कुर्मी समाज के लिए शुभेंदु अधिकारी का बड़ा ऐलान, UCC पर क्या कहा?
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पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने रविवार को कहा है कि पिछले साल हुए हिंसक विरोध प्रदर्शन के सिलसिले में कुर्मी समुदाय के सदस्यों के खिलाफ पिछली सरकार की तरफ से दर्ज मामले वापस लिए जाएंगे.
इसके अलावा मुख्यमंत्री ने यूसीसी के बारे में बात करते हुए कहा है कि कुर्मी समुदाय के प्रतिनिधियों के अनुरोध पर उन्हें यूसीसी के दायरे से बाहर रखा गया था.
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री अधिकारी ने पुरुलिया के कराडी मैदान में आयोजित भव्य कुर्मी करम उत्सव को संबोधित करते हुए यह घोषणा की है.
समुदाय ने सितंबर 2025 में जिले में अनुसूचित जनजाति का दर्जा दिए जाने की मांग को लेकर आंदोलन किया था.
इसके अलावा अधिकारी ने कहा है कि आंदोलन के दौरान पिछली सरकार की तरफ से कुर्मी समुदाय के लोगों के खिलाफ दर्ज किए गए सभी मामले वापस लिए जाएंगे.
पिछली सरकार ने फूट डालने के अलावा कुछ नहीं किया
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी पुरुलिया-1 ब्लॉक के चकलटोर ग्राम पंचायत इलाके में कर्म पर्वतिया महाजारुया में कुर्मी समुदाय के एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे.
उन्होंने कहा है कि पिछली सरकार ने कुर्मी समुदाय में फूट डालने के अलावा कुछ नहीं किया है. अपने वादे पूरे नहीं किए हैं. इसके बजाय विरोध प्रदर्शनों के दौरान लोगों के खिलाफ पुलिस का इस्तेमाल किया है.
पिछली सरकार ने अपना कोई भी वादा पूरा नहीं किया है. वे यहां के लोगों से झूठ बोलते रहे.
समुदाय के सदस्यों के बीच फूट डालकर उन्हें देश के बाकी हिस्सों से अलग-थलग करने की कोशिश की. आंदोलन के दौरान पुलिस का इस्तेमाल किया.
पार्टी की तरफ से वादों को पूरा करेगी सरकार
इसके अलावा पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ने कहा है कि इस साल की शुरुआत में सत्ता में आई बीजेपी, अप्रैल में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों से पहले पार्टी की तरफ से किए वादों को पूरा करेगी.
उन्होंने
📡 स्रोत: ABP Live
💡 पृष्ठभूमि (Background)
कुर्मी समाज के लिए शुभेंदु अधिकारी का बड़ा ऐलान, UCC पर क्या कहा? यह खबर पश्चिम बंगाल में कुर्मी समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ है। मुख्यमंत्री ने पिछले साल के हिंसक विरोध के दौरान कुर्मी सदस्यों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने और यूसीसी से बाहर रखने का निर्णय लिया है। यह कदम कुर्मी समुदाय के लिए कानूनी सुरक्षा और सामाजिक समावेशन की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है। आम जनता के लिए यह स्पष्ट करता है कि राज्य सरकार ने सामाजिक असमानता को दूर करने के प्रयासों को आगे बढ़ाया है, जिससे क्षेत्रीय शांत