व्यापार

कोसा उत्पादन ने बदली ग्रामीणों की तस्वीर, 5500 को मिला रोजगार

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 26 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
कोसा उत्पादन ने बदली ग्रामीणों की तस्वीर, 5500 को मिला रोजगार

जिले में 37.10 लाख नग का था लक्ष्य, 37.11 लाख नग प्राकृतिक कोसा का संग्रहण किया गया

कोसा उत्पादन ने बदली ग्रामीणों की तस्वीर,5500 को मिला रोजगार

बेहतरीन सिल्क और शानदार कोसा साड़ियों के लिए मशहूर कोसा हब जांजगीर-चांपा जिले ने रेशम उत्पादन के क्षेत्र में मिसाल कायम की है। जिले में प्राकृतिक टसर कोसा उत्पादन से लेकर कीट पालन तक कई योजनाओं में लक्ष्य से अधिक उपलब्धि हासिल की गई है। इस उपलब्धि से स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिला है और 5500 से अधिक ग्रामीण परिवारों को रोजगार मिला है।जिले के बलौदा विकास खंड के ग्राम महुवा (च) के रेशम पालन के माध्यम से अच्छी रोजगार मिल रही है,

जिले में वित्तीय वर्ष के दौरान 37.10 लाख नग कोसा संग्रहण का लक्ष्य रखा गया था। विभाग और स्थानीय संग्राहकों के समन्वय और मेहनत से 37.11 लाख नग प्राकृतिक कोसा का संग्रहण किया गया। इस तरह लक्ष्य का 100 प्रतिशत से अधिक हासिल हुआ।

मधुप कुमार चंदन, सहायक संचालक रेशम :-

जिले में पैदा किया गया टसर कोसा।

विस्तार योजनाओं में भी लक्ष्य से आगे निकला जिला

पालित प्रजाति टसर स्वस्थ डिम्ब समूह योजना में 2.05 लाख नग के लक्ष्य के मुकाबले 2.36 लाख नग का उत्पादन हुआ, जो 115.15 प्रतिशत है। टसर रेशम विकास एवं विस्तार योजना में 72.18 लाख नग के लक्ष्य के मुकाबले 77.38 लाख नग काम हुआ। यह 107.20 प्रतिशत उपलब्धि है और इससे 876 स्थानीय हितग्राही लाभान्वित हुए। शहतूत रेशम विकास योजना के तहत 1,800 किलोग्राम के लक्ष्य के मुकाबले 2,095 किलोग्राम उत्पादन हुआ। यह 116 प्रतिशत उपलब्धि है।

.डॉ के डी महंत वरिष्ठ वैज्ञानिक क़ृषि विज्ञान केंद्र जांजगीर

कोसा बुनाई को वैज्ञानिक मार्गदर्शन से मिली नई रफ्तार

यह सफलता सुनियोजित रणनीति और प्रशासनिक प्रयासों का परिणाम है। जिले के चांपा,बलौदा और अकलतरा क्षेत्रों में कोसा बुनाई व धागाकरण का काम पीढ़ियों से होता आ रहा है। रेशम विभाग ने पारंपरिक हुनर को वैज्ञानिक मार्गदर्शन दिया, जिससे उत्पादन की गुणवत्ता और

मात्रा बढ़ी। टसर कोसा की उपलब्धता बढ़ने से बुनकरों को कच्चा माल आसानी से मिलने लगा। इससे बाहर से महंगे दाम पर माल मंगाने और बिचौलियों पर निर्भरता कम हुई। लागत घटी, मुनाफा बढ़ा और महिला स्व-सहायता समूहों से महिलाओं को रोजगार मिला।

बाईट

01.मधुप कुमार चंदन, सहायक संचालक रेशम

02.अनिल कुमार कश्यप पद- प्रदर्शक रेशम कार्यकाल सहायक संचालक रेशम जांजगीर

03.डॉ के डी महंत वरिष्ठ वैज्ञानिक क़ृषि विज्ञान केंद्र जांजगीर

04 शकुंतला यादव किसान

M
Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।