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कृषि विस्तार अधिकारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी:ई-अटेंडेंस का विरोध, बोले- गांवों में नेटवर्क नहीं, व्यवहारिक नहीं यह व्यवस्था

लेखक: JKS News Desk अंतिम अपडेट: 1 सितंबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
कृषि विस्तार अधिकारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी:ई-अटेंडेंस का विरोध, बोले- गांवों में नेटवर्क नहीं, व्यवहारिक नहीं यह व्यवस्था

प्रदेश भर में कृषि विस्तार अधिकारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल जारी है। अपनी लंबित मांगों को लेकर अधिकारी 25 अगस्त से जिला मुख्यालय स्थित उप संचालक कृषि कार्यालय में धरने पर बैठे हैं।

कृषि सीजन के बीच इस हड़ताल से विभाग के मैदानी कार्य प्रभावित हो रहे हैं, जिससे किसानों को फसल संबंधी तकनीकी मार्गदर्शन, कीट-रोग नियंत्रण और कृषि योजनाओं की जानकारी मिलने में परेशानी आ रही है। ई-अटेंडेंस प्रणाली का विरोध अधिकारियों का कहना है कि उनकी हड़ताल का एक मुख्य कारण ई-अटेंडेंस प्रणाली का विरोध है।

धरने पर बैठे कृषि विस्तार अधिकारियों ने बताया कि उनका अधिकांश काम खेतों और गांवों में होता है। वे सुबह से ही किसानों और ग्रामीणों के बीच पहुंच जाते हैं, जहां कई बार मोबाइल नेटवर्क और तकनीकी सुविधाएं उपलब्ध नहीं होतीं। एक कृषि विस्तार अधिकारी ने बताया, "ई-अटेंडेंस हमारे काम की प्रकृति के हिसाब से व्यवहारिक नहीं है।

हमारा काम करने का कोई निश्चित समय नहीं होता। ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचने के बाद नेटवर्क की समस्या के कारण समय पर ई-अटेंडेंस लगाना संभव नहीं होता।" ग्रेड-पे बढ़ाने की मांग अधिकारियों ने वेतन से जुड़ी मांग भी उठाई है। उनकी मांग है कि वर्तमान में उनका ग्रेड-पे 2400 रुपए है, जिसे बढ़ाकर 2800 रुपए किया जाना चाहिए।

इसके अतिरिक्त, अतिरिक्त केंद्र का प्रभार मिलने पर वर्तमान में केवल 500 रुपए भत्ता दिया जाता है, जिसे वे अपर्याप्त मानते हैं। अधिकारियों ने इसे बढ़ाकर 5 हजार रुपए प्रतिमाह करने की मांग की है।

उन्होंने यह भी कहा कि पटवारियों को हर महीने 4 हजार रुपए का भत्ता मिलता है, इसलिए कृषि विस्तार अधिकारियों को भी समान रूप से 4 हजार रुपए भत्ता दिया जाना चाहिए। पहले चरणबद्ध तरीके से किया था विरोध आंदोलन से पहले अधिकारियों ने मांगों को लेकर चरणबद्ध तरीके से विरोध किया। 21 अगस्त को भोपाल में प्रदेश स्तरीय धरना दिया गया था।

इसके बाद 24 अगस्त को सामूहिक अवकाश लेकर विरोध दर्ज कराया गया। इसके बावजूद मांगों पर समाधान नहीं होने के बाद 25 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की गई। कृषि विभाग के मैदानी काम प्रभावित अधिकारियों की हड़ताल का असर कृषि विभाग के मैदानी कामों पर भी दिखाई दे रहा है।

फसलों से जुड़े सर्वे, सत्यापन, निरीक्षण और विभिन्न कृषि योजनाओं से संबंधित कार्य प्रभावित हो रहे हैं। कृषि सीजन में किसानों को समय पर तकनीकी सलाह, फसल में लगने वाले कीट और रोगों की जानकारी तथा विभागीय योजनाओं का लाभ लेने के लिए सहयोग की जरूरत होती है।

अधिकारियों का कहना है कि शासन स्तर से उनकी लंबित मांगों पर ठोस और सकारात्मक निर्णय होने तक हड़ताल जारी रहेगी। वहीं, आंदोलन लंबा खिंचने पर कृषि सीजन में किसानों की परेशानी और बढ़ने की आशंका है।

📡 स्रोत: NewsData.io

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