कुल्लू दशहरा की चौथी सांस्कृतिक संध्या कुलदीप शर्मा के नाम, नाटी पर झूमे दर्शक
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कुल्लू: अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव की चौथी सांस्कृतिक संध्या हिमाचली लोकगायक कुलदीप शर्मा के नाम रही। संध्या में हिमाचल प्रदेश सरकार के आयुष मंत्री यादविंदर गोमा ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। इस अवसर पर दशहरा उत्सव समिति के उपाध्यक्ष डॉ. अमित कुमार शर्मा ने कैबिनेट मंत्री को कुल्लवी टोपी, शॉल और स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया।
चौथी सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ शाम पांच बजे सूत्रधार कला संगम के कलाकारों द्वारा पारंपरिक कुल्लवी नाटी की प्रस्तुति के साथ हुआ। इसके बाद प्रदेशभर से आए कलाकारों ने कुल्लवी, हिंदी, चंबयाली, पंजाबी और फिल्मी गीतों व नृत्यों के माध्यम से दर्शकों का मनोरंजन किया। कार्यक्रम में अर्चिता अखेरा ग्रुप के फैशन शो सहित वीएस भारद्वाज, बोला कृष्ण, चुरेश साहिल्य, अनिल सूर्यवंशी, विशाल फसवाल, गौरव पठानिया पुलिस बैंड, सिराजी और तत्वा बैंड ने प्रस्तुतियां दीं।सांस्कृतिक संध्या का मुख्य आकर्षण हिमाचली लोकगायक कुलदीप शर्मा रहे।
मंच पर पहुंचते ही दर्शकों ने तालियों और सीटियों के साथ उनका स्वागत किया। कुलदीप शर्मा ने ‘रोहड़ू जाना मेरी अमिए’, ‘हो नीलिमा हो नीलिमा’ और ‘मेरी सोनुये’ जैसे लोकप्रिय गीतों से समां बांध दिया। उनके गीतों की धुन पर पूरा पंडाल झूम उठा। दर्शकों ने मोबाइल फोन की फ्लैश लाइट जलाकर कलाकार का उत्साह बढ़ाया।
रात दस बजे तक चली इस सांस्कृतिक संध्या ने कुल्लू दशहरा उत्सव की रौनक को और बढ़ा दिया।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री यादविंदर गोमा ने कहा कि दशहरा उत्सव समिति के अध्यक्ष एवं स्थानीय विधायक सुंदर सिंह ठाकुर के प्रयासों से उत्सव को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया गया है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर के कलाकारों के साथ-साथ देशभर और हिमाचल प्रदेश के कलाकारों को भी अपनी प्रतिभा और संस्कृति प्रदर्शित करने का अवसर मिल रहा है।
प्रदेश सरकार दशहरा उत्सव को और बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है।वहीं, हिमाचली लोकगायक कुलदीप शर्मा ने दशहरा उत्सव में प्रस्तुति देने का अवसर मिलने पर जिला प्रशासन और स्थानीय विधायक सुंदर सिंह ठाकुर का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार हिमाचल के कलाकारों और संस्कृति को आगे बढ़ाने के लिए मंच उपलब्ध करवा रही है।
उन्होंने सुझाव दिया कि हिमाचली कलाकारों को बड़े मंचों पर अधिक अवसर दिए जाने चाहिए। साथ ही, हिमाचली संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए हिमाचली कलाकारों, बॉलीवुड और पंजाबी कलाकारों की प्रस्तुतियों के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता है, ताकि सभी कलाकारों को प्रोत्साहन मिल सके।