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कोलकाता हादसे का चश्मदीद बोला- मां को मरते देखा:दावा- आयोजकों ने पंडाल गिरने की आशंका जताई, इससे भगदड़ मची; 2 दिन पहले ही अवॉर्ड मिला

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 18 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
कोलकाता हादसे का चश्मदीद बोला- मां को मरते देखा:दावा- आयोजकों ने पंडाल गिरने की आशंका जताई, इससे भगदड़ मची; 2 दिन पहले ही अवॉर्ड मिला

बाहर बारिश हो रही थी और कोई भी बाहर नहीं जाना चाहता था। बारिश से बचने के लिए एंट्री गेट पर खड़े लोग अंदर आने के लिए धक्का-मुक्की करने लगे।भीड़ इतनी बढ़ गई कि सांस लेना मुश्किल हो गया। दबाव को न झेल पाने के कारण, अंदर खड़े सभी लोग एक-दूसरे के ऊपर गिर पड़े।मैं भी लोगों के नीचे दब गया था।

बचना मुश्किल था, किसी तरह खुद को संभाला, मां के पास पहुंचा, लेकिन उनकी मौत हो चुकी थी। वो मेरी आंखों के सामने मर गईं। यह कहना है 25 साल के सोनू पाल का। शनिवार शाम कोलकाता चोरबागान दुर्गा पंडाल में मची भगदड़ में 19 लोगों की मौत हो गई, इसमें उनकी मां भी थीं। हादसे को लेकर एक बड़ा दावा किया जा रहा है कि पंडाल के आयोजकों ने एक घोषणा की थी, जिसमें चेतावनी थी कि यदि भीड़ कंट्रोल नहीं हुई तो पंडाल गिर सकता है।

CM अधिकारी ने भी मीडिया से आयोजकों की किसी घोषणा का जिक्र किया था। इसके ठीक बाद भगदड़ मच गई, एग्जिट गेट का एक हिस्सा भी गिर गया। गौरतलब है कि 91 साल से बनाया जा रहा चोरबागान पंडाल इस बार अपनी थीम के चलते सोशल मीडिया पर वायरल है। इसे देखने बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। इतना ही नहीं, चोरबागान पंडाल को इस बार बंगाल सरकार के देवी दुर्गा सम्मान 2026 में सर्वश्रेष्ठ में सर्वश्रेष्ठ (सेरार सेरा) पंडाल का तीसरा अवॉर्ड भी मिला है।

हादसे से जुड़े वीडियोज देखने के लिए यहां क्लिक करें… हादसे से पहले की 5 तस्वीरें… चोरबागान हादसा 4 किस्से...

एंबुलेंस नहीं पहुंची, घायलों को बाइक से अस्पताल पहुंचाया: पुलिस, वॉलंटियर और एंबुलेंस मौके पर नजर नहीं आए। स्थानीय लोगों ने खुद घायलों को बाहर निकालकर बाइक से अस्पताल पहुंचाया। कुछ लोगों ने कहा कि वे शवों को ओला-उबर से ले जा रहे हैं, पुलिस-एम्बुलेंस नहीं है। वर्धमान से आए शख्स ने पत्नी, बहन और भांजे को खोया: पिता ने 5 साल के बेटे को बचाने उठाकर दूसरी तरफ फेंका।

पत्नी को बचा नहीं पाया। वह नीचे गिर गई और भीड़ में दबकर उसकी मौत हो गई। उसके साथ आई बहन और भांजा भी दबकर मर गए। 3 महिलाएं दब गईं, पंडाल को तोड़कर बाहर निकाला: एक महिला ने बताया- अचानक पीछे से जोरदार धक्का लगा और लोग एक-दूसरे पर गिरने लगे। करीब 40-45 मिनट तक सांस लेना मुश्किल हो गया। मैंने उन्हें निकालने की बहुत कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हुई।

आखिरकार पंडाल का एक हिस्सा तोड़कर बाहर निकाला गया। जान तो बच गई, लेकिन ब

📡 स्रोत: Dainik Bhaskar

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