कृषक विकास संगठनों के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित
अगस्त 22, कुल्लू (हिमाचल प्रदेश): हिमाचल प्रदेश फसल विविधीकरण प्रोत्साहन परियोजना (चरण-II) जायका-ओ.डी.ए. के अंतर्गत खण्ड परियोजना प्रबंधन इकाई, कुल्लू द्वारा कृषि विज्ञान केंद्र, बजौरा में कृषक विकास संगठनों की प्रबंधन समितियों के सदस्यों के लिए एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया।
प्रशिक्षण में जिला कुल्लू की 16 उप-परियोजनाओं से जुड़े 42 प्रबंधन समिति सदस्यों ने भाग लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ खण्ड परियोजना प्रबंधक, कुल्लू डॉ. जयंत रत्ना ने किया। उन्होंने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए कहा कि कृषक विकास संगठनों को प्रभावी एवं सुदृढ़ बनाने में प्रबंधन समिति के सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
उन्होंने कहा कि सदस्यों को अपने दायित्वों एवं जिम्मेदारियों की जानकारी होने से संगठनों में पारदर्शिता, जवाबदेही और बेहतर समन्वय सुनिश्चित किया जा सकता है।
प्रशिक्षण के दौरान कृषक विकास संगठनों के गठन एवं संचालन, प्रबंधन समिति की भूमिका, अभिलेखों के रख-रखाव, बैठकों के आयोजन, सामूहिक निर्णय लेने, वित्तीय प्रबंधन तथा परियोजना के दिशा-निर्देशों के अनुरूप कार्य करने सहित विभिन्न विषयों पर जानकारी प्रदान की गई।
प्रतिभागियों के साथ व्यावहारिक समस्याओं, किसानों की भागीदारी तथा सिंचाई योजनाओं के संचालन एवं रख-रखाव पर भी चर्चा की गई।
कार्यक्रम में जिला परियोजना प्रबंधक, मंडी डॉ. हेम राज वर्मा ने मुख्य सलाहकार हिमाचल प्रदेश फसल विविधीकरण प्रोत्साहन परियोजना (चरण-II) जायका-ओ.डी.ए. बलजीत सिंह संधू, उप-परियोजना निदेशक डॉ. राजेश ठाकुर तथा पीएमसी के विशेषज्ञों डॉ. नरदेव ठाकुर और डॉ. आर.एस. ठाकुर का स्वागत एवं सम्मान किया।
डॉ. राजेश ठाकुर ने किसानों की आय बढ़ाने और कृषि उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध करवाने के लिए उत्पादन के साथ-साथ संग्रहण, ग्रेडिंग, पैकेजिंग, मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग एवं विपणन पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि किसानों को उत्पादन से लेकर बाजार तक पूरी मूल्य श्रृंखला से जोड़ना आवश्यक है।
सामूहिक प्रयासों और मजबूत बाजार संपर्क के माध्यम से कृषि को अधिक लाभकारी एवं व्यवसायिक गतिविधि बनाया जा सकता है। डॉ. आर.एस. ठाकुर ने कृषक विकास संगठनों की प्रबंधन समितियों के सदस्यों की भूमिका एवं उत्तरदायित्वों पर विस्तार से चर्चा की।
उन्होंने नियमित बैठकें आयोजित करने, अभिलेखों का उचित रख-रखाव, सामूहिक निर्णय लेने तथा किसानों की समस्याओं के समाधान पर जोर दिया। उन्होंने फसल विविधीकरण, नई कृषि तकनीकों, प्रदर्शन कार्यक्रमों, प्रसार गतिविधियों तथा एफपीओ के माध्यम से बाजार संपर्क मजबूत करने की आवश्यकता बताई।
किसानों की आय बढ़ाने के लिए सामूहिक विपणन, मूल्य संवर्धन, डेयरी, मधुमक्खी पालन, शहद उत्पादन एवं सूखी सब्जियों जैसी आयवर्धक गतिविधियों को बढ़ावा देने पर भी चर्चा की गई। पीएमसी के पोस्ट-हार्वेस्ट विशेषज्ञ डॉ. नरदेव ठाकुर ने छोटे स्तर के एफपीओ से बड़े एवं सफल एफपीओ के विकास तक के अपने अनुभव साझा किए।
उन्होंने सामूहिक खरीद, ग्रेडिंग, पैकेजिंग, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग और सामूहिक विपणन को एफपीओ की सफलता के लिए महत्वपूर्ण बताया। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों ने अपने अनुभव, समस्याएं एवं सुझाव साझा किए।
प्रश्नोत्तर एवं संवादात्मक सत्र में किसानों की वास्तविक समस्याओं, बाजार से जुड़ाव, कृषि उत्पादों के उचित मूल्य, सिंचाई योजनाओं के रख-रखाव तथा सामूहिक विपणन से संबंधित विषयों पर चर्चा की गई और विशेषज्ञों द्वारा आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया गया।
कृषि विज्ञान केंद्र, बजौरा के कार्यक्रम समन्वयक डॉ. सुरेंद्र कुमार ठाकुर ने केंद्र की विभिन्न गतिविधियों एवं किसानों के लिए उपलब्ध तकनीकी सेवाओं की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि केंद्र द्वारा कृषि, बागवानी, पशुपालन, खाद्य प्रसंस्करण, उद्यमिता विकास तथा कृषि आधारित आजीविका से संबंधित तकनीकी मार्गदर्शन, प्रशिक्षण एवं प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बलजीत सिंह संधू ने हिमाचल प्रदेश फसल विविधीकरण प्रोत्साहन परियोजना (चरण-II) के उद्देश्यों एवं लक्ष्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि परियोजना का उद्देश्य किसानों को पारंपरिक कृषि से आगे बढ़ाकर विविधीकृत, लाभकारी एवं बाजारोन्मुखी कृषि की ओर प्रोत्साहित करना है।
उन्होंने फसल विविधीकरण, आधुनिक कृषि तकनीकों, सिंचाई सुविधाओं के सुदृढ़ीकरण, उत्पादकता एवं किसानों की आय में वृद्धि तथा बेहतर बाजार एवं मूल्य संवर्धन गतिविधियों से किसानों को जोड़ने पर बल दिया।
उन्होंने कृषक विकास संगठनों की सक्रिय भागीदारी को परियोजना की सफलता के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए प्रतिभागियों से परियोजना की गतिविधियों को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने और अधिक से अधिक किसानों तक इसका लाभ पहुंचाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर पीएमसी से पोस्ट-हार्वेस्ट इंजीनियर शतृशान पुरोहित, जिला परियोजना प्रबंधन इकाई मंडी से निर्माण अभियंता सौरव कुमार, खण्ड परियोजना प्रबंधन इकाई कुल्लू से कृषि अधिकारी संजय कुमार, कृषि प्रसार अधिकारी श्रीमती ज्या प्रधान तथा आई.ई.सी. समन्वयक युवराज सहित अन्य अधिकारी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. जयंत रत्ना ने मुख्य अतिथि, संसाधन व्यक्तियों, कृषि विज्ञान केंद्र बजौरा के अधिकारियों तथा सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।
उन्होंने आशा व्यक्त की कि प्रतिभागी प्रशिक्षण के दौरान प्राप्त तकनीकी एवं व्यावहारिक ज्ञान का उपयोग अपने क्षेत्रों में करेंगे तथा अन्य किसानों तक भी इसका प्रभावी प्रसार करेंगे।