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कुल्लू दशहरा के छठे दिन ढालपुर में भव्य देवमिलन, सैकड़ों देवी-देवताओं ने भगवान रघुनाथ के दरबार में भरी हाजिरी

लेखक: Maroof Ahmed Khan अंतिम अपडेट: 26 अक्टूबर 2026
प्रकाशक: वॉयस ऑफ क्रांति
कुल्लू दशहरा के छठे दिन ढालपुर में भव्य देवमिलन, सैकड़ों देवी-देवताओं ने भगवान रघुनाथ के दरबार में भरी हाजिरी

कुल्लू: अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव के छठे दिन ऐतिहासिक ढालपुर मैदान में पारंपरिक मोहल्ला उत्सव धूमधाम से मनाया गया। इस अवसर पर सैकड़ों देवी-देवताओं ने भगवान रघुनाथ के अस्थायी शिविर और रथ के पास पहुंचकर हाजिरी भरी। भगवान रघुनाथ के रथ के चारों ओर हुए भव्य देवमिलन से पूरा क्षेत्र देवमय हो गया।

पारंपरिक वाद्ययंत्रों की देवधुनों के बीच श्रद्धालु इस ऐतिहासिक परंपरा के साक्षी बने।मोहल्ला उत्सव के दौरान भगवान रघुनाथ की ओर से सभी देवी-देवताओं को केसर की पुड़िया और पुष्प भेंट कर लंका दहन के लिए आमंत्रित किया गया। इस दौरान देवी-देवताओं ने भगवान नरसिंह की गद्दी के पास नतमस्तक होकर छड़ीबरदार महेश्वर सिंह को पुष्प अर्पित किए।

उत्सव के छठे दिन भगवान नरसिंह की जलेब में भी रौनक देखने को मिली।

भगवान रघुनाथ के छड़ीबरदार महेश्वर सिंह ने बताया कि दशहरा उत्सव के छठे दिन मोहल्ला कार्यक्रम आयोजित किया जाता है, जिसमें उत्सव में पहुंचे देवी-देवता भगवान रघुनाथ के अस्थायी शिविर और रथ के पास हाजिरी भरते हैं। इस वर्ष भी सैकड़ों देवी-देवताओं ने इस परंपरा में भाग लिया। उन्होंने बताया कि देवी-देवताओं को केसर की पुड़िया भेंट कर लंका दहन का न्योता दिया गया है। लंका दहन के बाद भगवान रघुनाथ अपने सुल्तानपुर स्थित मंदिर में लौटेंगे।

उन्होंने बताया कि रात को भगवान रघुनाथ के अस्थायी शिविर में देवी दुर्गा पूजन किया जाएगा। इस दौरान माता त्रिपुरा सुंदरी के पुजारी द्वारा देवी के दुर्गा स्वरूप की पूजा की जाएगी और शेर की सवारी से जुड़ी प्राचीन परंपरा का निर्वहन होगा। उन्होंने यह भी कहा कि दशहरा उत्सव के छठे दिन जलेब में श्रद्धालुओं की अच्छी रौनक रही।भगवान रघुनाथ के कारदार दानवेंद्र सिंह ने बताया कि मोहल्ला उत्सव के दौरान सभी देवी-देवताओं की भगवान रघुनाथ के दरबार में उपस्थिति दर्ज की जाती है।

इसके बाद भगवान रघुनाथ की ओर से केसर की पुड़िया और फूल भेंट कर उन्हें लंका दहन के लिए आमंत्रित किया जाता है। उन्होंने बताया कि अगले दिन शाम पांच बजे रथयात्रा निकाली जाएगी। इसमें देवी-देवताओं के साथ लंका दहन के लिए प्रस्थान किया जाएगा और लंका बेकर में पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार लंका दहन किया जाएगा।

दानवेंद्र सिंह ने बताया कि भगवान नरसिंह की जलेब में देवी-देवताओं को अलग से निमंत्रण नहीं दिया जाता, बल्कि वे स्वयं इसमें भाग लेते हैं। इस जलेब में आम तौर पर सात से आठ देवी-देवता शामिल होते हैं।इस अवसर पर हिमाचल भाजपा प्रभारी श्रीकांत शर्मा ने कहा कि दशहरा बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है।

कुल्लू की देवभूमि में अंतरराष्ट्रीय दशहरा उत्सव के दौरान भगवान रघुनाथ और देवी-देवताओं के दर्शन करने का अवसर मिलना सौभाग्य की बात है।स्थानीय श्रद्धालु देवराज ने कहा कि दशहरा उत्सव के छठे दिन मोहल्ला दरबार में सभी देवी-देवताओं ने भगवान रघुनाथ के अस्थायी शिविर में हाजिरी भरी। भव्य देवमिलन और देव समागम को देखकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।

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Maroof Ahmed Khan

Maroof Ahmed Khan वॉयस ऑफ क्रांति के संस्थापक एवं प्रधान संपादक हैं। वे जनसरोकार, निष्पक्ष रिपोर्टिंग और जनता की आवाज़ को प्रमुखता देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।