कोडीनयुक्त सिरप मामले में आरोपियों के मेडिकल स्टोरों पर छापा:5 दवाओं के नमूने लिए, रिकॉर्ड की जांच; मुख्य आरोपी प्रियांशु गुप्ता को नोटिस
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →बांदा के बिसंडा इलाके में 30 हजार शीशी कोडीनयुक्त कफ सिरप पकड़े जाने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की। इस मामले से जुड़े आरोपियों के मेडिकल स्टोरों पर औषधि निरीक्षक ने छापा मारा। अतर्रा में दो मेडिकल एजेंसियों की जांच के दौरान पांच दवाओं के नमूने लिए गए। दोनों दुकानों के रिकॉर्ड भी चेक किए गए।
हालांकि, छापे में किसी भी मेडिकल स्टोर से कोडीनयुक्त सिरप नहीं मिला। वहीं, मुख्य आरोपी प्रियांशु गुप्ता को औषधि विभाग ने नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। औषधि निरीक्षक दिव्यप्रकाश मौर्य ने अतर्रा में श्रीराम मेडिकल एजेंसी पर छापा मारा। यह दुकान गिरफ्तार आरोपी रोहित पांडेय के पिता कल्लूराम पांडेय के नाम पर है।
टीम ने यहां से दो एंटीबायोटिक दवाओं के नमूने जांच के लिए लिए। इसके बाद मुख्य आरोपी प्रियांशु गुप्ता की श्याम मेडिकल एजेंसी की भी जांच की गई। यहां से भी दो एंटीबायोटिक दवाओं के नमूने लिए गए। जांच के दौरान एक और दवा का नमूना भी लिया गया। औषधि निरीक्षक ने दोनों मेडिकल एजेंसियों के दवा खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड की जांच की।
मुख्य आरोपी प्रियांशु गुप्ता पर कोडीनयुक्त कफ सिरप के कारोबार से जुड़े होने की आशंका है। इसलिए उसे नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। विभाग ने बताया कि तय समय में जवाब न देने पर लाइसेंस रद्द करने की रिपोर्ट बड़े अधिकारियों को भेजी जाएगी। इस जांच के दौरान अतर्रा के एक निजी डॉक्टर की कार भी आरोपियों के पास से बरामद हुई है।
डॉक्टर के मुताबिक, बुधवार रात करीब नौ बजे आरोपी रोहित पांडेय उनके पास आया था। उसने बताया था कि घर में किसी की तबीयत खराब है। डॉक्टर ने रोहित से उसकी कार के बारे में पूछा तो उसने बताया कि जहां कार खड़ी होती है, वहां बारिश का पानी भर गया है और कार बाहर नहीं निकल पा रही है। इसके बाद उसने डॉक्टर से कार मांगी थी।
पुलिस अब इस पूरे मामले में कार के इस्तेमाल और आरोपियों से डॉक्टर के संबंधों की भी जांच कर रही है।
📡 स्रोत: NewsData.io
🎙️ वॉयस ऑफ क्रांति का मत
कोडीनयुक्त सिरप की अवैध बिक्री से समाज में विश्वास और स्वास्थ्य दोनों ही खतरे में पड़ते हैं। जब दवाइयाँ अनियमित रूप से बेची जाती हैं, तो न केवल रोगी बल्कि परिवार और समुदाय भी प्रभावित होते हैं। हमें स्वच्छ और पारदर्शी चिकित्सा व्यवस्था के लिए मिलकर काम करना चाहिए: नियमों का पालन, निरीक्षण सुदृढ़ करना, और जागरूकता बढ़ाना। इससे न केवल अपराध घटेगा, बल्कि स्वस्थ समाज की नींव भी मजबूत होगी।