आज कृष्ण मंदिरों में गूंजेगा जय कन्हैया लाल की...:जन्माष्टमी की रात मंदिरों में उमड़ेगी भीड़, बांके-बिहारी मंदिर में लगेगा 51 किलो का माखन-मिश्री का भोग
ताज़ा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे WhatsApp चैनल से जुड़ेंJoin करें →शहर के कृष्ण मंदिरों में जन्माष्टमी पूरे धूमधाम से मनेगी। पर्व को लेकर मंदिर में सुंदर साज-सज्जा के साथ आकर्षक लाइटिंग की है। भगवान की नई पोशाक, अभिषेक से लेकर आरती-पूजन-भोग आदि की सभी तैयारियां पूरी हो चुकी है। भक्तों के लिए विशेष दर्शन व्यवस्थाएं भी रहेगी, ताकि आसानी से दर्शन हो सकें।
मंदिरों में होने वाला यह उत्सव केवल पूजा और सजावट तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें कृष्ण की बाल लीलाओं, नंद उत्सव की उमंग और प्रकृति से जुड़े उनके संदेश की झलक भी है। मंदिरों में चल रही तैयारियों के बीच श्रद्धालुओं की आवाजाही भी बढ़ने लगी है। कोई फूल लेकर पहुंच रहा है, तो कोई भोग की सामग्री।
कहीं पंडित पूजन की तैयारी में जुटे हैं, तो कहीं मंदिर के सेवक सजावट को अंतिम रूप दे रहे हैं। जन्म की रात जब घड़ी 12 बजाएगी, तब शंख-घंटियों और जयकारों से जन्मोत्सव मनाया जाएगा। राजबाड़ा के समीप बने गोपाल मंदिर में इस साल भगवान श्रीकृष्ण का अभिषेक पंचामृत और सप्त पवित्र नदियों के जल से कर नए वस्त्र पहनाए जाएंगे।
माखन-मिश्री, पंचमेवा और लड्डू का बाल भोग भगवान को अर्पित किया जाएगा। मंदिर के पुजारी पंडित बालमुकुंद पाराशर बताते हैं कि जन्मोत्सव की विधियों में 11 पंडित शामिल होंगे। मंत्रोच्चार के बीच भगवान का अभिषेक होगा। बगिया बनेंगे मंदिर, फूलों से होगी सजावट गोपाल मंदिर में हर साल की तरह इस बार भी फूल बंगला सजाया गया है।
मंदिर की सजावट में फूलों के साथ-साथ आकर्षक लाइटिंग देखने को मिलेगी। फूलों से सजे इस दरबार में भगवान का विशेष पुष्प श्रृंगार किया जाएगा। मंदिर में तैयारियां कर रहे लोगों के लिए यह केवल सजावट का काम नहीं, बल्कि भगवान के स्वागत की तैयारी है। फूलों की पंखुड़ियों, खुशबू के बीच भगवान का श्रृंगार होगा।
यहां शुक्रवार रात 12 बजे भगवान का जन्मोत्सव मनाया जाएगा। गोवर्धन पूजा का उपदेश आज भी आवश्यक पुजारी पंडित बालमुकुंद पाराशर कहते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं में प्रकृति हमेशा केंद्र में रही है। उन्होंने जल, वायु, नदी, वन और पर्वतों के संरक्षण का संदेश दिया।
उन्होंने अलग-अलग प्रसंगों को याद करते हुए कहा कि इन कथाओं में प्रकृति के प्रति सम्मान और उसके संरक्षण की सीख छिपी है। यशोदा माता मंदिर में फूलों की सजावट पर ज्यादा ध्यान यशोदा माता मंदिर में भी जन्माष्टमी को लेकर उत्साह है। यहां शुक्रवार रात 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण का जन्मोत्सव मनाया जाएगा।
मंदिर में इस बार फूलों की सजावट पर विशेष ध्यान दिया गया है। मंदिर में कुछ रिनोवेशन भी कराया गया है, जिससे श्रद्धालुओं को दर्शन के दौरान नया अनुभव मिलेगा। यहां आने वाले भक्तों को गर्मी का अहसास ना हो इसके लिए लाइटिंग कम लगाई गई है। जन्माष्टमी के अगले दिन यहां नंद उत्सव मनाया जाएगा।
शाम को 56 भोग अर्पित कर भजन संध्या होगी। श्री बांके-बिहारी मंदिर में लगेगा 51 किलो माखन-मिश्री का भोग श्री बांके-बिहारी मंदिर के पुजारी कृष्णदास विराट ने बताया कि शुक्रवार को जन्माष्टमी का महोत्सव मनाया जाएगा। भगवान का ब्रह्म मुहूर्त में अभिषेक कर उन्हें नए वस्त्र धारण कराए जाएंगे। भगवान का भव्य श्रृंगार होगा।
सुबह भगवान को बाल भोग अर्पित किया जाएगा। शाम को राजकमल बैंड के द्वारा भजन संध्या की जाएगी। रात 12 बजे भगवान का अभिषेक कर उन्हें 51 किलो माखन-मिश्री का भोग अर्पित किया जाएगा। भगवान की आरती की जाएगी। इस बार मंदिर को लाल थीम पर सजाया गया है।
पूरा मंदिर में लाल डेकोरेशन किया गया है, साथ ही भगवान के वस्त्र भी लाल ही रखे हैं। इस्कॉन मंदिर में वृंदावन से आए भगवान के वस्त्र इस जन्माष्टमी पर इंदौर के इस्कॉन मंदिर में भगवान के वस्त्र वृंदावन से बुलवाए गए है। यहां पर दो बड़े पंडाल बनाए गए है। इसमें एक पंडाल में सांस्कृति आयोजन होंगे।
गुरुवार को मंदिर में नया प्रकल्प शुरू किया गया है, जिसमें जरूरतमंदों तक प्रसाद पहुंचाया जाएगा। मंदिर में 24 घंटे का संकीर्तन होगा। 5 सितंबर को मंदिर में नंदोत्सव मनाया जाएगा। इसमें भी बड़ी संख्या में भक्त शामिल होंगे। 6 सितंबर को इंदौर में बारिश के लिए यज्ञ किया जाएगा।
इन मंदिरों में होंगे भव्य आयोजन एरोड्रम रोड, पीलिया खाल स्थित प्राचीन हंसदास मठ पर जन्माष्टमी का महापर्व शुक्रवार, 4 सितम्बर को हंस पीठाधीश्वर महंत रामचरणदास महाराज एवं महामंडलेश्वर महंत पवनदास महाराज के सानिध्य में धूमधाम से मनाया जाएगा। जन्माष्टमी महोत्सव के लिए मठ पर इस बार दो दिवसीय महोत्सव मनाया जाएगा।
जिसमें भगवान कृष्ण के मथुरा काराग्रह में जन्म और जन्म के पूर्व वासुदेव एवं देवकी को भगवान द्वारा चारभुजा के रूप में दर्शन देने के साथ ही यमुना पार करते हुए झांकी भी आकर्षक लाइटिंग एवं पुष्प सज्जा से श्रृंगारित रहेगी।
जन्माष्टमी के दिन रात 10 बजे अभिषेक, पूजा, अर्चना के बाद रात 11.30 बजे से भक्तों को प्रसाद वितरण तथा भगवान पद्मनाथ स्वरूप शालीग्रामजी का पंचामृत अभिषेक होगा और रात ठीक 12 बजे कृष्ण जन्मोत्सव की महाआरती के बाद पंजेरी प्रसाद वितरण के साथ समापन होगा।
श्री श्रीविद्याधाम पर महामंडलेश्वर स्वामी चिन्मयानंद सरस्वती के सानिध्य में सुबह एवं दोपहर को हरियाली, कदम के फूल एवं फूलों से लड्डू गोपाल की आकर्षक झांकी सजाई जाएगी।
जन्माष्टमी के उपलक्ष्य में मंदिर पर 21 विद्वानों द्वारा “ओम नमो भगवते वासुदेवाय” द्वादश महामंत्र से आराधना, पुरुषोपचार पूजन, महाभोग एवं महाआरती के आयोजन होंगे। माखन मिश्री एवं धनिया-पंजेरी के प्रसाद का वितरण भी होगा। शाम को 51 विद्वानों द्वारा आचार्य पं.
राजेश शर्मा के निर्देशन में भगवान कृष्ण का तुलसी दल, सफेद तिल्ली एवं पुष्पों से सहस्त्रार्चन किया जाएगा। षोडशोपचार पूजन, गोदुग्ध से अभिषेक एवं श्रृंगार के बाद रात ठीक 12 बजे जन्मोत्सव की आरती होगी। शनिवार को नंदोत्सव मनाया जाएगा।
धूमधाम से निकलेगी शोभायात्रा यादव अहीर समाज केन्द्रीय समिति के तत्वावधान में शुक्रवार सुबह 10 बजे बड़ा गणपति चौराहे से शोभायात्रा निकाली जाएगी। कई राजनेता आयोजन में रजत रथ में विराजित राधा-कृष्ण एवं गौमाता का पूजन कर करेंगे।
📡 स्रोत: NewsData.io