूरत पड़ी तो लोकतांत्रिक तरीके से विरोध भी करेंगे। आखिर जमीन चली गई तो यहां रहने वाले हजारों लोगों का भविष्य क्या होगा, सरकार को इसका जवाब देना होगा।
हम इसी देश और इसी गांव के नागरिक हैं। हमारे पास जमीन का खतियानी दस्तावेज भी है।
हमें किसी बाहरी या दूसरे देश से आकर बसे व्यक्ति की तरह नहीं देखा जाना चाहिए।' ‘विकास-सुरक्षा के नाम पर गरीबों की जमीन जा रही, सरकार इसका जवाब दे’ स्थानीय निवासी आलम ने बताया, 'मेरे परिवार की जमीन का बड़ा हिस्सा पहले ही अलग-अलग सरकारी परियोजनाओं में जा चुका है। सबसे पहले पुराने एयरपोर्ट के लिए जमीन गई।
इसके बाद BSF और अन्य परियोजनाओं के लिए भी जमीन ली गई। अब जो थोड़ी जमीन बची है, वह एयरपोर्ट विस्तार के लिए अधिग्रहण में जा रही है। अब हमारे पास जो जमीन है, उसी से बच्चों की पढ़ाई और परिवार का खर्च चलता है। अगर यह भी चली गई तो बच्चों को पढ़ाना-लिखाना मुश्किल हो जाएगा। मेरी अलग-अलग जगह पर जमीन है।
कहीं करीब 5 डिसमिल तो कहीं 10 डिसमिल...कुछ हिस्से में घर भी बने हुए हैं।
एक प्लॉट बच्चों के भविष्य के लिए रखा गया था।' उन्होंने आगे कहा, 'मैं समझता हूं कि देश की सुरक्षा जरूरी है और मैं इसके खिलाफ नहीं हूं, लेकिन विकास और सुरक्षा के नाम पर गरीब परिवारों की पूरी जमीन चली जाए तो उनके जीवन का क्या होगा, इसका जवाब भी सरकार को देना चाहिए। ‘पैसा आज मिलेगा, कल खत्म हो जाएगा; जमीन रहेगी तो बच्चे भी रहेंगे’ वहीं, ग्रामीण मोहम्मद फारूक का सवाल है, अगर सरकार 10 लाख रुपए या कोई अन्य मुआवजा देती है तो वह पैसा कितने दिन चलेगा?
कुछ साल बाद वह खत्म हो जाएगा, लेकिन जमीन रहने पर परिवार खेती कर सकता है और आने वाली पीढ़ी भी उसी पर निर्भर रह सकती है। वार्ड नंबर 33 के निवासी सद्दाम के अनुसार, इस इलाके में करीब 15 से 20 परिवारों की जमीन प्रभावित हो रही है।
मेरी करीब 9.5 कट्ठा जमीन अधिग्रहण की जद में आने की बात है, जबकि मेरे चाचा की करीब 5.5 कट्ठा जमीन। छह भाई और एक बहन के परिवार ने मेहनत-मजदूरी करके जमीन खरीदी थी। मकसद था कि इसी जमीन पर घर बनाया जाए, लेकिन घर बनाने से पहले एयरपोर्ट विस्तार के लिए सरकार जमीन ले रही है।
हमारे इलाके में करीब 20 साल बाद सड़क का काम शुरू हुआ था। लोगों को उम्मीद थी कि सड़क बनने से आवागमन आसान होगा, लेकिन अब प्रस्तावित एयरपोर्ट विस्तार के कारण लोगों को डर है कि सड़क और जमीन दोनों ही चली जाएगी।
अगर प्रस्तावित हिस्से में जमीन चली गई तो खेती की जमीन तक आने-जाने का रास्ता भी प्रभावित हो सकता है। ‘आवासीय जमीन को विकासशील बताकर नोटिस दिया’ सद्दाम सहित कई लोगों का दावा है कि उन्होंने जमीन आवासीय उपयोग के लिए खरीदी और रजिस्ट्री कराई थी, लेकिन अधिग्रहण से जुड़े नोटिस में उसे विकासशील की कैटेगरी में दिखाया गया है।
किशनगंज शहर के वार्ड 33 में रहने वाली यासमीन ने बताया, जिस जमीन पर मेरा घर बना है, वह आवासीय जमीन है। हमने 2019 में घर बनाया था। अब एयरपोर्ट विस्तार के लिए जमीन लिए जाने की बात सामने आई है। हमारे पास दूसरी जमीन नहीं है। अगर यह जमीन और मकान चला गया तो परिवार कहां रहेगा।
जमीन खरीदते समय रजिस्ट्री और म्यूटेशन की प्रक्रिया पूरी की थी। अब अधिग्रहण के दौरान जमीन की कैटेगरी को लेकर सवाल खड़ा हो रहा है। विदेश से लौटे, 10 कट्ठा जमीन खरीदी, नया घर बनाया, अब नोटिस गुलजार ने बताया, मैं करीब 6 साल तक विदेश में रहा। सऊदी अरब और दुबई में कंस्ट्रक्शन लाइन में काम किया।
विदेश में परिवार से दूर रहकर कमाई की और वापस लौटने के बाद रहने के लिए सड़क किनारे करीब 10 कट्ठा जमीन खरीदी। करीब चार साल पहले घर बनाना शुरू किया। अब घर का निर्माण लगभग छत तक पहुंचा था, इससे पहले ही एयरपोर्ट विस्तार के लिए जमीन अधिग्रहण का नोटिस मिल गया।
गुलजार का कहना है कि सड़क किनारे जमीन की बाजार कीमत स्थानीय स्तर पर कई लाख रुपए प्रति कट्ठा बताई जा रही है, लेकिन अलग-अलग लोगों से मुआवजे को लेकर कम राशि की बात कही जा रही है। अगर बाजार में जमीन महंगी है तो कम मुआवजे में गरीब परिवार दोबारा जमीन कैसे खरीदेगा? सलमा ने बताया, हमने घर बनाने में 20 लाख रुपए खर्च किए।
अभी एक साल भी पूरा नहीं हुआ है। घर का निर्माण और अन्य काम अभी चल ही रहा था कि जमीन अधिग्रहण होने जा रहा है। मेरे पास दूसरी जमीन भी नहीं है। अगर ये घर टूट गया तो मेरा परिवार कहां रहेगा?
शाहरुख बोले- ‘सब ले लेगा सरकार तो आदमी के पास बचेगा क्या?’ स्थानीय निवासी शाहरुख ने नाराजगी जताते हुए कहा, इलाके में पहले भी फायरिंग रेंज, BSF और एयरपोर्ट के लिए जमीन ली गई है। अब फिर जमीन अधिग्रहण की बात हो रही है। अगर हर परियोजना के लिए स्थानीय लोगों की जमीन ली जाती रही है तो गरीब परिवारों के पास क्या बचेगा?
BSF दे रही 8 एकड़ जमीन किशनगंज के जिलाधिकारी नवीन कुमार के मुताबिक, एयरपोर्ट निर्माण के लिए 27 एकड़ भूमि की जरूरत है। इसमें से अब तक 24.70 एकड़ भूमि की पहचान कर ली गई है, जबकि करीब 3 एकड़ भूमि का चिन्हित करना बाकी है। प्रस्तावित एयरपोर्ट की जमीन के पूर्वी हिस्से में BSF की करीब 8 एकड़ भूमि शामिल है।
इस जमीन का हस्तांतरण किया जाना है। इसके अलावा जरूरी बचे जमीन रैयतों से अधिग्रहित की जाएगी। भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेजी से चल रही है और प्रशासन की कोशिश है कि इसे जल्द पूरा किया जाए।
डीएम के अनुसार, अगर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तय समय में पूरी होती है तो अक्टूबर 2026 तक एयरपोर्ट के रन-वे निर्माण का काम शुरू होने की उम्मीद है। किशनगंज एयरपोर्ट के विस्तार का कब लिया गया था फैसला? किशनगंज के खगड़ा एयरपोर्ट के रनवे को विस्तार देने की प्रक्रिया तेज हो गई है।
मई 2026 में बिहार सरकार के सिविल एविएशन डिपार्टमेंट ने रन-वे विस्तार के लिए 24.70 एकड़ जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की। इसके बाद 27 एकड़ जमीन अधिग्रहण की बात सामने आई थी। इसके लिए 5.45 करोड़ से अधिक की प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति दी गई। हालांकि, अभी तक 24 एकड़ जमीन एक्वायर कर लिया गया है। अभी 3 एकड़ जमीन बाकी है।
रनवे में क्या बदलाव होगा? रनवे को बड़ा करने का फैसला सिर्फ लंबाई बढ़ाना नहीं है, बल्कि एयरपोर्ट की तकनीकी क्षमता को बेहतर करना है। एक रिपोर्ट के मुताबिक योजना में रनवे की लंबाई में करीब 700 मीटर तक विस्तार और चौड़ाई बढ़ाने की जरूरत बताई गई है। इसके लिए अलग-अलग हिस्सों में जमीन की जरूरत तय की गई है।
मौजूदा परियोजना डिटेल्स के अनुसार रनवे को पूर्वी तरफ 700 मीटर लंबा और 100 मीटर चौड़ा करने की प्लानिंग है। इसके लिए करीब 17.29 एकड़ जमीन की जरूरत बताई गई है। वहीं, पश्चिमी तरफ रन-वे को 300 मीटर लंबा और 100 मीटर चौड़ा किया जाना है। इसके लिए करीब 7.41 एकड़ जमीन का अधिग्रहण प्रस्तावित है।
यानी रन-वे के विस्तार से उसकी लंबाई में करीब हजार मीटर की बढ़ोतरी का प्रस्ताव है। जमीन अधिग्रहण में तेजी क्यों? किशनगंज की लोकेशन इस प्रोजेक्ट को सामान्य एयरपोर्ट विस्तार से ज्यादा रणनीतिक बनाती है। किशनगंज भारत के चिकेन नेक यानी सिलीगुड़ी कॉरिडोर के बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र के पास है।
जुलाई 2026 की रिपोर्टों में रन-वे विस्तार के लिए जमीन अधिग्रहण को रणनीतिक सुरक्षा और चिकेन नेक की सुरक्षा से भी जोड़कर देखा गया है। क्या किशनगंज में एयरफोर्स की पहले से दिलचस्पी रही है? 2018 में एयरफोर्स की पांच सदस्यीय टीम किशनगंज एयरपोर्ट पहुंची थी।
टीम ने एयरपोर्ट और उसके आसपास की एयरफोर्स की पुरानी जमीन का निरीक्षण किया था। उस समय रिपोर्ट में बताया गया था कि 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान एयरफोर्स की किशनगंज में जमीन थी और उसकी स्थिति का जायजा लिया जा रहा था। हालांकि, 8 साल बाद जो विस्तार हो रहा है ये उसका कारण नहीं माना जा सकता है।
📡 स्रोत: NewsData.io