किशाऊ बांध समझौते में हिमाचल के जल अधिकारों से समझौते का आरोप, मुख्यमंत्री जवाब दें: बलदेव तोमर
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सितंबर 22, शिमला (हिमाचल प्रदेश): भाजपा प्रदेश प्रवक्ता बलदेव तोमर ने किशाऊ बांध परियोजना को लेकर कांग्रेस सरकार पर हिमाचल प्रदेश के दीर्घकालिक हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू परियोजना से संभावित आय का प्रचार कर रहे हैं, लेकिन नए समझौते में प्रदेश के जल अधिकारों और बिजली की हिस्सेदारी की वास्तविक स्थिति स्पष्ट नहीं कर रहे हैं।
तोमर ने कहा कि ₹15,624 करोड़ की अनुमानित लागत वाली परियोजना में जल घटक ₹12,096 करोड़ और विद्युत घटक ₹3,528 करोड़ का है। पूर्व व्यवस्था के अनुसार विद्युत घटक में हिमाचल की 50 प्रतिशत हिस्सेदारी होने पर प्रदेश को ₹1,764 करोड़ निवेश करना पड़ता। इसे 13 वर्षों में विभाजित करने पर औसतन ₹135.69 करोड़ वार्षिक निवेश बनता है।
उन्होंने सवाल किया कि क्या इतनी राशि बचाने के लिए प्रदेश के भविष्य के जल अधिकारों से समझौता किया गया? सरकार बताए कि निवेश नहीं करने से हिमाचल की बिजली हिस्सेदारी और संभावित आय पर क्या प्रभाव पड़ेगा। तोमर ने कहा कि पूर्व जल बंटवारे में हिमाचल की हिस्सेदारी 1.7 प्रतिशत बताई गई थी, जो लगभग 50 मिलियन क्यूबिक मीटर पानी होने का दावा है।
मुख्यमंत्री स्पष्ट करें कि नए समझौते में यह अधिकार सुरक्षित है या इसमें परिवर्तन हुआ है। उन्होंने मुख्यमंत्री के ₹1,200 करोड़ वार्षिक आय के दावे पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इस अनुमान के आधार पर ₹1,764 करोड़ का निवेश लगभग डेढ़ वर्ष की सकल आय के बराबर है। हालांकि वास्तविक लाभ का आकलन संचालन लागत, ब्याज और अन्य खर्चों को जोड़कर होना चाहिए।
तोमर ने पूछा कि सिरमौर के किसानों के लिए सिंचाई, स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की क्या व्यवस्था की गई है? उन्होंने कहा कि भाजपा परियोजना का स्वागत करती है और इसे आगे बढ़ाने में केंद्र सरकार की भूमिका को महत्वपूर्ण मानती है। तोमर ने मांग की कि मुख्यमंत्री पूरा समझौता सार्वजनिक करें तथा जल अधिकारों, बिजली हिस्सेदारी, वित्तीय लाभ, सिंचाई और रोजगार के प्रावधानों पर श्वेतपत्र जारी करें।
💡 पृष्ठभूमि (Background)
किशाऊ बांध परियोजना पर हिमाचल प्रदेश के जल अधिकारों को लेकर विवाद उभरा है। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता बलदेव तोमर ने कांग्रेस सरकार पर हिमाचल के दीर्घकालिक हितों को नजरअंदाज करते हुए जल और बिजली के हिस्से को स्पष्ट न करने का आरोप लगाया है। यह खबर महत्वपूर्ण है क्योंकि बांध से उत्पन्न जल और विद्युत संसाधन राज्य के विकास के लिये अहम हैं, परन्तु यदि अधिकार स्पष्ट न हों तो आर्थिक लाभ व पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित हो सकते हैं। आम जनता पर इसका असर पानी की उपलब्धता, बिजली की कीमतें और रोजगार के अवसरों पर पड़